आय से अधिक संपत्ति में गिरफ्तार पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ब्यूरो ने मजीठिया के करीबी हरप्रीत सिंह गुलाटी को अरेस्ट किया है। आकाश स्प्रीति, यू वी एंटरप्राइज और एडी एंटरप्राइजेज नाम की शराब कंपनियों के जरिए पैसों का लेन-देन किया गया था। वहीं, आरोप है कि गुलाटी के जरिए पूर्व मंत्री ने शिमला और दिल्ली में संपत्तियां बनाई थीं। आरोपी को आज मोहाली अदालत में पेश कर विजिलेंस ने छह दिन का रिमांड लिया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी पहले विजिलेंस का सरकारी गवाह था। जबकि विजिलेंस का कहना है कि जांच में उन्हें अब सबूत मिले। इसके बाद केस दर्ज किया है। इससे पहले मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल के खिलाफ मोहाली जिला अदालत में एक एप्लिकेशन विजिलेंस ने दायर की है। उसे भगोड़ा घोषित करने की तैयारी की है। इस पर एक दिसंबर को सुनवाई होगी। गुलाटी मजीठिया केस विजिलेंस का सरकारी गवाह गुलाटी की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि गुलाटी इस केस में विजिलेंस का गवाह है। आप अपने गवाह को ही गिरफ्तार कर पेश करके, मारपीट कर यह सोचते हो कि कोई बयान हासिल कर लोगे। तो कोर्ट इस चीजको परमिट नहीं कर सकता है। बड़ी डिटेल से इस मामले में बहस हुई है। अगली सुनवाई पर विजिलेंस जवाब दाखिल करेगी। आरोपी का छह दिन का रिमांड मिला है। वकील ने मीडिया को बताया कि आपने अपने जीवन में ऐसा केस नहीं देखा होगा, जहां पर इन्वेस्टिगेशन एजेंसी अपने ही गवाह को गिरफ्तार करती है। यह ठीक है या नहीं है। भविष्य में पता चल जाएगा। सब सारी साजिश साफ हो जाएगी। कई बार गवाह आपके मन की बात अदालत को बताने काे राजी नहीं होता है। तो आपकी अपनी मजबूरी बन जाती है। विजिलेंस ने बताई केस दर्ज करने की वजह सरकारी वकील ने कहा कि मजीठिया केस में कई लोगों की भूमिका की जांच हुई है। वह शराब कारोबारी हैं। उन्हें छह दिन का रिमांड दिया गया है। अगली तारीख छह है। 2007 में हरप्रीत गुलाटी व अमरप्रीत गुलाटी कार एक्सेसरीज़ का बिजनेस करते थे। इनका शराब का कोई कारोबार नहीं था। यह बिक्रम सिंह मजीठिया के करीबी थे। इसके कारण जब अकाली दल की सरकार बनती है तो लिकर माफिया को कंट्रोल करने के लिए कुछ कंपनियां बनाई गईं। उन कंपनियों ने बिजनेस करना शुरू किया। इन कंपनियों ने बिक्रम सिंह मजीठिया की कंपनियों को टाइम-टू-टाइम करीब दस करोड़ रुपए दिए। लेकिन उसमें कारण साफ नहीं हो रहा है कि पैसे किस चीज के लिए दिए गए हैं। पहले विजिलेंस ने आरोपी को बतौर गवाह बुलाया था। लेकिन जब आरोपी ने पूछताछ में कोई सहयोग नहीं किया तो पड़ताल की गई। इसमें सामने आया कि इनके पास जवाब ही नहीं है कि करोड़ों रुपए मजीठिया को किस चीज के लिए दिए हैं। जो करोड़ों रुपए दिए गए थे, वे आगे दूसरी फर्मों में चले गए। प्रॉपर्टी खरीदी गई, लोन उतारे गए। विजिलेंस की तरफ से दिए गए यह तर्क गजपत संबंधी मामले में विजिलेंस की तरफ से याचिका में कहा गया है कि उनकी तरफ से आरोपी के विभिन्न पतों पर नोटिस भेजे थे। इसमें उसका संगरूर स्थित घर का पता, बसंत विहार दिल्ली और डिफेंस कॉलोनी दिल्ली शामिल है। कुछ दिन पहले विजिलेंस ने उस पर केस में नामजद किया था। साथ ही केस में आपराधिक साजिश रचने की धारा लगाई थी। साथ ही तय किया था कि उससे पूछताछ की जाएगी। इसके लिए आरोपी को समन जारी कर तलब भी किया था, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी को अब दोबारा तलब किया गया है। 10 दिसंबर को आरोप तय करने की तैयारी इस मामले में पंजाब सरकार ने गत महीने हुई कैबिनेट मीटिंग में केस चलाने की मंजूरी दी है। हालांकि अभी तक इस मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं। माना जा रहा है कि 10 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में आरोप तय हो सकते हैं। इस दौरान मजीठिया के वकीलों की तरफ से विजिलेंस द्वारा पेश किए गए चालान पर बहस की जाएगी। दूसरी तरफ मजीठिया पर दर्ज केस की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। अदालत कभी भी फैसला सुना सकती है।