बिहार के CM फेस पर 1000 करोड़ का सट्टा बाजार:सम्राट चौधरी के नाम पर सबसे बड़ा दांव; महिला फेस पर 1 के डेढ़ लाख लग रहे

बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बदलने जा रही है। वो राज्यसभा सांसद हो गए हैं, 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण कर सकते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि नया सीएम कौन होगा? इसपर जमकर सट्‌टेबाजी हो रही है। करोड़ों रुपए के दांव लग रहे हैं। मुंबई, पुणे और दिल्ली में बैठकर बड़े सटोरिए बिहार के 10 चेहरों पर दांव खेल रहे हैं। चूंकि स्टेट सीएम का मामला है, इसलिए कुछ संचालक बिहार से लिंक तैयार कर रह हैं और यहीं से दांव लगवा रहे हैं। सट्टा बाजार के अनुसार बिहार के किन 10 नेताओं पर बोली लग रही है, किसपर कितने का दांव चल रहा है। पढ़िए रिपोर्ट…। सम्राट चौधरी के नाम पर लग रहा सबसे ज्यादा सट्टा सट्‌टे की दुनिया के जानकारों ने बताया कि सीएम पद की रेस में टॉप 10 नेताओं को रखा गया है। भाव की बात करें तो पिछले 15 दिनों से सम्राट चौधरी के नाम पर 60-68 का रेट चल रहा था। सटोरियों के पास सबसे ज्यादा दांव लगाने वाले सम्राट चौधरी पर गेम खेल रहे थे। लेकिन पिछले पांच दिनों से सम्राट के नाम पर रेट कुछ कमजोर हुआ है। अब यह भाव अपने पीक से उतरकर 52-54 पर आ टिका है। 60 के रेट का मतलब है कि सम्राट चौधरी पर 1 लाख रुपए का सट्‌टा लगाने पर 1.6 लाख रुपए मिलेंगे। सम्राट चौधरी की जगह किसी और को सीएम बना दिया गया तो 1 लाख रुपए डूब जाएंगे। दूसरे नंबर पर महिला नेता का चेहरा सबसे आगे दूसरे नंबर पर महिला नेता है। सट्टेबाजों को उम्मीद है कि इस बार बिहार को महिला सीएम मिलेगी। महिला सीएम पर दांव लगाने पर 50% का फायदा होगा। यानि एक लाख रुपए लगाने पर 1.50 लाख रुपए मिलेंगे। पुरुष नेता सीएम बना तो पैसे डूब जाएंगे। महिला सीएम के लिए सबसे ज्यादा दांव श्रेयसी सिंह पर लग रहा है, सट्टे का भाव 40 से 42 है। प्रेम कुमार और नित्यानंद राय के नाम पर भाव 44 से 46 चल रहा है। जातीय समीकरण से भविष्य की राजनीति तक, टॉप 10 नेताओं के पक्ष में क्या? 1- सम्राट चौधरी: अभी बिहार सरकार में नंबर 2 की हैसियत है। डिप्टी सीएम हैं। नीतीश के चहेते बताए जा रहे। कुशवाहा समाज से आते हैं। बीजेपी इन्हें आगे कर नीतीश के कुर्मी-कुशवाहा वोट बैंक को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकती है। 2- संजीव चौरसिया: EBC समाज से आने वाले संजीव चौरसिया का नाम भी सीएम पद की रेस में है। बिहार में EBC की आबादी तकरीबन 36% है। चौरसिया का बैकग्राउंड काफी मजबूत है। इनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया को बिहार BJP का फाउंडिंग मेंबर माना जाता है। वह राज्यपाल रह चुके हैं। 3- मंगल पांडेय: ब्राह्मण जाति से आने वाले मंगल पांडेय बिहार सरकार में लंबे वक्त से मंत्री हैं। अभी भाजपा के बंगाल प्रभारी हैं। इनके पास सत्ता और संगठन दोनों का लंबा अनुभव है। पार्टी नेतृत्व के विश्वासपात्र हैं। 4- नित्यानंद राय: यादव समाज से आने वाले नित्यानंद भाजपा नेतृत्व के करीबी हैं। केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में काम करने का लंबा अनुभव है। सट्टेबाजों को उम्मीद है कि भाजपा इन्हें आगे कर राजद के यादव वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश कर सकती है। 5- प्रेम कुमार: जमीन से जुड़े नेता की छवि वाले प्रेम कुमार अभी विधानसभा अध्यक्ष हैं। पिछले दिनों RSS मुख्यालय नागपुर गए थे। EBC समाज के बड़े नेता हैं। 6- विजय सिन्हा: मौजूदा सरकार में डिप्टी सीएम विजय सिन्हा पर संघ का भरोसा है। संघ के रास्ते बीजेपी की राजनीति में एंट्री की। भूमिहार जाति से हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। 7- धर्मशीला गुप्ता: सटोरियों को बिहार में किसी महिला को मुख्यमंत्री बनाए जाने की उम्मीद है। ऐसे में EBC वर्ग से आने वाली धर्मशीला गुप्ता का नाम भी सीएम पद की रेस में है। 8- प्रमोद चंद्रवंशी: EBC वर्ग से आने वाले प्रमोद चंद्रवंशी की छवि जमीन से जुड़े नेता की है। भाजपा सीएम के चुनाव में चौंकाती आई है। इसलिए सटोरियों की नजर में प्रमोद भी रेस में हैं। 9- श्रेयसी सिंह: अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज रही श्रेयसी सिंह महिला सीएम बनाए जाने की स्थिति में प्रबल दावेदार मानी जा रहीं हैं। राजपूत जाति से आती हैं। इनके पिता दिग्विजय सिंह बड़े नेता थे। 10- रामेश्वर चौरसिया: EBC वर्ग से आने वाले रामेश्वर चौरसिया भी सटोरियों के अनुसार सीएम पद की रेस में हैं। सट्टा बाजार कैसे काम करता है? भारत में सट्टेबाजी बैन है। इसके बाद भी चोरी-छिपे यह खेल चल रहा है। अंडरवर्ल्ड पर एक दर्जन से ज्यादा किताबें लिख चुके मुंबई के सीनियर जर्नलिस्ट विवेक अग्रवाल ने बताया, ‘सिर्फ मुंबई के सट्टा बाजार से 4 हजार से ज्यादा सट्टेबाज जुड़े हैं। ये बहुत ही सिस्टेमैटिक तरीके से काम करते हैं। करीब 40 बड़े सट्टेबाज हैं, जो 1 हजार करोड़ से ऊपर का खेल चलाते हैं। ये सट्टेबाजी के पूरे कारोबार को कंट्रोल करते हैं। इनके लोग पूरे देश में फैले हैं।’ ऑनलाइन से डार्क वेब तक: ऐसे चलता है सट्टेबाजी का नेटवर्क पहले सट्टेबाजी मुख्य रूप से फोन कॉल्स या व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए होती थी, लेकिन अब यह हाई-टेक हो गया है। पारंपरिक तरीके: फोन कर दांव लगाना, नकद में लेन-देन और हवाला के जरिए पैसे का ट्रांसफर आज भी जारी है। टेलीग्राम और वॉट्सऐप: सैकड़ों टेलीग्राम ग्रुप्स (“Bihar Election Satta Live” जैसे नामों से) पर लाइव भाव दिए जाते हैं। भुगतान के लिए UPI, क्रिप्टोकरेंसी और वॉलेट्स का इस्तेमाल होता है। डार्क वेब और ऐप्स: Fairplay, JannatBook.com जैसी कई वेब-साइटें, जो फिलीपींस या यूएसए जैसे विदेशी सर्वरों पर होस्ट होती हैं, क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट लेती हैं। Bet365 जैसे अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर भी दांव लगाए जाते हैं। सट्‌टे में लगाई और खाई हैं अहम बिंदू लगाई (दांव लगाना): यानि फेरवेट पर जीत का दांव लगाना। खाई (दांव खाना): यानि सट्‌टेबाजी में कमजोर दिख रही टीम पर दांव खाना। क्रिकेट में यह होता है कि इंडिया फेवरेट है तो उसका भाव 28 माना जाएगा यानी जीत पर एक लाख पर महज 28 हजार रुपए ज्यादा मिलेंगे। जबकि पाकिस्तान कमजोर है तो उस पर 30 हजार लगाने पर 1 लाख रुपए मिलेंगे। सीएम के पद पर सट्‌टेबाजी के रूप अलग हो गए। इसमें अक्षरों का कोड जैसे ABC या फिर नंबरों पर 123 रख दिया गया है। यह अ – ब – स भी हो सकता है।

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