बिहार पंचायत चुनाव 2026, 2011 जनगणना के आधार पर आरक्षण:पंचायतों का होगा डिजिटल पुनरीक्षण, 13 अप्रैल से अधिकारियों का प्रशिक्षण; आपत्ति का मिलेगा मौका

बिहार में पंचायत चुनाव 2026 की सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पत्र के जरिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। आयोग ने तय किया है कि इस बार आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही होगा, लेकिन इसके लिए एक नया ‘प्रपत्र-1’ (Form-1) प्रकाशित किया जाएगा। क्यों पड़ रही है नए सिरे से तैयारी की जरूरत? पिछले कुछ सालों में बिहार के कई ग्रामीण इलाकों को नगर निकायों (नगर निगम या नगर परिषद) में शामिल कर लिया गया है। इससे कई पंचायतों की सीमाएं और जनसंख्या बदल गई हैं। इसीलिए आयोग ने आदेश दिया है कि डिजिटल माध्यम से नए सिरे से जनसंख्या और क्षेत्रों का मिलान कर प्रपत्र-1 तैयार किया जाए। पदों का बंटवारा और डिजिटल तैयारी चुनाव के सभी पदों को (जैसे- मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति और जिला परिषद), दो हिस्सों में बांटा गया है- मुखिया, पंचायत समिति और जिला परिषद के पदों के लिए जनसंख्या के आंकड़े वार्डों के डेटा से अपने आप (Automatic) सिस्टम में दर्ज हो जाएंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रपत्र-1 के प्रकाशन के लिए समय-सारणी इस प्रकार है- आम जनता के लिए क्या है खास? अगर आपको लगता है कि आपकी पंचायत या वार्ड की जनसंख्या के आंकड़ों में कोई गड़बड़ी है, तो आप 27 अप्रैल से 11 मई के बीच अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। यह लिस्ट पंचायत कार्यालय, प्रखंड (ब्लॉक) कार्यालय, अनुमंडल और जिला पदाधिकारी के कार्यालयों में चिपकाई जाएगी। इसके अलावा इसे सोशल मीडिया और आयोग की वेबसाइट पर भी डाला जाएगा। गांव के लोगों को जानकारी देने के लिए हाट-बाजारों में डुगडुगी भी बजाई जाएगी और लाउडस्पीकर वाले वाहनों से प्रचार किया जाएगा। निगरानी के लिए बनाए गए नोडल अफसर इस पूरे काम की निगरानी के लिए जिला स्तर पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी को नोडल अफसर बनाया गया है। वहीं, राज्य स्तर पर संयुक्त निर्वाचन आयुक्त शंभु कुमार को जिम्मेदारी दी गई है कि वे हर दिन की रिपोर्ट लें और किसी भी तकनीकी दिक्कत को दूर करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *