बिहार में अखिलेश यादव का फॉर्मूला अपनाएंगे तेजस्वी:जीत की गारंटी तय कर खुद जाएंगे दिल्ली, लालू का ग्रीन सिग्नल; जानिए RJD की बड़ी प्लानिंग

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक रविवार देर शाम हुई। इसमें फैसला लिया गया है कि लालू यादव और तेजस्वी तय करेंगे कि राज्यसभा में उम्मीदवार कौन होगा। हालांकि, बैठक में यह तय हो गया कि RJD राज्यसभा में अपना प्रत्याशी उतारेगी। यह भी तय हुआ कि हाल के दिनों में जो भी चुनाव, चाहे राज्यसभा के हों, विधान परिषद के हों, बंगाल के हों या फिर किसी अन्य राज्य के, इन सभी के लिए प्रत्याशी का चयन लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव करेंगे। इससे जुड़ा प्रस्ताव वरिष्ठ नेता भोला यादव लाए और तमाम नेताओं ने इसका समर्थन किया। इसके बाद तेजस्वी यादव ने कहा, ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष ही यह फैसला करेंगे। उनका फैसला सभी को मान्य होगा।’ भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, राज्यसभा चुनाव को लेकर RJD के अंदरखाने की तैयारी…।
पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, RJD की तरफ से तेजस्वी यादव राज्यसभा के कैंडिडेट हो सकते हैं। इस संबंध में तेजस्वी यादव ने लालू यादव से बीते सप्ताह मुलाकात की थी। चर्चा हुई थी। उसी मुलाकात के बाद 1 मार्च को पार्लियामेंट्री कमेटी की बैठक बुलाई गई थी। पूर्व केन्द्रीय मंत्री मो. अली अशरफ फातमी कहते हैं कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव तय करेंगे कि कौन राज्यसभा का उम्मीदवार होगा और तेजस्वी यादव राज्य सभा जा सकते या नहीं। UP के अखिलेश वाले फॉर्मूले पर चलेंगे तेजस्वी सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी को राज्यसभा भेजने के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश सिंह यादव का फॉर्मूला आरजेडी अपना सकती है। ताकि तेजस्वी प्रदेश के साथ-साथ केन्द्र की भी राजनीति करें। अखिलेश यादव लोकसभा के सदस्य हैं और विधानसभा में उन्होंने ब्राह्मण समाज से आने वाले माता प्रसाद पांडेय को अपना नेता बनाया है। बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव जब दिल्ली जाएंगे तो विधानसभा में पार्टी की कमान यादव समाज के नेता को ना देकर, किसी दलित या फॉरवर्ड को सौंप सकते हैं। इससे उनके ए टू जेड का समीकरण सधेगा। हालांकि, तेजस्वी यादव राज्यसभा का कैंडिडेट तब ही होंगे, जब उनके जीतने की 100% गारंटी हो। मायावती की बसपा और ओवैसी के विधायकों का समर्थन कंफर्म हो जाए। 5% भी सीट हारने की गुंजाइश होगी तो तेजस्वी यादव राज्यसभा की उम्मीदवारी से अपने को अलग कर लेंगे और दूसरे सर्वगुण संपन्न नेता को उतार देंगे। 3 पॉइंट में तेजस्वी यादव राज्यसभा क्यों जाना चाहेंगे? 1. बिहार में करने को कुछ नहीं, 5 साल बाद चुनाव बिहार विधानसभा चुनाव 2026 में RJD किसी तरह से नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी बचा पाई है। पार्टी को 243 विधानसभा सीटों में सिर्फ 25 सीटें ही हासिल हुई हैं। महागठबंधन भी 35 सीटों पर ही सिमट गई। विधानसभा में भी विपक्ष की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है कि सरकार को घेर सके। तेजस्वी यादव की पार्टी विधानसभा चुनाव के बाद संख्या बल में कमजोर है। इसलिए पार्टी पर तनाव है। अब बिहार में अगले 5 साल तक कोई बड़ा चुनाव भी नहीं है। अगला विधानसभा चुनाव 2030 में होना है। ऐसे में फिलहाल बिहार में विपक्ष के पास करने को कुछ खास बचा नहीं है। इस वजह से तेजस्वी यादव को राज्यसभा भेजा जा सकता है। 2. लालू यादव के बाद राजद को दिल्ली में चाहिए बड़ा चेहरा पिछले कई वर्षों से संसद में राजद को लालू यादव के बाद कोई बड़ा चेहरा नहीं मिला है, जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का चेहरा हो। राजद को दिल्ली में अभी एक बड़ा नेता चाहिए, जो मजबूती के साथ संसद में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर सके। ऐसे में लालू प्रसाद के बाद केन्द्र की राजनीति में आरजेडी एक चेहरा को लाना चाहती है। तेजस्वी, लालू के उत्तराधिकारी हैं। ऐसे में वे यदि दिल्ली में रहेंगे तो उनकी बात पूरे देश में जाएगी। 3. ओवैसी के गणित को साधने की कोशिश AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान विधानसभा चुनाव में तेजस्वी से गुहार लगाते रहे कि उनकी पार्टी को महागठबंधन में शामिल कर लिया जाए, लेकिन तेजस्वी ने उनकी एक न सुनी थी। इसके बाद ओबैसी ने तो सीमांचल में तेजस्वी के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया था। विधानसभा चुनाव में AIMIM ने राजद को सीमांचल की क्षेत्रिय राजनीति में बड़ा नुकसान पहुंचाया। AIMIM ने यहां राजद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर जीत हासिल की, जो राजद के लिए बड़ा झटका था। आरजेडी की एक बड़ी रणनीति यह है कि AIMIM इस पर तैयार हो जाए कि महागठबंधन के उम्मीदवार को समर्थन दे। यह दबाव बनाने के लिए तेजस्वी यादव का नाम आगे किया जा सकता है। ओवैसी की ताकत से तेजस्वी को मिल सकती है 1 सीट RJD एक सीट जीत सकती है, लेकिन उसके लिए पूरे महागठबंधन को एकजुट होना होगा। साथ में असदुद्दीन ओवैसी की मदद लेनी होगी। इसे ऐसे समझिए… महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। अगर सब एकजुट हुए तो एक सीट मिल सकती है। ओवैसी की पार्टी किंगमेकर है, वह जिसे भी समर्थन करेगी, उसकी जीत पक्की है। NDA अगर ओवैसी की पार्टी का समर्थन या विपक्ष के दूसरे दल को तोड़ लेती है, तो 5वीं सीट भी जीत लेगा। RJD नहीं जीती तो 2030 में राज्यसभा में 0 हो जाएगी RJD यदि 5वीं सीट नहीं जीत पाएगी तो अगले विधानसभा चुनाव यानी 2030 में उसका राज्यसभा में कोई सांसद नहीं होगा। अभी RJD के राज्यसभा में 4 सांसद हैं। प्रेम गुप्ता और ऐडी सिंह का कार्यकाल इस साल खत्म हो जाएगा। संजय यादव और मनोज झा का कार्यकाल 2030 विधानसभा चुनाव से पहले खत्म हो जाएगा। प्रेम गुप्ता के लिए हेमंत का दरवाजा खटखटाया RJD के दो सांसद प्रेमचंद गुप्ता और अमरेन्द्र धारी सिंह का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। दोनों पार्टी के लिए खास हैं, लेकिन प्रेमचंद गुप्ता पुराने खासमखास हैं। सूत्रों के मुताबिक, RJD चाहती है कि झारखंड से प्रेमचंद गुप्ता को राज्यसभा भेजा जाए, लेकिन विधानसभा चुनाव के समय JMM के साथ आरजेडी के संबंध में आई खटास खत्म नहीं हो पा रही है। तेजस्वी यादव ने इसके लिए कुमार सर्वजीत को लगाया था, लेकिन हेमंत सोरेन अब तक नहीं माने हैं। हालांकि, RJD का प्रयास जारी है। बता दें, शिबू सोरेन का निधन होने से 4 अगस्त 2025 से एक सीट खाली है। वैसे उसका कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है। दूसरी खाली हो रही सीट भाजपा के दीपक प्रकाश की है।

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