बिहार में एजुकेशन सिस्टम मॉडर्न होगा, एआई और रोबोटिक मॉडल से होगी पढ़ाई

पटना बिहार के सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम के आधार पर पढ़ाई होगी। इस दौरान स्कूलों और विश्वविद्यालयों में एआई और रोबोटिक मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। स्कूल और विश्वविद्यालयों में लिखित और प्रयोगिक दोनों तरह से पढ़ाई होगी। क्लास में टीचर किसी भी विषय को पढ़ाने के साथ ही मॉडल और प्रोयोगिक करके दिखाएंगे। इससे छात्रों को विषय अधिक समय तक याद रहेगा। इसके साथ ही विषय को कक्षा 1 से पीजी तक क्लासिफाइड किया जाएगा। व्यर्थ के चीजों को पढ़ाने से टीचर परहेज करेंगे। ऐसे विषय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसकी उपयोगिता भविष्य में भी हो। इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर संगीत, नृत्य, खेल सहित अन्य रचनात्मक कलाओं की जानकारी दी जाएगी। इससे छात्र पढ़ाई के साथ ही अन्य कौशल का विकास कर सकेंगे। स्कूलों में नंबर की जगह ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम का लक्ष्य 5 वर्ष निर्धारित किया गया है। इस दौरान स्कूलों में होने वाले सुधार का सर्वे होगा, उसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम में स्मार्ट क्लास, वर्चुअल रियलिटी, ऑनलाइन और ऑफलाइन का मिश्रण, कोडिंग, डेटा साइंस, सॉफ्ट स्किल्स, प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल का इस्तेमाल किया जाएगा। बिहार के स्कूल, कॉलेजों में पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इससे छात्रों को नई जानकारी मिलने के साथ ही वह हर दिन अपडेट रहेंगे। इसके लिए प्रोजेक्टर, एआई, स्मार्ट क्लास सहित अन्य तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सुनील कुमार, शिक्षा मंत्री बिहार के सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर छात्रों को 5 कैटेगरी में बांटा जाएगा। इसमें 81 से 100% तक अंक पाने वालों को A ग्रेड दिया जाएगाा। इसके साथ ही अति उत्कृष्ट श्रेणी में रखा जाएगा। 61 से 80% अंक पाने वालों को B ग्रेड दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें उत्कृष्ट श्रेणी में रखा जाएगा। 41 से 60% अंक पाने वालों को C ग्रेड और औसत श्रेणी में रखा जाएगा। उसे विशेष ध्यान की जरूरत है। 33 से 40% अंक पाने वालों को D ग्रेड औसत से कम श्रेणी में रखा जाएगा उन्हें कड़ी मेहनत करने को कहा जाएगा। 0 से 32% अंक पाने वाले छात्रों को E ग्रेड दिया जाएगा। उन्हें मिशन मोड में पढ़ाई कराई जाएगी। ग्रेड C, D और E वाले छात्रों को स्कूलों में विशेष कक्षाएं चलाई जाएगी। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद ने इसकी पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है। फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी लैब बनेगा : बिहार के सरकारी स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से मॉडर्न बनाया जा रहा है। पहले चरण में 789 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है। इसमें स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, लाइब्रेरी और इंटीग्रेटेड साइंस लैब बनाया जा रहा है। इसके लिए कुल 1485 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही 5277 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी लैब, 8 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए इंटीग्रेटेड साइंस लैब, फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी लैब बनाया जा रहा है। स्कूलों में 1.61 टैबलेट दिया गया है। संगीत कला शिक्षा के लिए 44.83 करोड़ रुपए स्वीकृत किया गया है। नोट्स तैयार होगा : मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम के तहत प्राइमरी क्लास से नीट, कैट और नौकरी की तैयारी करायी जाएगी। प्रत्येक क्लास में महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिन्हित करके उसका अलग से नोट्स तैयार होगा। महत्वपूर्ण बिंदुओं को अंडरलाइन किया जाएगा। इससे लंबे समय तक पाठ याद होने में आसानी हो।

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