अब राष्ट्रगान ‘जन-गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाना होगा। केंद्र सरकार ने इसे लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। सरकार के इस आदेश के बाद सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों या अन्य औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ बजाया जाएगा। इस दौरान हर व्यक्ति का खड़ा होना अनिवार्य होगा। केंद्र के इस फैसले के बाद बिहार में विपक्ष के नेता विरोध जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में पहले राष्ट्रगान ही होना चाहिए। अगर बीजेपी ऐसा कोई फैसला लेती है तो वो अनुचित है। विपक्ष ने यहां तक कह दिया कि जो लोग इस तरह के आदेश दे रहे हैं वे अंग्रेजों के दलाल हैं। पहले जानिए वंदे मातरम् को लेकर केंद्र का नया प्रोटोकॉल क्या है… अब जानिए केंद्र के आदेश पर बिहार के नेताओं ने क्या कहा- राजद विधायक सुरेंद्र राम ने कहा, “हम राष्ट्रगीत को भी मानते हैं और राष्ट्रगान को भी मानते हैं। बस अंग्रेजों के दलालों को नहीं मानते हैं। हम लोग मानते हैं कि राष्ट्रगान सबसे पहले बजता है और हम खड़े होते हैं। यह केंद्र सरकार जाने कि उनकी निर्णय लेने की नीति क्या है।” AIMIM विधायक गुलाम सरवर ने कहा, “सरकार मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने और लोगों को गुमराह करने के लिए इस तरह के फैसले ले रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा। सरवर ने आरोप लगाया कि केवल लोगों को ध्रुवीकरण करने की कोशिश की जा रही है और पार्टी इसका विरोध करेगी।” AIMIM विधायक सरवर आलम ने कहा सरकार मुद्दों से भटकाने के लिए यह फैसला लाई है। उनके मुताबिक यह केवल चुनावी मुद्दा है। बिहार चुनाव के दौरान ‘बांटोगे तो काटोगे’ का नारा दिया गया था, अब वह नारा कहां गया? सरकार को हर चुनाव से पहले एक नया मुद्दा चाहिए। सरवर आलम ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री तलवार निकालते हैं, लेकिन उस पर कोई चर्चा नहीं होती। NDA के नेता बोले- सरकार का अच्छा कदम वहीं, NDA के नेता सरकार के फैसले का अच्छा फैसला बता रहे हैं। BJP विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा, वंदे मातरम राष्ट्र की आत्मा की पुकार है। AIMIM वालों का ममता दीदी के साथ कुछ रहता है। उनके बोलने और विरोध करने से क्या होगा। LJP-R के विधायक ने वंदे मातरम के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, ‘ये एक अच्छा कदम है। इससे राष्ट्रवाद प्रबल होता है।’ HAM (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने कहा, “जिन्हें ‘वंदे मातरम्’ का विरोध करना है, उनके लिए पहले ही देश दो हिस्सों में बंट चुका है। जिसे विरोध करना है, वह करे। यह सरकार का अच्छा फैसला है और यह कदम बहुत पहले उठाया जाना चाहिए था।” स्कूलों की शुरुआत वंदे मातरम् से होगी न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, आदेश में साफ लिखा है कि अगर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ साथ में गाए या बजाए जाएं, तो पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। इस दौरान गाने या सुनने वालों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा। आदेश के मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत बजाने के बाद ही होगी। नए नियमों के अनुसार, राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकेंड है। अब तक मूल गीत के पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है किन-किन मौकों पर राष्ट्रगीत गाया जा सकता है, इसकी पूरी लिस्ट देना संभव नहीं है। यह पहली बार है जब राष्ट्रगीत के गायन को लेकर डिटेल में प्रोटोकॉल जारी किए गए हैं। केंद्र इस समय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम मना रहा है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान हुआ था विवाद केंद्र सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विशेष चर्चा का आयोजन किया था। लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर राष्ट्रगीत को मुद्दा बना रही है। वहीं भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के हिस्से काटने का आरोप लगाया था। भाजपा ने 1937 में देश के पहले PM जवाहरलाल नेहरू की एक चिट्ठी शेयर की थी, जो उन्होंने सुभाष चंद्र बोस को लिखी थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि चिट्ठी में नेहरू ने संकेत दिया था कि वंदे मातरम की कुछ लाइनें मुसलमानों को असहज कर सकती हैं। संसद में बहस के दौरान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि राष्ट्रगीत को भी राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज के समान दर्जा दिया जाना चाहिए।