‘मैं PMCH में अपने बिस्तर पर लेटी थी, एक महिला मुझे नशीली चाय पिलाकर मेरे बेटे को चुरा ले गई…मैं 9 घंटे तक पागलों की तरह भटकती रही, जैसे–तैसे बेटा मिला अब मैं उसे कभी अपने से दूर नहीं करती।’ – सोनाली ‘मेरी बच्ची 15 महीने से लापता है, मेरे दरवाजे से बच्चा चोर उसे उठा ले गए, पुलिस के पास जाती हूं तो वो कहती है, जाओ खुद ढूंढ लो। मेरी फूल सी बच्ची के साथ वो चोर, दरिंदे क्या कर रहे होंगे, ये सोचकर ही रूह कांप जाती है…” – रूखसाना खातुन ये 2 बयान उन मांओं के हैं जिसका बेटा चोरी होने के 30 मिनट बाद मिला और जिसकी बेटी अभी तक मिली ही नहीं है। बिहार में बच्चा चोरी एक बड़ा मसला बनता जा रहा है। पिछले 15 दिन में 20 से ज्यादा वारदात सामने आ चुकी हैं। पुलिस इन्हें अफवाह भी बता रही है, लेकिन लोगों को अलर्ट रहने को कहा गया है। हालांकि बिहार में पिछले एक साल में करीब 7 हजार बच्चे लापता हैं। बिहार में अचानक बच्चा चोरी के मामले कैसे बढ़ने लगे हैं…? महिलाओं में किस तरह का डर बैठ गया है? पिछले साल कितने बच्चे चोरी हुए जो आज तक नहीं मिले और क्यों पुलिस इसे अफवाह बता रही है…? पढ़िए संडे स्पेशल रिपोर्ट में… सबसे पहले जानिए बिहार में कहां–कहां ऐसी घटनाएं हुईं पिछले 15 दिनों में बिहार में लगातार बच्चा चोरी की बातें तेजी से फैली रही हैं। पटना, भागलपुर, वैशाली, मोतिहारी, बगहा और समस्तीपुर समेत 12 जिलों में इस तरह के केस सामने आ चुके हैं। इनमें या तो बच्चा चोरी करते लोग पकड़े गए या चोरी की अफवाह में बड़ी मारपीट की घटना हुई। पटना में तो पीएमसीएच से ही एक महिला बच्चा चोरी कर भाग गई। बाद में उसे पकड़ा गया और पिटाई भी हुई है। पूरे बिहार में बढ़ रही इस तरह की घटनाओं को देखते हुए बिहार पुलिस को अलर्ट जारी करना पड़ा। पुलिस ने परिजनों को बच्चों पर खास नजर रखने को कहा है, साथ अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। भास्कर ने जब इन आंकड़ों को खंगाला तो बड़े चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले साल में 14 हजार 699 बच्चे लापता हुए हैं। इनमें से 6 हजार 927 बच्चे अब तक ट्रेसलेस हैं। इनका कुछ भी पता नहीं चला है। पढ़िए उस मां की कहानी, जिसका बेटा जन्म के अगले दिन चोरी हुआ पटना के परसा बाजार थाना क्षेत्र के न्यू नत्थूपुर में रहने वाली सोनाली आज भी उस दिन को यादकर कांप उठती हैं, कहती हैं ऐसा लगा था जैसे किसी ने मेरी जान ही निकाल ली। सोनाली पीएमसीएच में हुई उस वारदात को यादकर कहती हैं, ‘9 घंटे बाद मुझे होश आया था। मेरे साथ जो हुआ वो किसी मां के साथ न हो। कोई बच्चा अपनी मां से न बिछड़े। हम यही चाहते हैं कि उस बच्चा चोर को कोर्ट से जमानत तक न मिले और उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले। मैंने उस दिन इतने दर्दनाक पहलू को जिया है, जिसकी कल्पना से ही मैं सहम जाती हूं। 23 फरवरी के उस खौफनाक दिन को शायद मैं कभी भूल नहीं पाऊंगी।’ कैसे बच्चा चोर महिला ने घुलमिलकर बेटे को उठाया सोनाली बताती हैं, ‘ मेरी शादी 2022 में भोला पासवान से हुई थी। 22 फरवरी की रात बच्चे की डिलीवरी के लिए मुझे PMCH में एडमिट कराया गया। पति और मायके के लोग साथ थे। 23 फरवरी को मैंने एक बेटे को जन्म दिया। इसके बाद मुझे बच्चे के साथ जनरल वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया। वॉर्ड में शिफ्ट होने के बाद मैं अपने पति के साथ थी। मेरे माता-पिता किसी काम से गाय घाट चले गए थे। उसी बीच एक अनजान महिला सुबह के वक्त बेड के पास आई। मेरे पति से मोबाइल का चार्जर मांगने लगी। उन्होंने मुझे कहा कि बैग से निकाल कर दे दो। मैंने उस महिला से पूछा कि क्या आप यहां इलाज कराने आई हैं। वह बोली कि मेरी दीदी को बच्चा हुआ है। पिछले साल उसे दो जुड़वा बच्चे हुए था। इस बार भी उसे दो जुड़वा बच्चे हुए हैं। मैंने पूछा कि आपकी दीदी कहां है। उसने कहा, वो ICU में भर्ती है। मैंने पूछा कि बच्चा कहां है। उसने कहा, वो भी भर्ती है। उसने अपनी बातों में उलझा दिया था।’ दोस्ती कर मेरे पति को चाय लेने के लिए भेज दिया सोनाली कहती हैं ‘वह मेरे पास काफी देर तक बैठी रही। मैंने कहा कि आप अपनी मरीज के पास नहीं गईं। उसने जवाब दिया कि ICU में मेरा दम घुटता है। उसके सास-ससुर भी हैं तो अच्छा नहीं लगता है। इसके बाद वह बगल वाले बेड के मरीज से बात करने लगी। कुछ देर बात मेरे पति को 20 रुपए अपने पर्स से निकाल कर दिए और चाय ला देने के लिए कहा। उन्होंने लाकर दे दी। वह मुझे बार-बार सोने के लिए कह रही थी। करीब 3 घंटे तक वो मेरे पास बैठी रही।’ लड़की को छोड़ देंगे, लड़के को लेकर आएंगे सोनाली आगे बताती हैं, ‘वह महिला मेरे पास बैठकर अपने मोबाइल फोन में गेम खेलने लगी। इसके बाद किसी को कॉल कर अपने फोन पर 500 रुपए मंगवाए। कुछ देर बाद वह बाहर गई और काली चाय लेकर आई और मुझे पीने के लिए दी। मैंने उस पर भरोसा कर चाय पी ली। इसके बाद मुझे हल्की–हल्की नींद आने लगी। मैं बच्चे को लेकर सोने लगी। तभी उसके मोबाइल पर एक कॉल आया। बात करते हुए उस उसने कहा, ‘छोड़ी (लड़की) को छोड़ देंगे और छोड़ा (लड़का) को लेकर आएंगे।’ इतना सुनकर मैंने पूछा कि आपके बच्चे कहां हैं तो कहने लगी कि घर पर छोड़कर आई हूं। उस वक्त मेरे पति पास में नहीं थे। बात करते करते मुझे गहरी नींद आ गई तो उसने बगल के बेड वाली मरीज से कहा कि वह मेरी चचेरी बहन है। इसके बाद बच्चे को बाहर घुमाने के बहाने उठाई और वार्ड के बाहर भाग गई।’ अब जानिए कैसे मिला सोनाली का बच्चा सोनाली की मां का नाम पूनम देवी है। जब वो महिला वार्ड से सोनाली के बच्चे को लेकर बाहर भागी तभी पूनम अपने पति के साथ गाय घाट से वापस PMCH आ रही थी। वार्ड से मेन गेट की ओर जाने वाले रास्ते में उनकी नजर महिला के गोद में तौलिया से लपेटे बच्चे पर पड़ी। एक पल के लिए उन्हें लगा कि वो तौलिया तो उनका है। फिर भी वो बगैर रूके सीधे वार्ड में अपनी बेटी के पास पहुंची। उस वक्त सोनाली सो रही थी। उसे जगाकर पूछा कि बच्चा कहां है? सोनाली जवाब नहीं दे पाई। तब बगल के बेड की मरीज ने बताया कि बच्चे को इसकी चचेरी बहन लेकर बाहर घुमाने गई है। इस पर मां को शक हुआ। वह तुरंत बाहर मेन गेट की ओर भागी और रास्ते में बच्चे को लेकर भाग रही महिला को पकड़ लिया। बच्चे को बचाने के लिए नानी ने उस महिला के साथ हाथपाई भी की। इस बीच लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों के सामने महिला कहने लगी कि वो बच्चा उसका है और उसने जन्म दिया है। तभी पूनम ने कहा कि ये बच्चा चोर है। उसकी बेटी का बच्चा चोरी कर भाग रही है। यह सुनते ही वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उस महिला के हाथ से बच्चा छीना और उसे उसकी नानी को थमाया। इस दरम्यान करीब आधे घंटे का वक्त निकल चुका था। कैंपस में बच्चा चोर की बात फैली तो पुलिस मौके पर पहुंची और फिर उस महिला पकड़कर अपने साथ ले गई। अब वो कहानी, जो 15 महीने से अपनी बच्ची को तलाश रहे पटना के कमला नेहरू नगर की रहने वाली रूखसाना खातुन और इनके पति मो. अज्जू के लिए 8 नवंबर 2024 की तारीख ‘ब्लैक डे’ है। इस दिन को याद कर दोनों रोते हैं। इन्हें अपने तीन साल की बेटी रूखसार परवीण की याद हर पल सताती है। दोनों कहते हैं कि अपनी लाडली बेटी को देखे हुए 15 महीने बीत गए। रूखसाना ने बताया, ‘घर के बाहर खेल रही रूखसार को एक आदमी चोरी कर ले भागा था। तब से लेकर आज तक उसका कोई पता नहीं चला। कोतवाली थाना जाने पर पुलिस भी कहती है कि ‘तुम लोग खुद खोजो। पता नहीं मेरी तीन साल की बच्ची किस हालत में होगी, चोर उसके साथ क्या क्या कर रहा होगा। जिंदा भी है या नहीं ये सोचकर ही रूह कांप जाती है।’ बच्ची के पिता मो. अज्जू ने कहा, ‘मुझे तो लगता है कि मेरी बेटी को मानव तस्करों ने बेच दिया है। मैं ऑटो चलाता हूं। मेरी किसी से दुश्मनी नहीं थी। मेरी बेटी को किसी ने नहीं मारा होगा। वह जिंदा है। मैंने उसे खोजने की बहुत कोशिश की, लेकिन खोज नहीं पाया। मैं अपना दर्द किसे बताऊं। किसी तरह दिल पर पत्थर रखकर जी रहा हूं।’ CCTV से मिला था क्लू मो. अज्जू ने बताया, ‘मेरी चार बेटियां हैं। रूखसार तीसरे नंबर पर हुई थी। बेटी घर के बाहर से लापता हुई तो हम लोगों ने आसपास के इलाके का चप्पा-चप्पा खंगाल दिया। रात 10 बजे तक जब उसका कुछ पता नहीं चला तो उसी वक्त कोतवाली थाना गए। पुलिस को जानकारी दी। उसकी गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। फिर इलाके में लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगालने गया। तब क्लू मिला।’ उन्होंने बताया कि, ‘CCTV फुटेज में एक आदमी मेरी बेटी को ले जाते दिखा। उसकी पहचान मनोज दास के रूप में हुई। वह पटना के पोस्टल पार्क इलाके का रहने वाला है। जहानाबाद में उसने किराए पर एक घर ले रखा था। पुलिस ने उसे पकड़ा, लेकिन जिस सख्ती के साथ पूछताछ होनी चाहिए थी, जिस तरह कार्रवाई होनी चाहिए थी, नहीं हुई। उसने पकड़े जाने के बाद भी पुलिस को बरगला दिया। कभी कहता कि चमनियां नाम के व्यक्ति को बच्ची सौंप दिया है तो कभी कहता कि याद नहीं किसे दिया। पुलिस ने उसके साथ सख्ती नहीं दिखाई।’ अब तो हाईकोर्ट का ही सहारा है मो. अज्जू ने कहा, ‘मैं सिस्टम से हार गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी है। मैं अभी भी अपनी बेटी की तलाश कर रहा हूं। SDPO, CITY SP, SSP से लेकर सीएम तक से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। हारकर हाईकोर्ट में अपील दायर की। अब तो बस कोर्ट से ही उम्मीद है।’ ‘हमें उम्मीद है कि होली के बाद अपील पर सुनवाई होगी। वहां से जांच करने और रूखसार को बरामद करने के लिए निर्देश जारी हो सकता है।’ 2025 में गायब हुए 14699 बच्चे, पटना में सबसे ज्यादा पूरे बिहार में लापता बच्चों के मामले में पटना पहले पायदान पर है। बिहार पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 14699 बच्चों के मिसिंग कंप्लेन मिले। ये सभी 18 साल से नीचे के हैं। ये आंकड़ा राज्य के सभी 38 जिलों, 2 पुलिस और 4 रेल जिला को मिलाकर है। इनमें पहले पायदान पर पटना है। यहां से पिछले साल 1676 बच्चे गायब हुए। 1421 बच्चों को पुलिस ने बरामद किया, लेकिन 255 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। बच्चा चोरी होने पर भी, दर्ज होता है गुमशुदगी का मामला कोई बच्चा चोरी हो जाए। चोर उसे ले जाकर कहीं बेच दे, लेकिन पीड़ित जब शिकायत दर्ज कराने थाना जाते हैं तो पुलिस बच्चे की गुमशुदगी का ही मामला दर्ज करती है। बच्चा चोरी की कोई FIR नहीं होती है। 24 घंटे तक बच्चे की बरामदगी नहीं होने पर केस किडनैपिंग में बदल जाता है। मानव तस्करों के टारगेट पर लड़कियां अधिक बिहार पुलिस से मिले आंकड़े बताते हैं कि लड़कों के मुकाबले लड़कियां अधिक गायब हैं। बच्चा चोरी करने वाले गैंग और मानव तस्करों के गैंग सबसे अधिक लड़कियों को टारगेट करते हैं। 2025 में पूरे बिहार से 12526 लड़कियों के मिसिंग कंप्लेन पुलिस के पास आई। कुल मिलाकर पुलिस 6567 लड़कियों को ही बरामद कर पाई है। पटना, सारण, मुजफ्फरपुर, मोतिहारी और रोहतास से लड़कियां सबसे अधिक गायब हुई हैं। पटना से 1303, सारण जिले से 617 और मुजफ्फरपुर से 600 लड़कियां गायब हुईं। 2 लेयर पर कार्रवाई के नियम जिले के डीएसपी हेडक्वार्टर इसके इंचार्ज होते हैं। टीम में इनके साथ एक इंस्पेक्टर, दो सब इंस्पेक्टर (एक महिला) और कुछ कांस्टेबल होते हैं। 0 से लेकर 18 साल से कम उम्र के बच्चे जिनका 4 महीने तक कोई सुराग नहीं मिलता उन्हें बरामद करने की जिम्मेवारी इनकी होती है। इनकी जांच के लिए एक SOP बनी हुई है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लोगों से होता है कनेक्शन पुलिस सूत्रों के अनुसार बच्चों के मिसिंग के मामले में शुरुआत का 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सूचना मिलने के बाद अगर थाने की पुलिस तेजी से काम कर ले तो बच्चे को बरामद किया जा सकता है। वरना इससे अधिक समय बीतने पर खोजना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की चोरी के मामले में 0 से 10 साल के मासूम मानव तस्करी करने वाले गैंग के टारगेट होते हैं। ये चोरी करने से पहले ही डील तय कर लेते हैं। खासकर इनकी डील वैसे लोगों से होती है, जिन्हें बच्चे की चाह होती है। कीमत 4 से 10 लाख रुपए तक की होती है। 12 से 18 साल तक की लड़कियों के गायब होने के पीछे का कारण अलग होता है। शादी की नीयत से इन्हें बेचा जाता है। बिहार में एक्टिव मानव तस्करों के गैंग का कनेक्शन राजस्थान और मध्य प्रदेश के लोगों से होता है।