बिहार में 2014 के बाद राज्यसभा का चुनाव होने जा रहा है। चुनाव में तीन पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष मैदान में हैं। बिहार के CM नीतीश कुमार और BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की प्रतिष्ठा दांव पर है। BJP ने RLM के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपने कोटे से मैदान में उतारा है। उनकी जीत की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। इधर, विपक्ष की तरफ से बिहार के सबसे अमीर सांसद अमरेंद्र धारी सिंह मैदान में हैं। अपनी जीत के लिए इन्होंने गोटियां सेट करनी शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो भूमिहार जाति से आने वाले एडी सिंह NDA के भूमिहार विधायकों से संपर्क कर रहे हैं। चुनाव में AIMIM किंगमेकर की भूमिका में है। ओवैसी ने तेजस्वी के सामने शर्त रखी है कि राज्यसभा चुनाव में साथ चाहिए तो विधान परिषद की सीट देनी होगी। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, क्या BJP को NDA में सेंधमारी का डर सता रहा है? क्या RJD 2014 की तस्वीर एक बार फिर से दोहराने की तैयारी कर रहा है? AIMIM और BSP किसका खेल बना और बिगाड़ सकती है? सबसे पहले ये दो बयान पढ़िए NDA राज्यसभा की सभी पांचों सीटें जीत रही है, इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है। विपक्ष के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं।- उपेंद्र कुशवाहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, RLM बिहार की 5 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। NDA ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। NDA सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज करेगा।- संजय सरावगी, प्रदेश अध्यक्ष BJP क्या NDA में सेंधमारी के डर से अलर्ट हुई BJP? NDA के नेता कॉन्फिडेंस के साथ जीत का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन क्या यह इतना आसान है? जवाब है नहीं। NDA की एक्टिविटी बता रही है कि इनकी राह इतनी आसान नहीं है। भले पांचवीं सीट जीतने के लिए पार्टी को मात्र 3 विधायक जुटाने होंगे, लेकिन मामला केवल 3 विधायक जुटाने भर का नहीं है। NDA के नेताओं को गठबंधन दलों के भीतर ही सेंधमारी का डर सता रहा है। इसके कारण पार्टी ने दो बड़े बदलाव किए हैं। ऐसे में BJP ने बड़ा उलटफेर करते हुए चुनाव मैदान में अपने दलित कैंडिडेट शिवेश राम को उतार दिया है। यानि जिन 4 कैंडिडेट की जीत पक्की है, उस लिस्ट में उपेंद्र कुशवाहा को शामिल करा दिया ताकि शिवेश राम के नाम पर मांझी और चिराग एकजुट रहें। क्या राज्यसभा चुनाव में बिहार NDA में पहले भी सेंधमारी हुई है? 2026 से पहले बिहार में 2014 में राज्यसभा का चुनाव हुआ था। तब जदयू की तरफ से पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलियावी को कैंडिडेट बनाया गया था। जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री थे। चुनाव के दौरान जदयू के 18 से 20 विधायकों ने बगावत कर दी थी। बागी विधायकों ने जदयू के कैंडिडेट को वोट देने के बजाय निर्दलीय कैंडिडेट साबिर अली और अनिल शर्मा को वोट दे दिया था। हालांकि आखिरी समय में राजद के सपोर्ट से जदयू के कैंडिडेट जीतने में सफल रहे थे। इसके कारण बागियों की प्लानिंग फेल हो गई थी।
राजद कैंडिडेट को जीत दिलाने में जुटे कांग्रेस के भूमिहार सांसद जहां NDA की तरफ से अपने विधायकों को गोलबंद करने की कोशिश की जा रही है वहीं दूसरी तरफ राजद के कैंडिडेट एडी सिंह को जीत दिलाने की कमान कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद संभाल रहे हैं। इन्हें टिकट दिलाने में भी इसी नेता की सबसे बड़ी भूमिका रही है। सूत्रों की मानें तो भूमिहार जाति से आने वाले कांग्रेस सांसद NDA के भूमिहार विधायकों से संपर्क साध रहे हैं। अलग-अलग जगहों पर उनसे मीटिंग कर रहे हैं। इनकी कोशिश BJP और JDU के विधायकों की जगह NDA के छोटे दलों के विधायकों को साधने की है। भास्कर के पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि NDA के दो विधायक की मीटिंग इनके साथ दिल्ली में हुई है। एडी सिंह के पास अभी राजद के 25, कांग्रेस के 6 लेफ्ट के 3 और आईआईपी के 1 यानि कि 35 विधायकों का समर्थन है। उन्हें 6 विधायक और जुटाने हैं। किंग मेकर AIMIM की डिमांड- राज्यसभा के बदले विधान परिषद की सीट चाहिए राज्यसभा की पांचवीं सीट पर जीत-हार में AIMIM के 5 और BSP के एक विधायक निर्णायक साबित हो सकते हैं। भास्कर ने AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान से राज्यसभा चुनाव के मुद्दे पर बात की। उन्होंने बताया, ’अभी तक किसी गठबंधन के नेता ने हमसे संपर्क नहीं किया है। नॉमिनेशन से पहले तेजस्वी यादव से हमारी बात हुई थी। हमने उनके सामने अपनी दावेदारी पेश की थी। उन्होंने कहा था कि दिल्ली से लौटकर इस मामले पर बात करेंगे। अब बिना मेरी सलाह के उन्होंने नॉमिनेशन करा लिया है। अगर ये जीत के लिए सीरियस होते तो मुझसे जरूर बात करते।’ अख्तरुल इमान ने कहा, ’गिव एंड टेक का मामला होना चाहिए। आज अगर हम राज्यसभा में इनकी मदद कर रहे हैं तो हम चाहेंगे कि विधान परिषद में खाली हो रही एक सीट पर महागठबंधन हमें सपोर्ट करे। हमारा वोट लीजिएगा तो हमें भी सपोर्ट कीजिएगा न।’ वहीं, चुनाव के दौरान वाक आउट के सवाल पर उन्होंने कहा कि गैर की शादी अब्दुल्ला दीवाना क्यों? हम अपनी डिग्निटी से समझौता नहीं कर सकते।’ भीतरखाने चर्चा ये है कि अख्तरुल इमान अपनी पार्टी के प्रवक्ता और करीबी नेता आदिल के लिए विधान परिषद की डील चाहते हैं। अगर तेजस्वी इस बात के लिए राजी हो जाते हैं तो वे आसानी से राज्यसभा चुनाव में RJD कैंडिडेट को अपना समर्थन दे देंगे। हमने बिहार में बसपा के इकलौते विधायक सतीश कुमार सिंह यादव से बात की। उन्होंने कहा, ’अभी हमें अपनी पार्टी सुप्रीमो की तरफ से कोई निर्देश नहीं आया है। 9 मार्च को नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन है। उसके बाद ही इस पर विचार किया जाएगा।’ अब फॉर्मूले से समझिए कैसे औवैसी पूरा समीकरण बिगाड़ सकते हैं राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या के कैलकुलेशन के लिए चुनाव आयोग ड्रॉप कोटा फॉर्मूले को लागू करता है। अगर कुछ विधायक वोटिंग नहीं करते तो क्या होगा? राज्यसभा का एक सीट जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत तब है जब बिहार के सभी 243 विधायक वोट करें और किसी का वोट रद्द भी नहीं हो। अगर कुछ विधायक वोटिंग नहीं करते हैं या उनके वोट रद्द होते हैं तो जीत के लिए जरूरी 41 वोट का आंकड़ा बदल जाएगा। जितने कम विधायक वोट डालते हैं, जीत के लिए जरूरी वोटों की संख्या भी घट जाएगी। वोट रद्द होने पर भी ऐसा होगा। इसका सीधा फायदा NDA को मिलेगा। उदाहरण के लिए अगर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पांचों विधायक वोटिंग से दूर रहते हैं, तो NDA को पांचवीं सीट जीत के लिए बाहर के मात्र 2 विधायक का साथ चाहिए। इसे ऐसे समझिए… 243-5=238 कुल वैध वोट तब Q= 238/ (5+1)= 39.6 मतलब 40
38 विधायक NDA के पास पहले से ही हैं।