बुजुर्गों को समय, संवाद, अपनेपन की भी जरूरत

चंडीगढ़ के करतार आसरा आश्रम में शनिवार को ‘एक शाम वृद्धों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बुजुर्गों के लिए उनके दौर के मशहूर गीतों से सजी संगीतमय शाम रखी गई। इस दौरान निर्माता, निर्देशक, लेखक, अभिनेता और गायक डॉ. इंजीनियर राजेंद्र जैना ने कहा- गाना उनका शौक है, लेकिन इसके जरिए वे उन लोगों तक पहुंचना चाहते हैं जो जीवन की भीड़ में अकेले रह गए हैं। वृद्धाश्रम में रहने वाले लोगों को भोजन और कपड़ों के अलावा उन्हें जरूरत होती है उनके साथ कोई समय बिताएं, कहानियां सुने, उनके अनुभवों को समझे और उनका मनोरंजन करे। इसी सोच के साथ यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने अपनी नई फिल्म “बेदखल” का मुहूर्त भी किया। फिल्म का क्लैप करतार आसरा ट्रस्ट की फाउंडर एवं चेयरपर्सन माताजी चरण कमल कौर ने किया। इस दौरान राजेंद्र ने कई पुराने लोकप्रिय गीत प्रस्तुत िकए जैसे ‘ओ जानेमन दिलारा-एक नज़र इधर भी, किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार, शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब, प्यार बांटते चलो, दिल करता ओह यार दिलदारा मेरा दिल करता’। इनके अलावा कुछ बुजुर्गों ने भी गीत गाए और कई महिलाओं ने नृत्य किया। क्रिएटिव डायरेक्टर सुनील पाराशर ने कहा- समाज को ऐसे प्रयासों से नई दिशा मिलती है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन लोगों के माता-पिता नहीं हैं, वे ऐसे बुजुर्गों को अपनाकर परिवार का विस्तार कर सकते हैं। कार्यक्रम में मोनिका, बलजीत सिंह, शफीक उर्रहमान, गोपाल और मुमताज भी शामिल हुए।

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