अररिया में एक अदालत ने 10 साल की बेटी शिवानी कुमारी की हत्या के मामले में उसकी मां पूनम देवी (35) को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ रवि कुमार की अदालत ने इस अपराध को “माता शब्द को कलंकित करने वाला जघन्यतम अपराध” करार दिया। यह घटना 10 जुलाई 2023 को हुई थी। बेटी ने मां को प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा दोषी पूनम देवी नरपतगंज प्रखंड के रामघाट कोशिकापुर वार्ड नंबर-5 की रहने वाली है। उसके पति चंदन सिंह पंजाब में मजदूरी करते हैं। पूनम देवी का पड़ोस के रूपेश कुमार सिंह से अवैध संबंध था। 21 जून 2023 को बेटी शिवानी ने अपनी मां को प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। शिवानी ने अपनी मां को पिता को बताने की धमकी दी। इसी बात से क्रोधित होकर पूनम और रूपेश ने मिलकर बच्ची की हत्या की साजिश रची। मछली में जहर मिलाकर शिवानी को खिलाया 10 जुलाई की शाम पूनम ने हटिया से मछली और कीटनाशक दवा खरीदी। उसने मछली में जहर मिलाकर शिवानी को खिलाया। जब बच्ची बेहोश हो गई, तो पूनम ने सब्जी काटने वाले चाकू से उसके गले और पेट पर कई वार किए। पूनम ने शव को घर में रखे मक्के के ढेर में छिपाया हत्या के बाद, पूनम ने शव को घर में रखे मक्के के ढेर में छिपा दिया और अपहरण का नाटक किया। पुलिस ने जांच के दौरान मक्के के ढेर से शव, खून लगा चाकू और जहर की खाली शीशी बरामद की। यह मामला नरपतगंज थाना कांड संख्या 380/23 के तहत दर्ज किया गया था। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत पूनम देवी को मृत्यु तक फांसी पर लटकाने का आदेश दिया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दिया फैसला इसके अतिरिक्त, धारा 328 (जहर देकर जान लेने की कोशिश) में 7 साल का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना, तथा धारा 201 (साक्ष्य छिपाना) में 5 साल का सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये का जुर्माना भी सुनाया गया। जुर्माना न चुकाने पर 18 माह की अतिरिक्त कैद होगी। अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक प्रभा कुमारी ने सबसे कड़ी सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता किशोर कुमार दास ने न्यूनतम सजा की गुहार लगाई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।