“हमने प्लान के मुताबिक लड़की से जबरन फोन करवाकर लड़के को जंगल में बुलाया। फिर लड़के के सामने लड़की की हत्या की। इसके बाद लड़के से सुसाइड नोट लिखवाकर उसकी भी हत्या कर दी और दोनों के शव को पेड़ से लटका दिया, ताकि मामला आत्महत्या जैसा लगे।” यह कबूलनामा आरोपी रामू मुसहर और लड़की के मामा जितेंद्र निषाद का है, जिन्हें पुलिस ने बगहा के VTR जंगल में मिले प्रेमी जोड़े के कंकाल मामले में गिरफ्तार किया है। 3 महीने पहले 22 जनवरी को एक प्रेमी जोड़े के कंकाल पेड़ से लटके मिले थे। जांच के बाद मृतकों की पहचान अखिलेश यादव और उनकी प्रेमिका दुलारी कुमारी के रूप में हुई। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। बगहा एसपी रामानंद कौशल ने बताया कि दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। उन्होंने कहा कि मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर आरोपियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। पुलिस के सामने आरोपियों ने क्या-क्या कबूला? घटना के दिन और उससे पहले क्या हुआ? दोनों के प्रेम-प्रसंग की कहानी पढ़िए… पहले घटना से जुड़ी 2 तस्वीरें.. पढ़िए आरोपी मामा का कबूलनामा मामा जितेंद्र निषाद ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उन्होंने लड़की के पिता और अन्य साथियों के साथ मिलकर पहले से ही दोनों की हत्या की योजना बना ली थी। जितेंद्र ने कहा, “हमने दुलारी को कई बार समझाने की कोशिश की। दोनों को रंगे हाथ पकड़ा भी था। हमने उसे कहा कि ये सब मत करो, यह घर की इज्जत का सवाल है और समाज में बदनामी होगी, लेकिन वह नहीं मानी।” आरोपी ने आगे बताया, “जब हमें लगा कि अब वह किसी भी हालत में नहीं मानेगी, तब हमने तय कर लिया कि दोनों को मारकर पेड़ से टांग देंगे, ताकि मामला आत्महत्या जैसा लगे और किसी को शक न हो। इसी योजना के तहत मैं अपनी भांजी दुलारी को बहाने से अपने साथ ले गया।” जितेंद्र ने बताया, “मैंने उससे कहा कि जंगल में मवेशियों के लिए पत्ता काटना है। जब हम लोग मदनपुर जंगल पहुंचे, तो वहां पहले से ही रामू मुसहर मौजूद था। मैंने दुलारी से कहा कि रामू के मोबाइल से अपने प्रेमी अखिलेश को कॉल करे, लेकिन उसने मना कर दिया। इसके बाद हमने उसे डराया-धमकाया, मारपीट की और दबाव बनाकर उससे फोन करवाया। मजबूरी में उसने अखिलेश को जंगल में बुलाया। कुछ देर बाद जैसे ही अखिलेश वहां पहुंचा, हमने अपने प्लान के मुताबिक सबसे पहले लड़की की हत्या कर दी। इसके बाद हमने अखिलेश को घेर लिया, उसे धमकाया और जबरन उससे सुसाइड नोट लिखवाया। डर के कारण उसने सुसाइड नोट लिखा। इसके बाद हमने उसकी भी हत्या कर दी। दोनों के शव को एक ही पेड़ से लटका दिया, ताकि किसी को शक न हो और मामला आत्महत्या जैसा लगे। हमें लगा था कि इस तरह पुलिस भी इसे आत्महत्या मानेगी और मामला दब जाएगा।” अब पढ़िए दुलारी और अखिलेश की लव स्टोरी जनवरी-फरवरी 2025 शुरू हुई मुलाकातें अखिलेश यादव और दुलारी कुमारी एक ही गांव लौकरिया के रामपुर मतौरा टोला के रहने वाले थे। वर्ष 2025 की जनवरी-फरवरी से दोनों एक-दूसरे से मिलने लगे। तब अखिलेश 20 साल का था और इंटर पास था। जबकि दुलारी 14 साल की थी और 5वीं कक्षा में पढ़ती थी। धीरे-धीरे दोनों के प्रेम-प्रसंग की चर्चा गांव में फैलने लगी। परिजनों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन दोनों नहीं माने और किसी न किसी बहाने मिलते रहे। लड़की के परिवार को यह रिश्ता बिल्कुल मंजूर नहीं था। 8 सितंबर 2025: अखिलेश को घर से जबरन ले जाया गया करीब 9 महीने बाद, 8 सितंबर 2025 की शाम करीब 7 बजे दुलारी के पिता मदन बीन अखिलेश के घर पहुंचे। उन्होंने अखिलेश को जबरन पकड़ लिया और उसके हाथ पीछे से बांध दिए। जब परिजनों ने विरोध किया, तो मदन बीन ने कहा कि वह सिर्फ अपनी बेटी से मिलने की वजह पूछने के लिए उसे ले जा रहे हैं और कुछ देर में छोड़ देंगे। परिजनों के अनुसार, इसके बाद अखिलेश कभी वापस नहीं लौटा। 14-16 सितंबर 2025: लड़की के गायब होने की FIR कुछ दिन बाद दुलारी के लापता होने की खबर सामने आई। 14 सितंबर 2025 को उसके पिता मदन बीन ने लौकरिया थाने में बेटी के गायब होने का आवेदन दिया, जिसमें अखिलेश और उसके परिवार को आरोपी बनाया गया। 16 सितंबर को पुलिस ने FIR किया। इसके दो दिन बाद अखिलेश की मां लालपरी देवी ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। उन्होंने मदन बीन और उसके परिवार के तीन लोगों पर बेटे को मारपीट कर जबरन ले जाने का आरोप लगाया। शादी की झूठी कहानी सुनाकर मामला शांत कराया कुछ समय बाद मदन बीन ने अखिलेश के परिजनों से मुलाकात की और कहा कि उसने अपनी बेटी की शादी कहीं और तय कर दी है, जो फरवरी में होने वाली है। उसने यह भी कहा कि फिलहाल कोई कानूनी कार्रवाई न करें और मिलकर दोनों को ढूंढते हैं। लड़के के परिजनों को लगा कि दोनों भाग गए हैं, इसलिए वे खुद ही उनकी तलाश में जुट गए। जनवरी 2026: जंगल में मिले दोनों के कंकाल करीब पांच महीने बाद, 22 जनवरी 2026 को मदनपुर वन क्षेत्र में एक पेड़ से रस्सी के सहारे लटके दो नरकंकाल मिले। ये कंकाल लकड़ी काटने गए लोगों की नजर में आए, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। परिजनों ने कपड़े, मोबाइल और चप्पल के आधार पर दोनों की पहचान अखिलेश यादव और दुलारी कुमारी के रूप में की। पुलिस के अनुसार, मोबाइल के कवर से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिससे मामले की जांच को दिशा मिली। SIT जांच में सामने आई सच्चाई मामले की गंभीरता को देखते हुए बगहा एसपी रामानंद कौशल ने रामनगर एसडीपीओ रागिनी कुमारी के नेतृत्व में SIT का गठन किया। तकनीकी जांच और साक्ष्य के आधार पर करीब साढ़े तीन महीने बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी। सभी आरोपियों की पहचान हो गई है पुलिस के अनुसार, साजिश के तहत दोनों को मदनपुर जंगल में बुलाया गया। वहां अखिलेश यादव से जबरन सुसाइड नोट लिखवाया गया और फिर दोनों की हत्या कर दी गई। इसके बाद शवों को पेड़ से लटका दिया गया। इस मामले में पुलिस ने रामू मुसहर और दुलारी के मामा जितेंद्र निषाद को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म स्वीकार किया। मुख्य आरोपी और लड़की के पिता मदन बीन समेत अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।