भारत माला प्रोजेक्ट पर बवाल: किसान रोकेंगे हाईवे का काम:12 गांवों के किसानों ने बैठक में बनाई रणनीति, जिला प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप

बरनाला में भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे बठिंडा-लुधियाना ग्रीन फील्ड हाईवे से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर किसानों ने विरोध-प्रदर्शन किया है। ज़मीन संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में बरनाला जिले के गहल स्थित गुरुद्वारा भगतुआना साहिब में 12 गांवों के किसानों की एक बैठक हुई, जिसमें ज़िला प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए हाईवे का काम रोकने की चेतावनी दी गई। जमीनों का रेट लुधियाना जिले की जमीनों के बराबर देने का दिया आश्वासन इस अवसर पर जमीन संघर्ष कमेटी के नेताओं कुलवंत सिंह गेहल और जग्गा सिंह ने बताया कि बरनाला के डिप्टी कमिश्नर, रेवेन्यू ऑफिसर और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने ज़मीनों का रेट लुधियाना ज़िले की ज़मीनों के बराबर देने का आश्वासन दिया था। इस वादे को पूरा करने में काफी समय से देरी हो रही है, जिससे किसानों में रोष है। मांगों को लेकर प्रशासन से कई बार हो चुकी बैठक, नहीं निकल पाया कोई समाधान किसानों की मुख्य मांगों में लुधियाना जिले के रेट के अनुसार बरनाला के किसानों को मुआवज़ा देना और पहले अवार्ड की दो-फाड़ की रकम तुरंत जारी करना शामिल है। प्रशासन के साथ कई बैठकें होने के बावजूद ये मांगें अभी तक पूरी नहीं हुई हैं। कमेटी ने संघर्ष तेज करने की दी चेतावनी कमेटी ने चेतावनी दी है कि यदि ये मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आने वाले दिनों में किसान बरनाला प्रशासन की इस नीति के खिलाफ संघर्ष तेज़ करेंगे। उन्होंने कहा कि हाईवे का काम रोक दिया जाएगा और बरनाला जिले के 12 गांवों में आंदोलन शुरू किया जाएगा। देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती भारतमाला परियोजना का एक अहम पहलू हाई स्पीड गलियारों का निर्माण है। यह गलियारे न केवल प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा के समय को कम करेंगे, बल्कि इन मार्गों के माध्यम से औद्योगिक केंद्रों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों को तेजी से कनेक्टिविटी भी मिलेगी। फरवरी 2025 तक इस परियोजना के तहत 6,669 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड सड़कें प्रस्तावित थी, जिनमें से 4,610 किलोमीटर पहले ही बनकर तैयार हो चुकी हैं। यह प्रोजेक्ट कई राज्यों में चल रहा है।

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