हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल मनाली के एसडीएम ने नेशनल हाईवे पर कूड़ा फेंकने वाले पंजाब के एक टूरिस्ट को स्वच्छता का ऐसा पाठ पढ़ाया, जिसके बाद पर्यटक ने खुद ही सड़क पर फेंका हुआ कूड़ा उठाया और माफी मांगी। अब इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, आज (सोमवार को) सुबह के वक्त पंजाब के लुधियाना से मनाली घूमने आए एक टूरिस्ट ने पिज्जा खाने के बाद उसका रेपर बीच सड़क पर फेंक दिया। कुल्लू से मनाली जा रहे दबंग एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा ने कूड़ा फेंकने वाले टूरिस्ट को देख लिया। इसके बाद, एसडीएम अपनी गाड़ी से उतरे और स्वच्छता का महत्व बताते हुए टूरिस्ट को फटकार लगाई। एसडीएम बोले- ‘व्हाट इज दिस नॉनसेंस’ एसडीएम की फटकार के बाद टूरिस्ट ने माफी मांगी। एसडीएम ने कहा कि खुलेआम कूड़ा फेंकने में ‘शर्म नहीं आती’? तुमने डोमिनोज का पिज्जा खाया और सड़क पर फेंककर चल पड़े। ‘व्हाट इज दिस नॉनसेंस’, उन्होंने कहा कि यह कूड़ा हिमाचल के अंदर नहीं दिखना चाहिए। इस पर टूरिस्ट ने कहा कि पंजाब में फेंकूंगा, तब एसडीएम ने कहा कि पंजाब में भी कूड़ेदान में फेंकना है। आखिर में एसडीएम ने टूरिस्ट की गाड़ी की जांच के निर्देश दिए। टूरिस्ट को चेतावनी देकर छोड़ा एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा ने बताया कि सड़क पर कूड़ा फेंकने वाले टूरिस्ट को चेतावनी देकर छोड़ दिया था। उन्होंने कहा कि कूड़ा फैलाने वाले लोगों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी। इसके लिए विशेष अभियान लॉन्च किया जा रहा है और चालान बुक प्रिंट की जा रही है। उन्होंने बताया कि मनाली में न केवल देश बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में टूरिस्ट घूमने आते हैं। ऐसे में सभी लोगों से मनाली को साफ-सुथरा रखने की अपील की जाएगी और गंदगी फैलाने वालों को नहीं बख्शा जाएगा। पहाड़ों की स्वच्छता को दो बड़े निर्णय हिमाचल सरकार ने पहाड़ों को साफ-सुथरा बनाने के लिए बीते साल ही दो बड़े निर्णय लिए हैं। पहला- सभी कॉमर्शियल व्हीकल में डस्टबिन अनिवार्य किया गया है। दूसरा- पर्यटन स्थलों और पहाड़ों पर कचरा फेंकने वालों के चालान काटने का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान 1995 में बने हिमाचल प्रदेश नॉन बायोग्रेडेबल गारबेज कंट्रोल एक्ट में जोड़े गए हैं। राज्य में प्लास्टिक पहले से प्रतिबंध राज्य में रंगदार पॉलिथीन लिफाफों, सिंगल यूज प्लास्टिक, 60 GSM से अधिक मोटाई वाले नॉन वॉवन प्लास्टिक बैग पर कई साल पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है। सबसे पहले जनवरी 1999 में रंगदार पॉलिथीन लिफाफों पर बैन लगाया गया था। उसके बाद जून 2004 को 70 माइक्रोन से कम मोटाई वाले पॉलिथीन के थैलों पर प्रतिबंध लगाने वाला हिमाचल पहला राज्य बना। 2 अक्टूबर 2009 को पॉलिथीन थैलों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। इसके बाद सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए गए हैं।