मनीषा केस में अगुवा रहे पूर्व सरपंच बोले-राज्यसभा चुनाव लड़ूंगा:3 विधायकों का समर्थन, 7 से जुटा लेने का दावा; हरियाणा में 2 सीटों पर होगा चुनाव

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी करते हुए आईएएस पंकज अग्रवाल को रिटर्निंग ऑफिसर बनाया गया है, जबकि असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी हरियाणा विधानसभा के डिप्टी सेक्रेटरी गौरव गोयल को दी गई है। नामांकन 5 मार्च तक होगा। इसके साथ ही, जहां भाजपा और कांग्रेस की ओर से संभावित उम्मीदवार टिकट के लिए जोरआजमाइश में जुटे हैं, वहीं सरपंच एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे सोमेश कुमार ने निर्दलीय राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। दैनिक भास्कर एप से बातचीत में पूर्व सरपंच सोमेश कुमार ने दावा किया है कि उनके पास तीन विधायकों का समर्थन है। उनसे सवाल हुआ कि नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए तो कम से कम 10 विधायकों का समर्थन होना चाहिए, जिस पर उन्होंने दावा करते हुए कहते हैं कि वो यह संख्या जुटा लेंगे। बता दें कि पूर्व सरपंच सोमेश कुमार ने भिवानी में मनीषा हत्याकांड के दौरान हुए आंदोलन में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कड़ी का काम किया था। वे पेशे से व्यापारी और समाजसेवी हैं। गांव घिकाडा से 2016 में सरपंच रह चुके हैं। पहले जानिए क्यों हो रहा चुनाव और जीत के लिए कितने वोट चाहिए… किरण और जांगड़ा की सीट खाली हो रही
हरियाणा से किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। राज्यसभा सांसद राम चंद्र जांगड़ा मार्च 2020 में राज्यसभा सांसद बने थे। उनका कार्यकाल 10 अप्रैल 2020 से शुरू होकर 9 अप्रैल 2026 तक है। वे निर्विरोध चुने गए थे। वहीं, किरण चौधरी 27 अगस्त 2024 को राज्यसभा उपचुनाव में निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। यह सीट दीपेंद्र हुड्डा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। दीपेंद्र ने रोहतक से सांसद बनने के बाद इस्तीफा दिया था। जीत के लिए चाहिए 31 वोट
राज्यसभा चुनाव के लिए विधायकों की संख्या और राज्यसभा की सीटों की संख्या के आधार पर राज्यसभा वोटों की संख्या तय की जाती है। इस चुनाव के लिए कुल विधायकों की संख्या x100/(राज्यसभा की सीटें+1)= +1 फार्मूला लागू होता है। हरियाणा विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। हर विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसे उदाहरण से समझते हैं। हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। सबसे पहले कुल विधायकों को 100 से गुणा करते हैं, जो 9000 बनती है। कुल सीटों में एक जोड़ते हैं तो संख्या तीन बनती है। अब 9000 में तीन से भाग देते हैं तो 3000 आता है। इसमें एक और जोड़ेंगे। यानी 3001 जोड़ बनता है। यानी किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों का समर्थन (31 × 100 = 3100) जरूरी है। अब जानिए कौन है दावेदार और जीत के लिए क्या है रणनीति… भाजपा और कांग्रेस में ये चेहरे कर रहे लॉबिंग भाजपा कांग्रेस का गेम बिगाड़ना चाह रही
दरअसल, 16 मार्च को हो रहे चुनाव में भाजपा कांग्रेस का गेम बिगाड़ना चाहती है। ऐसे में वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मजबूत उम्मीदवार का समर्थन कर सकती है। हालांकि भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं कांग्रेस भी अपने विधायकों की संख्या के बल पर बेफिक्र है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए चाहिए 31 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास 31 विधायकों का समर्थन है। मगर, गुटों में बंटी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा खतरा यह संख्या नहीं, अंदरूनी असंतोष है। राज्यसभा चुनाव का इतिहास बताता है कि पार्टी प्रत्याशी की हार वोटों से नहीं, क्रॉस वोटिंग से होती है। कांग्रेस में इसी गुटबाजी को भाजपा भुनाना चाहती है। हुड्‌डा और सैलजा गुट में किसको यह टिकट जाता है? सबकी नजर उसी पर ही टिकी है। इसके अलावा 3 निर्दलीय विधायक भी हैं। हरियाणा में जब-जब 2 सीटों पर चुनाव हुआ…बड़ा उल्टफेर हुआ… 2016 का स्याही कांड: 14 वोट अमान्य हुए वर्ष 2016 में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए 3 प्रत्याशी मैदान में उतरे। 47 विधायकों वाली भाजपा ने एक सीट पर चौ. बीरेंद्र सिंह को कैंडिडेट बनाया और दूसरी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार सुभाष चंद्रा को समर्थन दिया। इनेलो ने एडवोकेट आरके आनंद को मैदान में उतारा जबकि कांग्रेस ने कोई ऑफिशियल प्रत्याशी नहीं उतारा। आनंद दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलकर आए तो माना गया कि कांग्रेस उनका समर्थन करेगी। हालांकि वोटिंग के दौरान कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट अमान्य कर दिए गए क्योंकि इनके बैलेट पेपर पर अलग रंग के पेन का इस्तेमाल हुआ था। आरोप था कि बैलेट पेपर पर गलत तरीके से स्याही लगाई गई। नतीजा दूसरी सीट पर BJP समर्थित सुभाष चंद्रा जीत गए। मामला चुनाव आयोग और अदालत तक पहुंचा। मीडिया ने इसे ‘स्याही कांड’ नाम दिया। 2022 में वोट दिखाने पर विवाद, क्रॉस वोटिंग भी वर्ष 2022 में भी राज्यसभा की 2 सीटों पर चुनाव हुआ। भाजपा ने कृष्णलाल पंवार तो कांग्रेस हाईकमान ने अपने विश्वासपात्र अजय माकन को प्रत्याशी बनाया। विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा और कांग्रेस के पास 1-1 सीट आनी थी, मगर खेल हो गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा ने अपने बेटे कार्तिकेय शर्मा को निर्दलीय कैंडिडेट के रूप में मैदान में उतार दिया। भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया। वोटिंग के दौरान आरोप लगे कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने अपने वोट भाजपा एजेंट को दिखाए। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इन वोटों को रद्द करने की मांग की मगर वोट रद्द नहीं हुए। नतीजा- कार्तिकेय शर्मा जीत गए और कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग खुलकर सामने आ गई। किरण चौधरी और कुलदीप बिश्नोई को लेकर खूब चर्चाएं चलीं। उसके बाद कुछ समय बीता और इन दोनों ने कांग्रेस छोड़कर BJP जॉइन कर ली। क्या कहते हैं आंकड़े इन 3 प्वाइंट में समझिए… जीतने के लिए चाहिए 31 वोट: हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें BJP के 48, कांग्रेस के 37, निर्दलीय 3 और इनेलो के 2 MLA हैं। राज्यसभा की 2 सीटों के लिए चुनाव होगा जिसमें जीत का फॉर्मूला रहेगा: कुल वैध मत ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1, यानी (90 ÷ 3) + 1 = 31। यानि किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 31 विधायकों के वोट चाहिए। भाजपा-कांग्रेस के पास एक-एक सीट जीतने का समीकरण: पहले राउंड में, यदि BJP दो और कांग्रेस 1 उम्मीदवार उतारती है, तो BJP अपने एक उम्मीदवार को 31 वोट देकर जिता देगी। उसके बाद उसके पास 17 वोट बचेंगे। वहीं, कांग्रेस भी अपने उम्मीदवार को 31 वोट देकर आसानी से जिता सकती है और इसके बाद उसके पास 6 वोट बचेंगे। इस गणित के अनुसार तो पहली सीट भाजपा और दूसरी सीट कांग्रेस की पक्की दिखती है। 9 क्रास वोट से भाजपा को मिल सकती हैं दूसरी सीट: असली खेल ये है कि भाजपा के पास 17, कांग्रेस के पास 6, निर्दलीय 3 और इनेलो के पास 2 वोट शेष बचते हैं। इनका कुल योग 28 होता है, जो कि जीत के लिए जरूरी 31 नंबर से कम है। यदि तीनों निर्दलीय और दोनों इनेलो विधायक भाजपा के साथ चले जाएं, तो भी BJP के पास केवल 22 वोट होंगे, जो जीत के लिए जरूरी आंकड़े से 9 कम है। उसके बाद अगर कांग्रेस के 9 विधायक क्रॉस वोटिंग कर दें तो BJP का दूसरा उम्मीदवार जीत सकेगा। —————— ये खबर भी पढ़ें… हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में फिर खेला होगा:BJP इस दफा भी चौंकाएगी, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की टेंशन; 7 पॉइंट्स में समझिए दोनों की प्लानिंग हरियाणा में राज्यसभा की 2 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने की घोषणा हो चुकी है। विधानसभा के अंदर मौजूदा संख्या बल के हिसाब से तो एक सीट सत्तारूढ़ BJP और दूसरी सीट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में जाती हुई नजर आती है लेकिन ऐसा ही होगा, ये कहना जल्दबाजी होगा। (पूरी खबर पढ़ें)

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