मोतिहारी में महाशिवरात्रि पर सहस्रशिवलिंग की प्राणप्रतिष्ठा:विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का छोटा प्रारूप होगा स्थापित, प्राचीन शास्त्रीय विधियों का किया जाएगा पालन

मोतिहारी के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में इस महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर सहस्रशिवलिंग की स्थापना के साथ विधिवत प्राणप्रतिष्ठा की जाएगी। यह स्थापना मंदिर परिसर में तालाब के किनारे बने ‘सहस्र शिवलिंग मंडपम्’ में संपन्न होगी। इसके लिए तमिलनाडु के महाबलीपुरम से अरघा सहित एक विशेष छोटा शिवलिंग और नंदी की प्रतिमा मंगाई गई है, जो मंदिर परिसर में पहुंच चुकी है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस शिवलिंग का निर्माण उसी पत्थर और शास्त्रीय विधि से किया गया है, जिससे मुख्य शिवलिंग का निर्माण प्रस्तावित है। इस सहस्रशिवलिंग में 72 लिंगों वाले 14 वृत्त हैं, जिनमें कुल 1008 शिवलिंग स्थापित हैं। इसकी स्थापना के बाद श्रद्धालु यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक कर सकेंगे। बड़े शिवलिंग की पूजा अभी संभव नहीं श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य अभी जारी है। ऐसे में मुख्य बड़े शिवलिंग की पूजा तत्काल संभव नहीं है, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए छोटे शिवलिंग की स्थापना की जा रही है, ताकि भक्त पूजा-अर्चना कर सकें। छोटे शिवलिंग की स्थापना के लिए विधिवत पूजा शनिवार से शुरू हो चुकी है, जिसमें जमीनदाता यजमान के रूप में शामिल हुए। मंदिर परिसर में एक पुजारी की नियुक्ति की गई है, जो नियमित पूजा-पाठ कराएंगे। श्रद्धालुओं के लिए रुद्राभिषेक की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी। मुंडन संस्कार की सुविधा होगी उपलब्ध निकट भविष्य में तालाब का सौंदर्यीकरण कर पूरे क्षेत्र को ‘शिवसागर क्षेत्र’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां महत्वपूर्ण पेड़-पौधों के साथ आश्रम जैसी व्यवस्था तैयार होगी। बच्चों के मुंडन संस्कार की सुविधा भी उपलब्ध होगी और जलाभिषेक के लिए कुआं निर्माण की योजना है। मंदिर के शोध-अधिकारी पंडित भवनाथ झा ने बताया कि स्थापना में प्राचीन शास्त्रीय विधियों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। यह परियोजना पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रहा है। हस्तलिखित पांडुलिपियों के आधार पर भूपुर सहित ‘पद्मबन्ध पीठ’ की स्थापना की जाएगी। जिस पर 64 देवी-देवताओं की पूजा होगी। इस शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कुल 1072 देवी-देवताओं की आराधना का फल एक साथ प्राप्त होगा। इस स्थापना को कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वानों की अध्यक्षता में संपन्न कराया जाएगा।

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