मोहाली नगर निगम ने लोगों को घरों के सामने ग्रीन बेल्ट, मार्केट्स, फुटपाथ व अन्य जगह पर एनक्रोचमेंट (अवैध कब्जे) हटाने के लिए तीन दिन का नोटिस दिया है। अब यह मामला पूरी तरह से गरमा गया है। इस मामले में इलाके के लोग मोहाली जिला अदालत में पहुंच गए हैं। उन्होंने इस मामले में GAMADA, नगर निगम और पुलिस को पार्टी बनाते हुए याचिका दायर की है। अदालत ने इस मामले में 1 दिसंबर को नगर निगम कमिश्नर, GAMADA के CA, EO, SDO और SSP मोहाली को तलब किया है। अदालत में यह 3 पॉइंट रखे गए हैं, जो क्रमवार इस प्रकार हैं – 1. तीन दिन के आदेश पूरी तरह गैर-कानूनी एडवोकेट प्रीतपाल सिंह बासी ने कहा कि सड़क के साथ सिर्फ 5 फुट का हिस्सा नगर निगम के अधिकार में आता है, बाकी जमीन GAMADA के अधीन है। GAMADA ने अभी तक कोई पत्र या नोटिफिकेशन जारी कर यह जमीन नगर निगम को नहीं सौंपी है। इसलिए नगर निगम कमिश्नर का तीन दिन का पब्लिक नोटिस पूरी तरह गैर-कानूनी है, क्योंकि उनके पास ऐसा नोटिस जारी करने का कोई अधिकार ही नहीं है। उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके जनता का पैसा भी खर्च किया है, जिसके लिए वह जिम्मेदार हैं। 2. 30 दिन में ही यह कार्रवाई की जा सकती है पॉलिसी के मुताबिक अगर कोई प्लॉट मालिक सड़क के साथ 5 फुट जगह नहीं छोड़ता, तो पहले उसे GAMADA की ओर से 15 दिन का नोटिस देना जरूरी है। इसके बाद 16वें दिन से 25 रुपए प्रति फुट, फिर हर दिन 5 रुपए प्रति फुट जुर्माना लगाया जा सकता है और 30 दिन बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि GAMADA ने किसी भी प्लॉट मालिक को कोई नोटिस ही जारी नहीं किया और 5 फुट से ज़्यादा जगह छोड़ने के बावजूद भी नगर निगम और GAMADA ने पुलिस के साथ मिलकर अचानक गैर-कानूनी तरीके से तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके लिए अधिकारी हाई कोर्ट में चल रही एक कंटेम्प्ट पिटीशन का गलत हवाला दे रहे हैं। 3. राजनीति से प्रेरित है मामला फेज-4 की काउंसलर रुपिंदर कौर रीना ने कहा कि नगर निगम की यह कार्रवाई साफ दिखाती है कि सिर्फ उनके वार्ड को निशाना बनाया जा रहा है और यह कदम राजनीति से प्रेरित है, क्योंकि वे हाउस मीटिंग में सरकार की गलतियों पर आवाज उठाती रहती हैं। उन्होंने कहा कि वे वार्ड के लोगों और शहरवासियों के साथ मिलकर इस जुल्म के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगी। नगर निगम की तरफ से जो नोटिस जारी किया है, वे तीन प्वाइंटों में जाने: सालों से हाईकोर्ट में चल रहा है केस मोहाली शहर का एरिया अब काफी बढ़ चुका है। इसमें अब एरोसिटी, आईटी सिटी तक का एरिया शामिल हो गया है। नगर निगम की कोशिश यही है कि शहर को अवैध कब्जों से मुक्त किया जाए। पहले भी अवैध कब्जों से जुड़ा मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच चुका है। इसके बाद फेज-1 और 11 से कब्जे हटाए गए थे।