चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और उसकी अवमानना याचिका खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट का समय बर्बाद करने पर 1 लाख रुपए जुर्माना लगाया। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने फैसले में कहा कि जिस जज (जालंधर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश) पर झूठा केस किया था, उन्हें ही यह राशि दें। साथ ही भुगतान न करने की स्थिति में इसे भू राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा। न्यायिक अधिकारी ने कोर्ट के आदेश का पालन किया, इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका लगाई। दरअसल 10 नवंबर, 2025 को हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को कुछ आवेदनों का निपटारा संभव हो तो 3 माह में करने को कहा था। जालंधर के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) ने 27 फरवरी को आवेदन का निपटारा कर दिया था। मगर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर दी कि 3 माह के अंदर केस का निपटारा नहीं किया गया। पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों से लंबित केसों का बोझ बढ़ता है, जो पहले से गंभीर चिंता का विषय है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले आदेश में 3 महीने की अवधि अनिवार्य नहीं थी, बल्कि केवल प्राथमिकता पर जल्द निपटारे की सलाह दी गई थी, इसलिए देरी को अवमानना नहीं माना जा सकता।