हरियाणा सरकार के हालिया आदेश ने उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख ऐसे शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं की है। 16 फरवरी को जारी आदेश में हरियाणा सरकार ने शिक्षकों को मार्च 2027 तक HTET पास करने का निर्देश दिया है और असफल रहने पर सेवा समाप्ति की चेतावनी दी है। यूपी में स्थिति और जटिल है। यहां करीब 50 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनके पास TET में बैठने की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ही नहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने रिव्यू पिटीशन दाखिल की है, जिस पर अभी सुनवाई बाकी है। कोर्ट ने शिक्षकों को सितंबर 2027 तक TET पास करने का समय दिया है। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि RTE-2009 के तहत TET की अनिवार्यता जुलाई 2011 से लागू हुई। इसलिए इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू नहीं किया जा सकता। यूपी सरकार की रिव्यू पिटीशन खारिज होती है, तो राज्य सरकार के पास क्या विकल्प बचेगा? शिक्षक संघ क्यों कर रहे विरोध? पढ़िए ये रिपोर्ट… कैसे टीईटी मामले में फंसा पेंच संसद ने 4 अगस्त, 2009 को निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE-2009) पारित किया। इसे 1 अप्रैल, 2010 से देशभर में लागू किया गया। इस कानून का उद्देश्य 6 से 14 साल के हर बच्चे को कक्षा- 1 से 8 तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है। साथ ही शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता के रूप में टीईटी (TET) अनिवार्य किया गया। 27 जुलाई, 2011 को आदेश जारी कर प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भर्ती के लिए TET अनिवार्य सेवा शर्त बनाई गई। 1 सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने बड़ा फैसला दिया। कहा- जिनकी सेवा 5 साल से ज्यादा बाकी है। ऐसे सभी शिक्षकों को 2 साल (सितंबर 2027 तक) में TET पास करना अनिवार्य होगा। जिनकी नौकरी 5 साल से कम बची है, उनको छूट तो दी गई। लेकिन, प्रमोशन के लिए उन्हें भी TET पास करना जरूरी है। साथ में पीठ ने 2014 के कर्नाटक के प्रमति एजुकेशनल एंड कल्चरल ट्रस्ट फैसले पर भी सवाल उठाया। जिसमें RTE Act को अल्पसंख्यक संस्थानों (सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त) से पूरी छूट दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि फैसले की समीक्षा जरूरी है। मामला संवैधानिक पीठ को भेज दिया गया। फिलहाल संवैधानिक पीठ नहीं बनी है। यूपी सरकार की रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई होनी है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से देश भर के 21 लाख शिक्षक आंदोलन कर रहे हैं। इनमें यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। कई शिक्षक तो 20 से 25 साल से पढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी नौकरी के बाद फिर से परीक्षा लेना कहां तक तर्कसंगत है? शिक्षक संघों का दावा है कि इसी तनाव में 2 शिक्षकों की मौत भी हो चुकी है। शिक्षकों के आंदोलन के चलते ही यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह के समक्ष रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। इस पर अभी सुनवाई होनी है। प्रदेश के 50 हजार शिक्षक तो टीईटी में बैठ ही नहीं सकते प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में 1.86 लाख शिक्षक ऐसे हैं, जो TET पास नहीं हैं। इनमें करीब 50 हजार ऐसे शिक्षक हैं, जो TET के लिए पात्र ही नहीं हैं। इसकी वजह भी है। TET के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ग्रेजुएशन के साथ बीएड, डीएलएड है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ लखनऊ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभाकांत मिश्रा के मुताबिक, साल 1998 तक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की न्यूनतम योग्यता इंटरमीडिएट और बीटीसी ही थी। तब इंटर पास करने पर ही बीटीसी का प्रावधान था। प्रदेश में इस न्यूनतम योग्यता के साथ लगभग 15-20 हजार शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। इसके अलावा मृतक आश्रित के तौर पर भी 15 हजार से ज्यादा शिक्षक हैं। 5 साल की सेवा के बाद उन्हें शासनादेश के मुताबिक ट्रेंड ग्रेड मिल जाता है। इसमें कई न तो ग्रेजुएट हैं और न ही बीटीसी किए हैं। तीसरी श्रेणी में बीपीएड से शिक्षक की नौकरी कर रहे लोग शामिल हैं। प्रदेश में 1999 और 2004 में बीपीएड वालों की प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बतौर शारीरिक शिक्षक के तौर पर नौकरी लगी है। ऐसे शिक्षकों की संख्या भी करीब 20 हजार है। इंटर कॉलेजों के शिक्षक भी आएंगे दायरे में यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा कहते हैं- आरटीई-2009 एक्ट इंटर कॉलेजों में भी कक्षा- 6 से 8वीं तक लागू है। प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या लगभग 20 हजार है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जद में ये भी आएंगे। तब सरकार को इंटर कॉलेजों में कक्षा- 6 से 8वीं तक पढ़ा रहे शिक्षकों को भी TET क्वालीफाई कराना होगा। प्रदेश में बड़ी संख्या में मान्यता प्राप्त और प्राइवेट कॉलेज भी हैं। उनके शिक्षकों के लिए भी TET अनिवार्य होगी। यहां तक कि शिक्षामित्रों के मामले में सरकार क्या कदम उठाएगी? क्योंकि आखिर में कक्षा-1 से 8वीं तक के बच्चों को पढ़ा तो वो भी रहे हैं। दिनेश चंद्र शर्मा कहते हैं- प्रदेश में 1993 से शिक्षकों की भर्ती एनसीईटी (नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) की तय गाइडलाइन के अनुसार हो रही है। वहीं, प्रदेश में शिक्षकों का प्रमोशन अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के तहत वरिष्ठता के आधार पर तय है। 2017 में जब TET अनिवार्य किया गया था, तो कहा गया था कि सिर्फ 2001 के बाद भर्ती हुए अप्रशिक्षित अध्यापकों के लिए TET अनिवार्य होगी। अब सभी शिक्षकों पर अनिवार्य कर दिया गया है। टीईटी को लेकर यूपी और केंद्र का क्या है रुख? चुनाव में शिक्षकों की बड़ी भूमिका होती है। फिलहाल प्रदेश सरकार TET को लेकर शिक्षकों के प्रति नरम है। 12 फरवरी (गुरुवार) को प्रदेश की विधानसभा में चित्रकूट से सपा विधायक अनिल प्रधान के TET को लेकर किए गए सवाल पर शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि TET की अनिवार्यता को लेकर जो जजमेंट है, वह पूरे देश के लिए लागू है। यूपी सरकार इसकी रिव्यू में गई है। अभी कोई जजमेंट नहीं आया है। इससे पहले 12 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सपा सांसद लालजी वर्मा के सवाल के लिखित जवाब में टीईटी (TET) को लेकर केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू रहेगा। हालांकि यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा कहते हैं कि प्रदेश के शिक्षकों ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन मुलाकात की थी। वे भी इस बात पर सहमत दिखे कि आरटीई-2009 के तहत TET का प्रावधान जुलाई- 2011 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों पर लागू नहीं होना चाहिए। शिक्षकों को राहत देने का यूपी सरकार के पास विकल्प क्या? राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री शिवशंकर सिंह कहते हैं- हमारी लड़ाई सीधे 27 जुलाई, 2011 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों को राहत दिलाने को लेकर है। शिक्षक संघों की मांग पर ही यूपी सरकार ने रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। अगर यह रिव्यू पिटीशन स्वीकार हो जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट से सभी शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता पर रोक लग जाएगी। अगर सुप्रीम कोर्ट रिव्यू पिटीशन खारिज भी करता है, तो राज्य सरकार के पास शिक्षकों को राहत देने का विकल्प है। शिवशंकर सिंह कहते हैं- शिक्षा समवर्ती सूची में आती है। मतलब, इस पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारें नियम बना सकती हैं। शिक्षक संघ, मुख्यमंत्री योगी से मिलकर बताएंगे कि वह तमिलनाडु की तरह शिक्षकों के लिए TET में छूट दे सकते हैं। शिवशंकर सिंह के मुताबिक, तमिलनाडु में करीब 4 लाख सरकारी और प्राइवेट शिक्षक हैं। तमिलनाडु सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में रिव्यू पिटीशन दाखिल की है। इसके साथ ही वह दो साल में शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को देखते हुए भी एक अध्यादेश भी लेकर आई है। इसमें सरकार ने दो साल में 6 TNTET (तमिलनाडु शिक्षक पात्रता परीक्षा) आयोजित कराने का निर्णय लिया है। साथ ही क्वालीफाई मार्क्स भी कम किए हैं। केंद्रीय मंत्री जयंत के बयान से शिक्षक नाराज, आंदोलन की बनाई रणनीति
फिलहाल प्रदेश के शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। शिक्षक, बजट सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के जवाब से नाखुश हैं। केंद्रीय मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दो टूक बोला कि TET देना सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। जबकि, केंद्र सरकार राज्यों से पत्र लेकर इस पर विचार कर रही है। इसके बारे में उन्होंने संसद में कोई जानकारी नहीं दी। शिक्षक संगठनों का कहना है कि टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले प्रदेश के सभी शिक्षक 22 फरवरी से सोशल साइट्स पर हैशटैग अभियान चलाएंगे। 23 से 25 फरवरी तक काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करेंगे। 26 फरवरी को जिला बेसिक अधिकारी के कार्यालय पर धरना देंगे। फिर पैदल मार्च कर जिलाधिकारी के माध्यम से पीएम को संबोधित ज्ञापन सौपेंगे। मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में देश भर के शिक्षकों के साथ बड़ी रैली करेंगे। जुलाई के पहले सप्ताह में यूपी टेट की परीक्षा संभावित
सीबीएसई ने देश भर में 138 जिलों में अभी 7 और 8 फरवरी को सीटीईटी (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) का आयोजन दो-दो पालियों में कराया था। यूपी जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मानें, तो प्रदेश के करीब 50 हजार शिक्षकों ने ये परीक्षा दी है। यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा भी जुलाई- 2026 के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है। यूपी टेट की परीक्षा की भी तैयारी बड़ी संख्या में शिक्षक कर रहे हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें- मोहन भागवत बोले-भारतीय मुसलमान भी हिंदू, घर वापसी करानी है:लखनऊ में कहा- हिंदू 3 बच्चे पैदा करें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को लखनऊ में कहा- भारत में रहने वाले मुस्लिम भी हिंदू हैं, वे कोई अरब से नहीं आए है। घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। पढ़ें पूरी खबर…