बिहार विधानसभा चुनाव में तमाम एग्जिट पोल और राजनीतिक भविष्यवाणियों को दरकिनार कर मोदी-नीतीश की जोड़ी (एनडीए) ने 202 सीटें जीतीं। एनडीए की उम्मीद से अधिक जीत में महिलाओं के अभूतपूर्व समर्थन और वोटों को आधार माना गया है। महिलाओं के एनडीए के लिए इस झुकाव की वजह चुनाव से पहले जीविका दीदी के खाते में भेजे गए 10-10 हजार रुपए हैं। योगी सरकार के मंत्री, भाजपा के पदाधिकारी और राजनीतिक विश्लेषक भी यह मानते हैं। इसके चलते मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना, महाराष्ट्र की सीएम माझी बहन लड़की, हरियाणा की दीनदयाल लाडो लक्ष्मी के बाद यूपी में भी महिलाओं और बेटियों के वोट को साधने के लिए भाजपा कोई गेमचेंजर योजना लागू करेगी। मिशन 2027 की चुनौती…बड़ी जीत का दबाव हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में भाजपा-एनडीए की जीत हुई है। इसके बाद यूपी के सीएम योगी, भाजपा और वैचारिक संगठनों के लिए यूपी विधानसभा चुनाव- 2027 किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं। यूं तो सीएम योगी सबसे लंबे समय तक सीएम रहने और सबसे लंबे समय तक भाजपा सरकार चलाने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा चुके हैं। लेकिन, बिहार में जिस तरह के नतीजे आए हैं, अब वैसी ही प्रचंड जीत को लेकर दबाव बढ़ गया है। यूपी में विधानसभा चुनाव का आगाज जनवरी- 2027 के पहले सप्ताह तक हो जाएगा। ऐसे में योगी सरकार के पास महज 13-14 महीने का समय है। लिहाजा, सरकार और संगठन ने भी मिशन- 2027 को लेकर सोचना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में पीएम मोदी के बाद सबसे लोकप्रिय स्टार प्रचारक होने के नाते सीएम योगी भी अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। जानिए बिहार का जीविका दीदी मॉडल क्या है?
बिहार में सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना लागू की। इसका उद्देश्य हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार से जोड़ना था। इसके लिए हर परिवार की एक महिला को विधानसभा चुनाव से पहले 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई। रोजगार शुरू करने का बाद सरकार उसका आकलन करेगी। इसके बाद अधिकतम दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए दी जाएगी। नीतीश सरकार ने 25 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए ट्रांसफर किए। इसमें करीब 500 करोड़ रुपए खर्च किए गए। विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला। इसके बाद तमाम राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रचंड जीत में जीविका दीदी के खाते में गए 10-10 हजार रुपए का बड़ा योगदान है। अब जानिए महिला वोटर को क्यों साध रही भाजपा? एक साधे, सब सधे
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं- भाजपा के रणनीतिकार समझ गए हैं कि परिवार की एक महिला को साधने से वह 5 वोट प्रभावित करती है। खासतौर पर जिस परिवार की महिला को आर्थिक सहायता दी जाती है, उसके वोट तो संबंधित सत्तारूढ़ दल के पक्ष में जाना लगभग तय हो जाता है। यूपी में भी करीब सवा 7 करोड़ महिला वोटर हैं। यूपी में 98 लाख महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ीं
यूपी में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन चल रहा है। इसके तहत 10-10 महिलाओं के महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाता है। इसमें सरकार की ओर से सब्सिडी पर आर्थिक सहायता भी मुहैया कराई जाती है। यूपी में इस समय 8,99,398 परिवारों की 98,76,389 महिलाएं समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं को साधने के लिए क्या कर रही भाजपा? एक करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास मंत्रालय की कमान संभालने के बाद 10 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया। इसमें उन समूह की महिलाओं को शामिल किया जाएगा, जिनकी सालाना इनकम एक लाख से ज्यादा है। 10 लाख लखपति दीदी का लक्ष्य पूरा करने के बाद केशव ने 30 लाख लखपति दीदी का लक्ष्य दिया। इसमें से 18,56,000 महिलाओं की आय एक लाख रुपए सालाना से अधिक हो गई। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद बिहार चुनाव में सहप्रभारी और बिहार में भाजपा विधायक दल की बैठक के पर्यवेक्षक का दायित्व संभालने के बाद यूपी लौटे हैं। उन्होंने अब यूपी में एक करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया है। केशव ने बिहार चुनाव में महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को मिली राशि का करिश्मा देखा है। इसीलिए वो यूपी में भी महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर भाजपा का वोटबैंक मजबूत करने में जुट गए हैं। विधायकों ने भी की थी सिफारिश
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में यूपी के 100 से ज्यादा विधायकों को चुनाव प्रचार के लिए भेजा गया था। विधायकों ने चुनाव से लौटने के बाद भाजपा प्रदेश नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए लाडली बहना योजना का तारीफ करते की थी। साथ ही यूपी में भी उसी तरह की कोई योजना लागू करने की जरूरत बताई थी। सपा के पीडीए की काट बन सकती हैं महिलाएं
भाजपा नेता मानते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को कोई बड़ी सहायता देना सपा के पीडीए की काट बन सकता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा का पीडीए का मुद्दा काम कर गया था। नतीजतन, भाजपा की सीटें 64 से घटकर 34 रह गई थीं। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में सीएम योगी ने खुद माना था कि अगर आज चुनाव हो तो यूपी में भाजपा को 188 सीटें मिलेंगी। ये 188 सीटें बहुमत से दूर हैं। हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद भाजपा नेतृत्व अब पूरा फोकस पश्चिम बंगाल पर करेगा। पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व का पूरी ताकत 2027 में यूपी में फिर से कमल खिलाने पर लगाएगा। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले होगी बड़ी घोषणा
दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी होकर जाता है। इसीलिए भाजपा नेतृत्व किसी भी कीमत पर यूपी को हाथ से नहीं जाने देना चाहता। इसके लिए वह कोई भी कीमत चुकाने के तैयार है। भाजपा के बीच चर्चा आम है कि विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में भी महिला वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए कोई बड़ी योजना लागू की जाएगी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि महिला सशक्तीकरण प्रधानमंत्री मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यूपी ने प्रधानमंत्री के प्रयास को धरातल तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… यूपी में 2027 में कांग्रेस को चाहिए 85 सीटें, सपा से बारगेनिंग करने के मूड में; लोकसभा चुनाव में बसपा को यूपी का दलित समाज संविधान को लेकर काफी संजीदा है। 2024 में जब संविधान पर खतरे की बात उठी, तो दलितों ने बसपा की बजाय कांग्रेस को वोट दिया। जहां कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव में उतरे, वहां बसपा को काफी कम वोट मिले। वहीं, INDI गठबंधन में शामिल जहां सपा लड़ी, वहां बसपा को ज्यादा वोट मिले। पढ़ें पूरी खबर