‘राजनीतिक परिवार से हूं, ये मेरा दोष नहीं’:बेबाक हूं-बेअदब नहीं किताब पर शालिनी सिंह बोलीं– हम अपने काम से पहचान बनाएंगे

हम सामाजिक कार्यकर्ता हैं। राजनीति की ओर कोई कदम नहीं बढ़ाया है। राजनीति परिवार में है और ये मेरा दोष नहीं है। आज जो भी चर्चाएं हो रही हैं, हमने नहीं शुरू कीं। नेतृत्व कौन करेगा…ये जनता निर्धारित करेगी। चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना, ये नियति और कर्म निर्धारित करेंगे। कुछ तो चुनिंदा लोग हैं जो काम करने आए हैं, उन्हें काम करने दीजिए। मनोबल मत तोड़िए। …हम टिकट नहीं मांग रहे। मांगने वालों में हम हैं भी नहीं। सिर्फ काम करना चाहते हैं। ये कहना है भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह का। लेखिका, कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता शालिनी सिंह अपने बेबाक विचारों और सक्रियता को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी किताब आई है… ‘बेबाक हूं, बेअदब नहीं’। शालिनी सिंह ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। जानिए उन्होंने क्या कहा….पढ़िए पूरा इंटरव्यू। सवाल: आप लेखक और कवि भी हैं। क्या इसका फायदा राजनीति में मिल रहा है। या मिलेगा? जवाब: हम सामाजिक कार्यकर्ता हैं। राजनीति की तरफ कोई कदम नहीं बढ़ाया है। राजनीति परिवार में है और ये मेरा दोष नहीं है। आज जो भी चर्चा हो रही है वो हमने शुरू नहीं की। नेतृत्व कौन करेगा ये वक्त आने पर चुनाव नहीं निर्धारित करेंगे। नेतृत्व कौन करेगा?… ये जनता निर्धारित करेगी। चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना ये नियति और कर्म निर्धारित करेंगे।
कुछ तो चुनिंदा लोग है जो काम करने आए हैं। उनको कृपा करके काम करने दीजिए। जब ऐसी कोई न्यूज चलती है… इनका कोई मकसद है तो मनोबल टूटता है। क्या पता हम एक्जाप्मल सेट करना चाहते है। कार्यकर्ता वो है जिसका कार्य दिखे सिर्फ कर्ता दिख रहा है तो कार्य हो नहीं रहा। छपास और लिखास से ऊपर बढ़कर कार्य करिए। सवाल: पार्टी चुनाव मैदान में उतारती है तो किन ऐजेंडों को लेकर सामने आएंगी?
जवाब: पहली बात मैं खंडन कर दूं कि हम टिकट मांग रहे। मांगने वालों में हम हैं भी नहीं। हम सिर्फ काम करना चाहते हैं। अगर राजनीति मेरे कार्य के आड़े आएगी तो ऐसी कोई बड़ी चीज नहीं जो हम छोड़ नहीं सकते। दूसरी चीज है हम एजुकेशनिस्ट हैं शिक्षण संस्थान चलाते हैं। मूलभूत चीजों पर काम करते हैं तो सारी चीजें पूरी हो जाती हैं। आसपास की हवा, शिक्षा का अधिकार सब तक पहुंचे, क्वालिटेटिव एजुकेशन सभी तक पहुंचे। बिजली-पानी-सड़क, इन सभी पर मुद्दों पर रहें तो बेहतर रहेगा। हम बड़े-बड़े इश्यू को उठा लें और हमारे आसपास ही चीजें ठीक नहीं हैं, हम प्राधिकरण से क्यों लड़ें हम उनको भी सक्षम क्यो न बनाएं। हम उन पर बात करें जो पहले होने वाले मुद्दे हैं। सवाल: आजकल राजनीति हिंदू-मुस्लिम की धुरी पर घूम रही है, कितनी सहमत हैं?
जवाब: इससे इस देश को ऊपर उठना होगा। हमें सिखाया गया है वसुधैव कुटुंबकम। ये सारा जहान ही आपका देश है। अतिथि देवो भव। हम इन मानसिकता से आने वाले लोग हैं। तो हम कहां फंस गए। पहले ये था भी नहीं कि कौन-किस जाति से है। हमारे यहां सहभोज होता है। किसी के घर से दाल आती है, किसी के यहां से सब्जी। हम उसे आपस में मिलकर परोसते हैं। अब यहां क्या पता कि किसने-किसका नमक खाया। हमें भाईचारे की बात करनी चाहिए। सबसे पहले हम अपने दायित्व की बात करें। एक सिटीजन के तौर पर हमारा क्या दायित्व है? जो भी हमारे जनप्रतिनिधि हैं उनको कैसे स्ट्रांग बना सकें। हम क्यों नहीं उनको स्ट्रैंथ दे सकते हैं। आलोचना ही क्यों करनी है उनके अच्छे कामों की सराहना भी तो हो सकती है। गलती हो तो एक साथ खड़े होकर उसकी आलोचना करें। सवाल: दिल्ली से पढ़ाई की… नोएडा के प्रति इतना लगाव क्यों?
जवाब: इतना लंबा किसी शहर में रहे नहीं, बाहर रहे। जिस जगह कोई रहता है उसको साफ करना, उसके बारे में सजग होना बहुत जरुरी है। मेरी यहां की रिहाइश है, इसलिए यहां की समस्याओं से वाकिफ हैं। यहां के जो भी मुद्दे हैं उन पर बात करते हैं-विचार करते हैं। सवाल: पूर्वांचल में बाहुबली आपस में मिल रहे हैं। तो पश्चिमांचल में ऐसा कुछ?
जवाब: देश की बात कब करेंगे? पूर्वांचल, अवध-मगध… ये वहां तक जरुरी है जहां तक ये आपको आगे बढ़ाएं कि हम क्षेत्र के लिए कुछ करने आए। जहां बांटने की बात हो वहां सिर्फ देश की बात होनी चाहिए। सवाल: अपनी किताब का टाइटल ‘बेबाक हूं-बेअदब नहीं’ ही क्यों चुना?
जवाब: हमारी लाइफ में ऐसा होता आया है कि हमें चीजें खुद चुननी पड़ीं। हम बेबाक शब्द पर कुछ लिखना चाहते थे। टापिक अपने आप आया। बेबाकी बहुत जरुरी है। डर के जीने से कोई फायदा नहीं। श्मशानों में उनकी लाशें जल रही हैं। जो इस डर से नहीं लड़े कि मर जाएंगे। तब सच्चाई ही मौत है। …तो बेबाक होकर ही जीना चाहिए। सवाल: इस किताब में क्या है… आपकी बेबाकी है या फिर विरासत?
जवाब: इसमें सब कुछ है। जिंदगी जीने का सलीका है। इसमें अगर आप खुद को ढूंढेंगे तो हर पन्ने में अपने आप को पाएंगे। हम हर पढ़ने वाले से निवेदन करेंगे जो अच्छा न लगे वो भुला देना और जो लग जाए वो एकदम दिल पर लगा लेना। मुक्त छंद में लिखा गया है। हमारी परवरिश लखनऊ में हुई। उर्दू काफी अच्छी है लेकिन हमने आसान भाषा का प्रयोग किया। अब हम उस तरह के लेखक बन गए जो ज्यादा ही बेबाक हो गए हैं। शायद दुनिया तैयार नहीं है उस बेबाकी के लिए। इसमें गजल है नजम है मुक्त छंद में हम अपने को ज्यादा आजाद महसूस करते हैं क्योंकि उसमें दो लाइनों में वो बात कर सकते है जिसमें गद्य लिखे जाएं। हम वीर रस में लिखते है काफी गहराई से चीजों को देखते हैं। कविता बहुत पावर फुल है ये दो धारी तलवार है। ये सिर्फ सुनने की चीज नहीं है। जब पढ़ते है जो इमेजिन करते हैं।
सास-ससुर बिहार के पूर्व सांसद पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह की बेटी शालिनी सिंह की शादी आरा से पूर्व सांसद स्व. अजीत सिंह और पूर्व सांसद मीना सिंह के इकलौते पुत्र विशाल सिंह से हुई है। विशाल सिंह बिहार के आरा के रहने वाले हैं, लेकिन वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। वह भी भाजपा नेता हैं। वह बिहार स्टेट कोआपरेटिव मार्केटिंग यूनियन (बिस्कोमान) के अध्यक्ष भी हैं। शालिनी-विशाल का एक 13 साल का बेटा अथर्व है। लॉ की डिग्री हासिल करने वाली शालिनी कई स्कूल-कॉलेज चलाती हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- संघ डंडा लेकर दरवाजे पर खड़ा रहेगा:संत भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए काम करें; वृंदावन में संत के पैर छुए संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। भागवत ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। संघ प्रमुख ने कहा- समाज को गो-भक्त बनाया जाए, तो गो-हत्या अपने आप रुक जाएगी। जो लोग आज सत्ता में हैं, उनके मन में भी यह बात है। वे करना चाहते हैं, लेकिन कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है। गो-जागृति को मजबूत करना होगा। जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा। पढ़ें पूरी खबर

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