2014 के बाद कल यानी 16 मार्च को बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर वोटिंग होनी है। इसके लिए 6 कैंडिडेट मैदान में हैं। 5 NDA और 1 महागठबंधन के। दोनों गठबंधन जीत के अपने-अपने दावे कर रहे हैं। इसके अपने समीकरण हैं। NDA जहां डिनर के बहाने रोज विधायकों की हाजिरी लगवा रहा है तो महागठबंधन का आखिरी फैसला इफ्तार पार्टी के बाद होगा। 15 मार्च यानी आज AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान के आवास पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया है। इसमें तेजस्वी यादव के अलावा दूसरे नेता भी आमंत्रित हैं। यहां दोनों के बीच फाइनल डील होगी। इससे पहले 11 मार्च को दोनों के बीच एक राउंड की बात हो चुकी है। तब दोनों ने कहा था कि पॉजिटिव बातचीत हुई है। स्पेशल रिपोर्ट में समझिए क्या है NDA की रणनीति। तेजस्वी किस फॉर्मूले के आधार पर जीत का दावा कर रहे हैं। NDA क्या तरकीब अपना सकती है। किस पार्टी के विधायक आखिरी समय में पूरा समीकरण बिगाड़ सकते हैं। सबसे पहले NDA की रणनीति समझिए आज विधायकों को बताया जाएगा कि किन्हें वोट करना है, मॉक वोटिंग भी होगी वोटिंग से दो दिन पहले NDA ने अपने विधायकों को पटना बुला लिया है। भास्कर ने NDA के 10 से ज्यादा विधायकों से बात की। उनसे समझा कि किस तरह की रणनीति तैयार की जा रही है। सभी विधायकों ने दो बातें बताई। 15 मार्च को JDU नेता और मंत्री विजय चौधरी के आवास पर डिनर पार्टी होगी। यहीं पर सभी विधायक से मॉक वोटिंग कराई जाएगी। ताकि, सभी विधायकों को वोटिंग की सही जानकारी मिले और वोट कैंसिल होने की संभावना खत्म हो। इसका एक बड़ा कारण यह है कि NDA के लगभग 100 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक एक बार भी राज्यसभा के लिए वोटिंग नहीं की है। इससे पहले 14 मार्च को उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर और 12 मार्च को डिप्टी CM सम्राट चौधरी के आवास पर NDA के विधायकों के लिए डिनर परोसा गया था। BJP के विधायक उपेंद्र कुशवाहा के लिए करेंगे वोट, सहयोगी BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष को जिताएंगे BJP सूत्रों की मानें तो NDA में एक स्ट्रैटजी के तहत उपेंद्र कुशवाहा को अपना चौथा कैंडिडेट बनाया गया है। BJP के महामंत्री शिवेश राम को 5वां कैंडिडेट बनाया गया है। BJP के विधायक उपेंद्र कुशवाहा को वोट करेंगे और छोटे सहयोगी दल HAM और LJP(R) के विधायक BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को वोट करेंगे। इसके 2 कारण बताए जा रहे हैं। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी कर रहे थे उपेंद्र कुशवाहा का विरोध कुशवाहा के नाम की घोषणा के बाद भी जब चिराग पासवान से इस संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘हम केवल BJP कैंडिडेट को जानते हैं, बाकी के बारे में जानकारी नहीं है।’ दूसरी तरफ हम प्रमुख जीतन राम मांझी भी लगातार उपेंद्र कुशवाहा के नाम का विरोध कर रहे थे। उनका तर्क था कि विधानसभा में उपेंद्र कुशवाहा की संख्या उनसे कम है। मांझी भी लगातार राज्यसभा की एक सीट के लिए दावेदारी कर रहे थे। ऐसे में इस बात का खतरा सता रहा था कि NDA के विधायक ही कहीं उपेंद्र कुशवाहा के नाम पर क्रॉस वोटिंग न कर दें। उपेंद्र कुशवाहा की जीत तय करने के लिए BJP ने अपने उम्मीदवार को 5वां कैंडिडेट तय कर दिया। 5वां कैंडिडेट मांझी और चिराग के समाज से यानी दलित है। इससे उनके नाराज होने की संभावना खत्म हो जाती है। 3 वोट के लिए 3 स्ट्रेटजी पर काम चुनाव में एक सीट पर जीत के लिए 41 विधायक की जरूरत है। NDA के पास 202 विधायक हैं। इस लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए NDA के 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। इसके लिए BJP 3 फॉर्मूले पर काम कर रही है… अब महागठबंधन की स्ट्रेटजी समझिए AIMIM की डिमांड, महागठबंधन में शामिल करें लालू यादव और तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव में AIMIM के लिए महागठबंधन का दरवाजा नहीं खोला था। अब जब राज्यसभा चुनाव में वोट चाहिए तो AIMIM ने भी महागठबंधन में शामिल करने की मांग रख दी है। AIMIM को नजदीक लाना तेजस्वी यादव का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। तेजस्वी ने एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश की है। सीमांचल से जुड़ी भाजपा की रणनीति की वजह से दोनों पार्टियां आईं साथ अमित शाह कई बार सीमांचल का दौरा कर चुके हैं। यह क्षेत्र नेपाल और बांग्लादेश के नजदीक है। इलाका देश की सुरक्षा से जुड़ा है। केंद्र सरकार ने इलाके की चौकसी बढ़ाई है। एसएसबी का बेस कैंप यहां बनाया जा रहा ताकि घुसपैठियों पर नकेल कसी जा सके। सीमांचल में पूर्णिया, किशनगंज, अररिया और कटिहार आते हैं। यहां मुसलमानों की बड़ी आबादी है। केंद्र सरकार ने जब बिहार में सेना के रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को नया राज्यपाल बनाया तो यह चर्चा उठी कि सरकार सीमांचल के इलाकों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित राज्य बनाना चाहती है। इससे मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति करने वाली पार्टियों के माथे पर शिकन आना स्वाभाविक है। ये एक बड़ी वजह है कि आरजेडी और एआईएमआईएम नजदीक आए हैं। AIMIM और RJD के विचार एक, एनडीए में दिख रही बेचैनी आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा, ‘राजद के उम्मीदवार को विपक्ष के 41 विधायकों का समर्थन है। एनडीए में बेचैनी दिख रही है। हमारी सोच यह है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत और नफरत वाली शक्तियों को समाप्त करेंगे।’ मुस्लिम वोट के बंटने और असमंजस की स्थिति दूर होगी वरिष्ठ पत्रकार ईशार्दल हक ने कहा, ‘तेजस्वी यादव ने विधानसभा चुनाव 2025 के समय की अपनी रणनीति बदली है। राजद और एआईएमआईएम की नजदीकी बढ़ी है। यह समय की मांग भी है।’ उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी को यह काम विधानसभा चुनाव के वक्त करना चाहिए था। उपमुख्यमंत्री के चेहरा के लिए भी किसी मुस्लिम चेहरे की घोषणा उनको करनी चाहिए थी। तेजस्वी भूल सुधार वाली स्थिति में हैं। इससे मुस्लिम वोटरों के बंटने और असमंजस की स्थिति दूर होगी। फायदा दोनों पार्टियों को होगा।’