बसपा सुप्रीमो मायावती, कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भड़क गई हैं। उन्होंने शनिवार को कहा- जिस कांग्रेस की दलित-विरोधी सोच के चलते बसपा का गठन हुआ, जिसने कांशीराम के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया, अब वही कांग्रेस उन्हें भारत रत्न देने की बात कर रही है। इसलिए कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, शुक्रवार को कांग्रेस ने पहली बार लखनऊ में कांशीराम जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव पास किया गया। तय हुआ है कि राहुल गांधी के माध्यम से संसद में यह मांग उठाई जाएगी। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा था- कांशीराम समाज में बराबरी की बात करते थे। अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। लेकिन आज भाजपा ने समाज को 15 और 85 बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% वालों को मिल रहा है। 50% को अलग-अलग कर दिया गया।
मायावती की बड़ी बातें पढ़िए 1- कांग्रेस ने बाबा साहेब का कभी सम्मान नहीं किया
मायावती ने X पर लिखा- यह सभी जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रही, लेकिन उसने कभी भी दलितों के मसीहा और भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को सम्मान नहीं दिया। न ही उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। ऐसे में सवाल उठता है कि वही कांग्रेस पार्टी अब कांशीराम को भारत रत्न कैसे दे सकती है। 2- कांशीराम के निधन पर कांग्रेस ने राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा- कांशीराम के निधन पर कांग्रेस सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। उस समय उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी, उसने भी कोई राजकीय शोक घोषित नहीं किया। इसी तरह दूसरी पार्टियों के प्रभाव में बने कई दलित संगठन और पार्टियां भी उनके नाम का सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करती रही हैं। 3- पार्टियां हथकंडे अपनाकर बसपा को कमजोर करने में लगीं
मायावती ने कहा- आज अलग-अलग पार्टियां तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर बसपा को कमजोर करने में लगी हैं। इसलिए उनके अनुयायियों और समर्थकों को सतर्क रहने की जरूरत है। 4- कांग्रेस पार्टी से सावधान रहने की जरूरत
बसपा सुप्रीमो ने कहा- हमें कांग्रेस पार्टी से सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि उसकी दलित-विरोधी सोच के कारण ही बीएसपी का गठन करना पड़ा था। मेरी कार्यकर्ताओं से अपील है कि 15 मार्च 2026 को कांशीराम जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों को यूपी सहित पूरे देश में सफल बनाएं। यूपी में दलित वोटर्स की ताकत समझिए यूपी में 21% दलित वोटर हैं। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में 84 एससी के लिए रिजर्व हैं। इसके अलावा 40-50 ऐसी सीटें हैं, जहां दलित 20% से 30% वोटर हैं। मतलब, प्रदेश की 130 सीटों पर दलित निर्णायक असर रखते हैं। दलितों के समर्थन और विरोध में होने से कैसे यूपी की सियासत में बाजी पलट जाती है? इसे समझने के लिए हमें 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के रिजल्ट को देखना होगा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने 84 रिजर्व सीटों में 63 जीत ली थीं। वहीं, सपा को 20 सीटों पर सफलता मिली थी। 1 सीट राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के खाते में गई थी। ———— ये भी पढ़ें- राहुल बोले- मनरेगा में 85% दलित-पिछडे़:15% का ब्यूरोक्रेसी-कॉरपोरेट पर कब्जा; मायावती के वोट बैंक पर नजर लखनऊ में दलित वोट साधने के लिए राहुल गांधी 35 मिनट तक बोले। मुद्दा कांशीराम जयंती का था, लेकिन राहुल के टारगेट पर मोदी सरकार थी। दलितों के सामने राहुल ने कांशीराम से ज्यादा नरेंद्र मोदी का नाम लिया। कहा- नरेंद्र मोदी देश के संविधान की विचारधारा को नहीं मानते। कभी अपोलो जाना, वहां डॉक्टर की नेम प्लेट देखना, कहीं पर 85% (दलित, पिछड़े) नहीं दिखेंगे। बड़ी कंपनियों के CEO में दलित, पिछड़े नहीं मिलेंगे। राहुल आगे कहते हैं- कोर्ट, ब्यूरोक्रेसी, कॉरपोरेट में सिर्फ 15% एलीट क्लास के लोग दिखेंगे। मनरेगा की लिस्ट में 85% दलित, पिछड़े हैं। यही बात कांशीराम अपने पेन मॉडल में कहते थे। कांशीराम कहते थे- वन मैन वर वोट, जितनी आबादी उतनी भागीदारी… लेकिन हकीकत क्या है? देश के संसाधन पर 15% का कब्जा है। कांशीराम इसी तस्वीर को बदलने की लड़ाई लड़ रहे थे, अब ये लड़ाई कांग्रेस लड़ रही है। पढ़ें पूरी खबर…