पंजाब में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। बीएसएफ में ही इंटरनल ऑडिटर पार्टी में तैनात अकाउंटेंट ऑडिटर ने ऑडिट के दौरान जवानों से घूस लेकर रिकवरी लिस्ट से नाम हटाने का खेल खेला। ऑडिटर सुरेंद्र कुमार ने बीएसएफ के हेड कांस्टेबल पूर्ण चंद किसान समेत अन्य जवानों की मिलीभगत से 36 जवानों से कुल 9 लाख 87 हजार 250 रुपए की घूस वसूली। यह रकम प्रस्तावित रिकवरी की 20% थी, जिसके बदले जवानों के नाम रिकवरी लिस्ट से हटा दिए गए। जुलाई, 2025 में सीबीआई के पास मामला पहुंचा और जांच शुरू हुई। करीब 5 महीने की जांच के बाद शुक्रवार देर शाम सीबीआई ने चंडीगढ़ में ऑडिटर सुरेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल पूरन चंद किसान, कांस्टेबल जितेंद्र कुमार, कांस्टेबल बलराम यादव, कांस्टेबल मनोज कुमार, प्राइवेट व्यक्ति अमनदीप सिंह और ऑडिटर सुरेंद्र की पत्नी मीना कुमारी के खिलाफ करप्शन की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। जुलाई 2025 में सीबीआई के पास वीरेंद्र सिंह, कमांडेंट (स्थापना), मुख्यालय आईजी बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर जालंधर पंजाब की ओर से लिखित शिकायत भेजी गई थी। इस तरह बनाया रिश्वत के पैसे इकट्ठे करने का रूट इस मामले की जांच जब सीबीआई ने की तो रिश्वत के पैसे इक्ट्ठे करने का पूरा रूट खंगाला गया। पता चला अकाउंटेंट सुरेंद्र कुमार सहित आंतरिक लेखा परीक्षा दल-24 (आईएपी) की ओर से 6 दिसंबर 2019 से 19 दिसंबर 2022 तक दिसंबर (36 महीने) की अवधि के दौरान एक ऑडिट किया गया था। सुरेंद्र कुमार ने ऑडिट रिकवरी को खत्म करने के लिए यूनिट कर्मियों के नाम रिकवरी सूची से हटाने के बदले प्रस्तावित वसूली राशि का 20% खर्चा-पानी मांगा। हेड कांस्टेबल किसान ने 36 लोगों से 9.87 लाख 250 रुपए इकट्ठा किए। ऑडिटर ही मास्टरमाइंड… खुद बनाई लिस्ट, खुद ही शुरू किया नाम हटाने का सौदा सीबीआई को रिश्वत के मामले में भेजी गई शिकायत से पहले बीएसएफ ने अपने स्तर पर भी एक डिपार्टमेंटल स्टाफ कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की थी। इस विभागीय जांच में सामने आया कि बीएसएफ में तैनात काफी जवानों पर विभिन्न प्रकार की रिकवरी बकाया थी। रिकवरी के लिए ऑडिट किया गया था। ऑडिट टीम में शामिल अकाउंटेंट सुरेंद्र कुमार ने प्रस्तावित रिकवरी की लिस्ट बनाई। इसके बाद सुरेंद्र ने इन जवानों से रिकवरी लिस्ट से नाम निकालने के लिए रिश्वत का खेल शुरू किया। इस खेल में उसने अपने साथ हेड कांस्टेबल पूरन चंद किसान को जोड़ा। इसके बाद पूरन चंद ने सुरेंद्र की ओर से दी गई लिस्ट में शामिल नाम वाले जवानों से मुलाकात की और रिश्वत मांगनी शुरू की। डिपार्टमेंटल स्टाफ कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट में भी इसका जिक्र किया गया है। इसलिए सीबीआई जांच में अब उन 36 जवानों से भी पूछताछ करेगी जिन्होंने रिकवरी लिस्ट से अपना नाम निकलवाने के लिए अकाउंटेंट व उसके साथी पूरन चंद को बैंक खातें में ट्रांसफर या कैश के जरिए रिश्वत के पैसे दिए हैं। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि सभी आरोपी पब्लिक सर्वेंट्स के खिलाफ पीसी एक्ट की धारा 17ए के तहत परमिशन पहले ही ली जा चुकी है।