रेवाड़ी में मंगलवार को संजारपुर-टांकडी रोड पर स्कूल बस और कार की टक्कर ने पुलिस प्रशासन को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया। अक्सर हादसे के बाद हरकत में आने वाले अधिकारियों का वहीं रटा-दटाया जवाब आया। अधिकारियों ने कहा कि नियमित रूप से स्कूल बसों की जांच होती है। खामी पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाती है। कार्रवाई के साथ शिक्षण संस्थाओं में जाकर ड्राइवर-कंडक्टरों को जागरूक किया जाता है। स्कूल मैनेजमेंट को स्कूलों बसों के संचालक में नियमों का पालन करने की हिदायत दी जाती है। हर माह तीन-चार स्कूलों में करते हैं जांच एसडीएम रेवाड़ी एवं आरटीए सुरेश कुमार ने कहा कि जनवरी माह में सड़क सुरक्षा अभियान के तहत स्कूलों में जांच और जारूकता अभियान चलाया था। हर माह तीन से चार स्कूलों में बसों की जांच की जाती है। जांच के दौरान खामी पाए जाने पर चालान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को भी नियमित रूप से स्कूल बसों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। समय-समय पर करते हैं बसों की जांच एसएचओ ट्रैफिक ताराचंद ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस समय समय पर स्कूल बसों की जांच करती है। जांच के दौरान जिन बसों में खामी पाई जाती है, उनके चालान किए जाते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में जाकर भी जागरूक किया जाता है। रोड पर खाली दिखाई देने वाली बसों के ड्राइवरों को विशेष हिदायत दी जाती हैं। दो की मौत, दर्जन से अधिक घायल बता दें कि, मंगलवार को संजारपुर-टांकड़ी रोड पर स्कूल बस और कार की टक्कर में कार सवार जेतड़वास निवासी दो दोस्तों जितेंद्र और सचिन की मौत हो गई थी। हादसे में बस में सवार एक दर्जन से अधिक बच्चों को भी चोटें आई थी। सूचना के बाद बावल थाना पुलिस मौके पर पहुंची थी। प्रशासन के साथ मिलकर करते हैं काम
आरएसओ रमेश वशिष्ठ ने बताया कि जिले में आरएसओ के सदस्य भी समय समय पर प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर काम करता है। हादसे के बाद उठे थे सवाल प्रदेश के किसी न किसी कोने में अक्सर स्कूल बस हादसे का शिकार होती रहती है। अप्रैल 2024 में महेंद्रगढ़ में उन्हानी के पास हुए हादसे के बाद स्कूल बसें सबसे अधिक चर्चा में आई थी। हादसे के बाद हरकत में आई प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश जारी किए। मुख्यमंत्री नायब सैनी के अलावा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री ने शोक जताया था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री सीमा त्रिखा शिक्षामंत्री ने स्कूल की मान्यता रद करने और परिवहन मंत्री आसीम गोयल ने बसों की जांच करने के आदेश दिए थे। इस हादसे में छह बच्चों की मौत हो गई थी और दर्जनों बच्चे घायल हो गए थे। इससे पहले हो चुके यह हादसे
इससे पहले गत वर्ष अक्टूबर में धारूहेड़ा क्षेत्र में स्कूल बस सड़क किनारे खड़े बिजली के खंभे से टकरा गई थी। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख पुकार मच गई थी। उस समय बस में सवार किसी को गंभीर चोटें नहीं आई थी। इससे पहले जनवरी 2023 में गोलियाकी गांव के पास नहर पुल पर स्कूल बस दुर्घनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे के समय बस में करीब 40 बच्चे सवार थे और किसी को गंभीर चोटें नहीं आई थी।