साल 2009, मई का महीना, लोकसभा का रिजल्ट आ रहा था। हाजीपुर से चुनाव लड़ रहे रामविलास पासवान पिछड़ने लगे। पूरे बिहार की नजरें इस सीट पर थीं। दोपहर के वक्त जब काउंटिंग रुकी तो पासवान चुनाव हार चुके थे। वहीं, लालू यादव छपरा से चुनाव जीत गए थे। UPA को केंद्र में सरकार बनाने की हैसियत मिली थी। पासवान के सामने सिर्फ चुनाव हारने का गम नहीं था। 2 दशक से जिस 12 जनपथ रोड वाले आवास में रह रहे थे उसे खाली करने की चिंता सताए जा रही थी। कुछ वक्त बीता और लालू यादव पासवान के लिए सहारा बने। बंगला बचाने की खातिर पासवान को राज्यसभा भेज दिया। यह कहानी दोस्ती और बंगले दोनों की है। अब नई कहानी सुनिए। 25 नवंबर की शाम लालू यादव के एक और साथी रहे नीतीश कुमार ने राबड़ी देवी को नया घर दे दिया। मतलब, बिना कुछ कहे बता दिया कि अब आपको 10 सर्कुलर वाले आवास से जाना होगा। सूत्रों के मुताबिक जैसे ही यह खबर आई, लालू के करीबियों ने उन्हें नीतीश कुमार से बात करने की सलाह दी। इस पर लालू बोले, ‘हमको बात नहीं करनी, जब उनको शर्म नहीं बची तो मैं क्यों फोन करूं।’ अब पढ़िए 4 नेताओं के 4 बंगले की कहानी 1- लालू की मदद से बचा रामविलास का बंगला रामविलास को 1990 में केंद्रीय मंत्री बनने के बाद दिल्ली के 12 जनपथ बंगला मिला था। 2009 में चुनाव हारने के बाद नौबत घर खाली करने की थी। रामविलास बंगला बचाने के लिए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के पास पहुंचे। उस समय लालू ने उनकी मदद की थी। अपने विधायकों की मदद से रामविलास को राज्यसभा भेज दिया। पासवान न केवल राज्यसभा पहुंचे, बल्कि दिल्ली में अपना पसंदीदा आशियाना भी बचा लिया। उनके निधन के बाद 2022 में चिराग पासवान को यह बंगला खाली करना पड़ा। चिराग की लाख कोशिशों के बाद भी बंगला से रामविलास से जुड़ी निशानियों को मिटा दिया गया। 2- अब बात 2025 की, राबड़ी देवी को मिला नया घर बिहार में प्रचंड बहुमत के साथ NDA की सरकार बनी है। सरकार ने राजद सुप्रीमो को उस घर से बाहर निकालने का फैसला किया है जहां से वह पिछले 20 साल से सियासत कर रहे हैं। 10 सर्कुलर रोड लालू परिवार के लिए केवल एक बंगला नहीं, बल्कि राजद की सियासत का पावर सेंटर भी है। यह बंगला फिलहाल राबड़ी देवी को विधान परिषद में विपक्ष की नेता की हैसियत से मिला हुआ है। सरकार ने अब उन्हें 39 हार्डिंग रोड का बंगला अलॉट किया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी राबड़ी देवी को बंगला खाली करने का नोटिस नहीं दिया गया है। नया बंगला अलॉट किए जाने के बाद तय माना जा रहा है कि उन्हें जल्द 10 सर्कुलर रोड वाला घर खाली करना होगा। लालू बंगला छोड़ने को तैयार, CM से नहीं मांगेंगे मदद राजद के कई नेता खुलेआम बोल रहे हैं कि बंगला खाली नहीं करेंगे। वहीं, राबड़ी आवास से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि लालू यादव से कहा गया था कि वे घर को लेकर सीएम नीतीश कुमार से बात करें। लालू ने ऐसा करने से इनकार कर दिया है। लालू ने साफ कहा, ’किसी से बात करने की जरूरत नहीं। अगर सरकार चाहती है तो बंगला खाली कर दूंगा।’ 10 सर्कुलर रोड: यहीं से लालू के बच्चों का करियर शुरू हुआ कभी वेटनरी कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाले लालू यादव पटना के लुटियंस कहे जाने वाले सर्कुलर रोड के बंगलों में 1990 में पहुंचे। 1990 से 2005 तक उनका ठिकाना एक अणे मार्ग यानि CM हाउस रहा। 2005 में जब उनकी सत्ता गई तो CM हाउस के ठीक पीछे 10 सर्कुलर रोड बतौर पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से राबड़ी देवी को मिला। 2017 में जब हाईकोर्ट ने पूर्व CM के आवास की व्यवस्था रद्द की तो सरकार ने 10 सर्कुलर रोड को विधान परिषद में विपक्ष की नेता होने के नाते राबड़ी को आवंटित किया। यह घर लालू यादव के लिए कई लिहाज से खास है। अपनी सियासत की ढलान पर जब लालू यादव इस बंगले में आए तो यहीं से उनके दोनों बेटों का राजनीतिक करियर शुरू हुआ। विधायक से लेकर मंत्री और डिप्टी सीएम तक का सफर उन्होंने यहीं से तय किया। उनके दोनों बेटों समेत 3 बेटियों की शादी इसी बंगले में रहते समय हुई। लालू परिवार की ऐसी कई यादें इस बंगले से जुड़ी हैं। यही कारण है कि राजद नेता इस बंगले को नहीं छोड़ना चाहते। 3- देश रत्न मार्ग, इसके लिए तेजस्वी हाईकोर्ट तक लड़े, सम्राट ने दोष दूर किया बिहार की सियासत में 2015 के बाद जो बंगला सत्ता के गलियारे के सबसे पावरफुल बंगले के रूप में उभरा वो है 5 देश रत्न मार्ग। 2015 में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद इसे डिप्टी सीएम के बंगले के रूप में आवंटित किया गया। उस समय तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम थे। उनके रहने आने से पहले बंगले की सजावट में करोड़ों रुपए खर्च किए गए। स्पेन के ग्रेनाइट और जयपुर के झूमर मंगाकर लगाए गए। तेजस्वी के लिए बंगले को 5 स्टार होटल की तरह तैयार किया गया, लेकिन यह उनके लिए अनलकी साबित हुआ। 2.5 साल के भीतर ही उनकी सरकार गिर गई। सरकार गिरते ही उन्हें बंगला खाली करने का नोटिस थमा दिया गया, लेकिन तेजस्वी बंगला छोड़ने को तैयार नहीं थे। वे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन हर जगह हार मिली। उन्हें जुर्माने के साथ बंगला खाली करना पड़ा। तेजस्वी के बाद सुशील मोदी और तारकिशोर प्रसाद को ये आवास मिला, लेकिन कोई अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया। 2024 में डिप्टी CM बनने के बाद सम्राट चौधरी ने बंगले में कई बदलाव कराए। एक दरवाजे को हमेशा के लिए बंद कराया। चुनाव बाद एक बार फिर से वे डिप्टी CM बने हैं। उन्हें यही आवास आवंटित किया गया है। कहा जा रहा है कि उन्होंने इस आवास के सारे दोष दूर कर दिए हैं। 4- 6 स्ट्रैंड रोड, यहां जो भी रहे बर्बाद हुए, सहनी शिखर से शून्य तक पहुंचे बिहार के पावर सेंटर के बीच जिस बंगले को सबसे मनहूस माना जाता है, वो है 6M स्ट्रैंड रोड। कहा जाता है यहां रहने वाले कोई नेता आगे नहीं बढ़े, जो रहे बर्बाद हुए। पिछले 12-15 साल में जिस मंत्री को ये बंगला मिला, उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। 2010 में यह बंगला जदयू कोटे से उत्पाद विभाग के मंत्री बने अवधेश कुशवाहा को दिया गया था। वे इसी बंगले में रिश्वत लेते पकड़े गए। इस्तीफा देना पड़ा। 2015 में ये बंगला राजद-जदयू की सरकार में सहकारिता मंत्री आलोक मेहता को मिला। उनके मंत्री बने डेढ़ साल भी नहीं हुए कि सरकार चली गई। नीतीश कुमार बीजेपी के समर्थन से सीएम बने और आलोक मेहता का मंत्री पद चला गया। 2017 में यह बंगला मंजू वर्मा को मिला। वह मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड फंस गईं। उन्हें न केवल इस्तीफा देना पड़ा बल्कि उनका पूरा करियर तबाह हो गया। 2020 में इस बंगले में मुकेश सहनी पूरे ताम-झाम के साथ आए थे। वह न केवल यहां रहे, बल्कि लाखों रुपए खर्च कर बंगले को मॉडिफाई कराया। इसे अपनी पार्टी का हेडक्वार्टर बनाया। वे ढाई साल तक भी मंत्री नहीं रह सके। पहले उनकी पार्टी के तीनों विधायक भाजपा में चले गए। इसके बाद उनका मंत्री और MLC पद भी चला गया। जब वे बंगला में गए तो अपनी राजनीति के शिखर पर थे, निकले तो एक बार फिर से शून्य थे। बंगला खाली करने के लिए विभाग को नोटिस देना पड़ा था मंत्री और MLC पद गंवाने के बाद भी मुकेश बंगला छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। भवन निर्माण विभाग को बंगला खाली कराने में काफी मशक्कत करानी पड़ी। दूसरी नोटिस के बाद उन्होंने इस बंगले को खाली किया था। मुकेश सहनी के बाद सरकार ने नेता की जगह एक IAS को ये बंगला अलॉट किया। वे भी यहां एक साल तक नहीं रह पाए। बंगला पिछले 7-8 महीने से खाली पड़ा है। यहां कोई जाना नहीं चाहता।