लुधियाना की विशेष NDPS अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला:अंतरराज्यीय ड्रग तस्कर को 10 साल की सजा,1 लाख जुर्माना

पंजाब में नशे के खिलाफ छेड़ी गई जंग में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट को एक बड़ी और अहम कामयाबी हाथ लगी है। लुधियाना की विशेष NDPS अदालत ने 23 फरवरी 2026 को एक अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क के सक्रिय तस्कर अजीत सिंह को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास (RI) और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला नशा तस्करों के लिए एक कड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। क्या था पूरा मामला मामला 20 फरवरी 2018 का है। NCB को एक गुप्त सूत्र से सूचना मिली कि लुधियाना में बड़े पैमाने पर चरस की खेप पहुंचाई जा रही है। सूचना मिलते ही NCB की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जाल बिछाया और जम्मू-कश्मीर के कठुआ निवासी अजीत सिंह को मौके पर ही दबोच लिया। उसके कब्जे से 2.840 किलोग्राम चरस बरामद हुई।अजीत सिंह से कड़ी पूछताछ के बाद सुराग मिला कि उसका एक और साथी शहर में ही मौजूद है। टीम ने तुरंत लुधियाना के लकी होटल में छापा मारा और वहां से श्याम लाल (निवासी कठुआ) को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से 1.175 किलोग्राम चरस बरामद हुई। इस तरह एक ही दिन में NCB ने पूरे 4 किलोग्राम से अधिक चरस जब्त कर अंतरराज्यीय तस्करी के इस नेटवर्क की कमर तोड़ दी। 8 साल चला मुकदमा NCB ने अगस्त 2018 में दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद मुकदमा अपनी गति से चलता रहा, लेकिन इस बीच एक बड़ा मोड़ आया। आरोपी श्याम लाल की 20 नवंबर 2025 को मृत्यु हो गई जिसके चलते अदालत ने उसके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को समाप्त कर दिया। हालांकि अजीत सिंह के खिलाफ मुकदमा जारी रहा और NCB की पुख्ता जांच व ठोस सबूतों के आधार पर 23 फरवरी 2026 को माननीय NDPS कोर्ट ने उसे दोषी पाते हुए 10 साल की बामशक्कत कैद और 1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। NCB बोली यह सिर्फ शुरुआत है NCB की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने इस फैसले को नशे के खिलाफ जंग में एक मील का पत्थर बताया है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्रग नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकने तक यह अभियान जारी रहेगा और किसी भी तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा चाहे वह किसी भी राज्य से संबंध रखता हो। NCB ने आम जनता से अपील की है कि अगर आपके आसपास कहीं भी नशीले पदार्थों की तस्करी या बिक्री की जानकारी मिले तो बिना देर किए ‘मानस’ (MANAS) नेशनल हेल्पलाइन पर सूचित करें। आपकी एक कॉल किसी की जिंदगी बचा सकती है।
📞 टोल-फ्री नंबर: 1933 (24 घंटे, 7 दिन उपलब्ध — पहचान पूरी तरह गोपनीय)

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