लुधियाना के गोल्डन ऑटो में पंजाबी गाने की शूटिंग:सिंगर गैरी संधू-हरियाणवी मॉडल प्रांजल ने गाया VIP-VIP; मेंटेनेंस खर्च ₹10 हजार

लुधियाना में गोल्डन ऑटो सुर्खियों में है। दुगरी के रहने वाले अवतार सिंह के गोल्डन ऑटो की डिमांड पंजाबी म्युजिक इंडस्ट्री में भी बढ़ने लगी है। हाल ही में पंजाबी सिंगर गैरी संधू व हरियाणवी मॉडल प्रांजल दहिया भी अवतार सिंह के ऑटो पर बैठे। उन्होंने इस गोल्डन ऑटो पर अपने VIP सॉन्ग की शूटिंग की। गैरी संधू व प्रांजल दहिया का यह गीत फैंस को पसंद आ रहा है। अवतार सिंह का कहना है कि इस गाने में आने के कारण उनका गोल्डन ऑटो फेमस हो गया। इस गाने के बोल हैं बैठ जा मेरी गाड़ी में, छोटी नहीं बड़ी में। जहां आमतौर पर ऐसे गानों में महंगी लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल होता है वहीं डायरेक्टर ने अवतार सिंह के गोल्डन ऑटो को प्राथमिकता दी। पूरे गाने में गैरी संधू और प्रांजल दहिया इसी ऑटो में सवार नजर आ रहे हैं। कौन है अवतार सिंह
अवतार सिंह के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे हैं। अवतार सिंह काफी समय से ऑटो चला रहे हैं। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक ड्राइवर की नहीं है। वे ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े हैं और मेडिटेशन (ध्यान) में गहरी रुचि रखते हैं। वे खाली समय में समाज सेवा भी करते हैं। कैसे मिला शूटिंग का ऑफर
अवतार सिंह ने बताया कि गाने की टीम उनके घर तक पहुंच गई थी। टीम ने लोगों से पूछ-पूछकर उनका घर ढूंढा और ऑटो को गाने में लेने की इच्छा जताई। पहले मना कर दिया था, क्योंकि ऑटो पुराना था और उन्हें लगा कि यह मोहाली तक नहीं जा पाएगा। घरवालों के समझाने पर वे दोपहर 4 बजे मोहाली के लिए निकले। रात भर शूटिंग हुई और अगली सुबह वे वापस लौटे। गोल्डन ऑटो के पीछे की कहानी
अवतार सिंह के मन में इसे गोल्डन बनाने का विचार मेडिटेशन के दौरान आया। उन्होंने बताया ब्रह्माकुमारी में उन्होंने पढ़ा कि पुरानी दुनिया जा रही है और गोल्डन दुनिया आने वाली है। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने ऑटो को सुनहरा रंग देना शुरू किया। शुरुआत में लोगों ने उन्हें पागल कहकर ताने दिए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पूरा ऑटो गोल्डन कर दिया। फिर धीरे-धीरे लोग उनके साथ फोटो खिंचवाने लगे। यहां तक कि पुलिस वाले भी चालान काटने के बजाय उनके ऑटो के साथ सेल्फी लेते हैं। कपड़ा बदलने में 10 हजार रुपए खर्चा आता है
वे पिछले 4 साल से इस गोल्डन ऑटो को चला रहे हैं। इसे चमकाने के लिए वे खास तरह के सुनहरे कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। 8 महीने में धूल और बारिश के कारण कपड़ा खराब हो जाता है, जिसे बदलने में करीब 10 हजार रुपए का खर्च आता है। जिसे वहां खुद अपने हाथों से तैयार करते हैं।

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