पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ मुहिम के तहत जिले के 23 सरकारी स्कूलों में एक बार फिर भव्य उद्घाटन कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। हालांकि, सरकार के इस कदम ने शिक्षकों के बीच विवाद खड़ा कर दिया है। शिक्षक यूनियनों का कहना है कि शिक्षा में असली क्रांति समारोह आयोजित करने से नहीं, बल्कि खाली पड़े शिक्षकों और प्रिंसिपलों के पदों को भरने से आएगी। जिला शिक्षा विभाग द्वारा बुधवार को जारी पत्र के अनुसार, ब्लॉक नोडल अधिकारियों, ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारियों और संबंधित स्कूल प्रमुखों को मेरिटोरियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इस दौरान ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ और अन्य संस्थानों का उद्घाटन किया जाएगा। इन 23 स्कूलों में 8 सेकेंडरी, 6 प्राइमरी, 3 मिडिल और 6 सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। टीचर यूनियनों ने मरम्मत और बुनियादी ढांचे के कामों के उद्घाटन पर सवाल उठाए हैं। “बुनियादी ढांचा सुधारना रूटीन काम, इवेंट की क्या जरूरत?”
लेक्चरर कैडर यूनियन के जिला अध्यक्ष धर्मजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि ये उद्घाटन पहले भी गैर-जरूरी थे और अब भी हैं। स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम एक नियमित प्रक्रिया है, इसके लिए हर बार विशेष लॉन्च इवेंट की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अकेला फीता काटने से सुधार नहीं होगा। असली शिक्षा क्रांति तब होगी जब स्कूलों में स्टाफ की कमी नहीं होगी। स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की जाए। वही छात्रों के लिए वास्तविक लाभ होगा। खर्चों की भरपाई के लिए स्कूलों को करना पड़ता है इंतजार
शिक्षकों ने कड़वा अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले साल हुए उद्घाटन कार्यक्रमों के खर्च का पैसा (Reimbursement) सरकार से मिलने में काफी समय लग गया था, जो हाल ही में क्लियर हुआ है। अब सरकार ने फिर से स्कूलों को उसी तर्ज पर इंतजाम करने को कहा है। सरकार द्वारा तय बजट: सीनियर सेकेंडरी स्कूल: 20,000 सेकेंडरी स्कूल: 10,000 प्राइमरी स्कूल: 5,000 इस मामले में पक्ष जानने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डिंपल मदान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थीं।