लुधियाना में जनपथ के डायरेक्टर्स सहित 13 पर FIR:कोर्ट के आदेश पर केस हुआ दर्ज, 11 कनाल 8 मरला जमीन का बेचने का मामला

लुधियाना में कंपनी की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनाकर बेचने के मामले में पुलिस ने 13 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई स्थानीय अदालत के आदेश के बाद की गई। मामला जनपथ एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। पुलिस थाना PAU में दर्ज FIR के अनुसार कंपनी के डायरेक्टर महेश गोयल ने शिकायत दी थी कि कंपनी के कुछ डायरेक्टर्स और उनके सहयोगियों ने साजिश रचकर उनकी हिस्सेदारी वाली जमीन हड़पने की कोशिश की। सिधवां नहर के पास 11 कनाल 8 मरला जमीन का मामला
शिकायत के मुताबिक गांव झम्मट में सिधवां नहर के पास 11 कनाल 8 मरला की प्राइम जमीन कंपनी ने रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए खरीदी थी। कंपनी के सभी डायरेक्टरों ने इसमें बराबर निवेश किया था। महेश गोयल का आरोप है कि पवन कुमार गोयल और विनय सिंघल ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 10 अप्रैल 2023 की एक फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन तैयार की। यह रेजोल्यूशन बिना किसी वैध बोर्ड मीटिंग और उनकी सहमति के बनाई गई। फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर जमीन बेचने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने 31 जनवरी 2025 और 4 फरवरी 2025 की तारीख में कथित तौर पर फर्जी अथॉरिटी लेटर और जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की। इन दस्तावेजों के आधार पर आरोपी प्रदीप अग्रवाल को कंपनी की जमीन बेचने का अधिकार दिखाया गया।
इसके बाद प्रदीप अग्रवाल ने कथित तौर पर कई लोगों के साथ जमीन बेचने के एग्रीमेंट कर दिए। 2021 की बैक डेट में बनाए गए एग्रीमेंट
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन के एग्रीमेंट 30 नवंबर 2021 की बैक डेट में तैयार किए गए। ये एग्रीमेंट ऐसे स्टांप पेपर पर प्रिंट किए गए थे जो 2020 में फरीदकोट जिले के लिए जारी हुए थे, जबकि जमीन लुधियाना की है। इससे दस्तावेज फर्जी होने का शक जताया गया है। शिकायत में जिन लोगों को खरीदार बताया गया है उनमें राजेश कुमार, चमन लाल, सलील गोयल, राकेश गोयल, खुशबू बंसल, कंचन बंसल, विवेक गोयल, रविंदर कुमार जैन और अमिता जैन शामिल हैं। विरोध करने पर धमकी देने का आरोप
महेश गोयल ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इन दस्तावेजों को रद्द करने की मांग की तो आरोपियों ने उन्हें धमकी दी और जमीन की प्रकृति बदलने के लिए निर्माण शुरू करने की कोशिश की।
उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में भी पुलिस को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। अदालत ने जांच के आदेश दिए
अदालत ने शिकायत और पुलिस की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद माना कि मामले में प्रथम दृष्टया जालसाजी, कंपनी रिकॉर्ड में हेरफेर और धोखाधड़ी के आरोप बनते हैं। अदालत ने कहा कि मामले में कंपनी रिकॉर्ड, स्टांप पेपर की सत्यता और विवादित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच जरूरी है।
इसके बाद अदालत ने थाना PAU के SHO को FIR दर्ज कर विस्तृत जांच करने के आदेश दिए। कई धाराओं में केस दर्ज
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 335, 336(1), 336(2), 338, 339, 340(2), 344, 351(2) और 351(3) के तहत केस दर्ज किया है। थाना PAU के SHO सब-इंस्पेक्टर राजिंदर सिंह ने मीडिया को बताया कि अदालत के आदेश के बाद FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब विवादित दस्तावेजों की जांच करेगी और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।

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