लुधियाना के किला रायपुर ग्रामीण ओलिंपिक में 11 साल बाद बैलगाड़ियों की दौड़ फिर शुरू हुई है। इस दौड़ में हिस्सा लेने वाले बैलों की डाइट खास है। एक-एक बैल रोजाना 2000 से 2500 रुपए की डाइट ले लेता है। बैल के खून में गर्मी बनी रहे, इसके लिए डाइट के साथ उसकी मालिश और सैर करवानी पड़ती है। इसी दौड़ में बुलाड़ा गांव का मनरीत अपने राष्ट्रपति और जुगुनू को लेकर पहुंचा। राष्ट्रपति व जुगुनू मनरीत के बैलों के नाम हैं। इन दोनों की रोजाना डाइट का खर्च 4500 से 5000 रुपए है। रोज एक बैल को 5 से 6 लीटर दूध पिलाना पड़ता है। इसके साथ काजू-बादाम भी खिलाए जाते हैं। मनरीत ने कहा कि बैलों की सिर्फ डाइट का ही खर्च नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल के लिए रोजाना पांच से छह घंटे लगाने पड़ते हैं। बैलों की रोज डेढ़ से दो घंटे मालिश करनी पड़ती है और 2 से 3 घंटे उन्हें सैर करवानी पड़ती है, तब जाकर बैल दौड़ के लायक फिट होते हैं। मनरीत ने कहा कि 11 साल बैलों की दौड़ बैन रही, लेकिन फिर भी वह बैल पालते रहे। जो बैल वह अब रेस में लेकर आए हैं, उनकी उम्र 5-5 साल है और तीन साल से वो उन्हें पाल रहे हैं। उनकी कीमत 20 से 22 लाख रुपए है। बैलों को क्या डाइट दी जाती है… मनरीत कैसे करते हैं बैलों की देखभाल… डाइट का बड़ा हिस्सा घर में ही होता है तैयार मनरीत सिंह का कहना है कि एक बैल की डाइट रोजाना 2000 से 2500 रुपए तक है। डाइट का बड़ा हिस्सा घर में ही तैयार हो जाता है, जिसकी वजह से बैलों को पालने में आसानी रहती है। खेती के साथ परिवार करता है गायों का व्यापार मनरीत ने बताया कि उनका परिवार खेती के साथ साथ डेयरी का काम भी करता है। इसके अलावा उनका मुख्य काम गायों का व्यापार है। वो अलग-अलग राज्यों से गाय लाकर पंजाब के अलग-अलग पशु पालकों को देते हैं। बैल पालना उनका पुश्तैनी शौक है। उनके पिता बैलगाड़ियों की दौड़ में ट्रैक्टर, मोटर साइकिल व लाखों के इनाम पहले जीत चुके हैं। अब ग्राफिक्स में पढ़िए क्यों लगा बैन और फिर कैसे हटा…