‘उत्तर जो मिला है, उससे मैं पूर्णतया (पूरी तरह से) संतुष्ट नहीं हूं। क्योंकि उत्तर में लिखा है कि भवन जर्जर स्थिति में नहीं है, बस उसकी मरम्मत की जरूरत है। मैं चाहती हूं कि मंत्री जी इसका एक बार फिर से अवलोकन कराएं। मैं खुद देखकर आई हूं, भवन जर्जर स्थिति में है। एक छोटे से कमरे में स्वास्थ्य व्यवस्था का संचालन हो रहा है। MBBS डॉक्टर नहीं हैं। वहां डॉक्टर की जरूरत है।’ बिहार विधानसभा के बजट सत्र में सरकार के जवाब से नाराजगी के ये भाव बिहार की जेन जी विधायक मैथिली ठाकुर का है। सबसे युवा विधायक ने भरी सदन में हेल्थ मिनिस्टर को दो टूक कह दिया कि हॉस्पिटल जाकर देखिए, सच्चाई क्या है। मामला केवल मैथिली तक ही सीमित नहीं है। कई बार सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने ही सरकार से तीखे सवाल किए। मतलब, सत्ता पक्ष के सदस्य, विपक्ष जैसी भूमिका में नजर आए। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, क्यों सत्ताधारी दल के दिग्गज विधायक सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं? कैसे अलग-अलग मुद्दों पर घेर रहे? क्यों सरकार सही जवाब नहीं दे पा रही? सत्ता पक्ष के विधायक ही विपक्ष की तरह दिखाई दे रहे… सीन 1. कोमल सिंह ने अपने सवाल से गिनाई श्रेयसी सिंह की नाकामी 3 फरवरी को मुजफ्फरपुर के गायघाट से पहली बार विधायक बनी जदयू की कोमल सिंह ने सरकार से स्टेडियम को लेकर सवाल पूछा। वह खेल विभाग द्वारा दिए गए जवाब से संतुष्ट नहीं थी। कोमल ने अपने तीखे तेवर से सरकार को सदन में घेरने की कोशिश की। उन्होंने जारंग और अथवारा पंचायत में स्टेडियम निर्माण को लेकर खेल मंत्री श्रेयसी सिंह द्वारा दिए गए जवाब को झूठा बताया। कहा कि वहां सिर्फ स्कूल की फील्ड है, कोई स्टेडियम नहीं है। न बैठने की व्यवस्था है, न चेंजिंग रूम और न टॉयलेट है। श्रेयसी सिंह ने जवाब दिया था कि 2021 में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से स्टेडियम का निर्माण किया गया है। इसपर विधायक कोमल सिंह ने कहा… उन्होंने मंत्री से मांग की कि उच्चस्तरीय जांच कराकर वहां स्टेडियम निर्माण कराया जाए। इसके बाद खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने जवाब दिया, ‘उक्त स्थान पर फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण किया गया था।’ सीन 2. माननीय के इलाज के मुद्दे पर मंत्री पर बिफरा सत्ता पक्ष 6 फरवरी को बड़हरा से बीजेपी के विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह ने स्वास्थ्य मंत्री से विधायकों और रिटायर्ड कर्मियों के कैशलेस इलाज के संबंध में सवाल पूछा था। प्रभारी मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी की तरफ से स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण उन्होंने तंज कसा कि स्वास्थ्य मंत्री यहां नहीं हैं। प्रभारी मंत्री सही से जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इसके बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने राघवेंद्र प्रताप के सवालों का जवाब दिया। सम्राट चौधरी ने कहा, ‘कर्मचारियों को स्वास्थ्य व्यवस्था में कैशलेस सुविधा नहीं दी जा रही है। रीइंबर्समेंट की व्यवस्था है। बिहार की ये व्यवस्था बेहतर है।’ इस पर जाले विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि दिल्ली एम्स का रिसिप्ट रहने के बाद भी रीइंबर्समेंट नहीं किया जाता है। सदस्यों को परेशान किया जाता है। इसके बाद सम्राट चौधरी ने कहा, ‘जल्द कैशलेस सुविधा मिलेगी।’ आखिर में स्पीकर ने कहा ‘एक सप्ताह के अंदर बैठक बुलाकर यह प्रस्ताव लाया जाए कि विधायक को कैशलेस सुविधा दी जाएगी।’ सीन-3 नीतीश मिश्रा ने मंत्री को हंसी का पात्र बनाया 6 फरवरी को भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा ने सदन में CHC का मुद्दा उठाया। सवाल किया, ‘सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर (भवन) तो बना दिया है, लेकिन डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी क्यों है?’
इस पर प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद नीतीश मिश्रा ने तंज कसते हुए पूछा…, प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री ने जवाब दिया, ‘अगले वित्तीय वर्ष में जो भी कमियां हैं, उन्हें पूरा कर लिया जाएगा।’ मंत्री के जवाब देने के दौरान अंग्रेजी के शब्द पढ़ने में फंस गए। इसके चलते सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने ठहाके लगाए। इस मंत्री पूरी तरह असहज हो गए। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘2025 में पोस्ट स्वीकृत हुआ है, जल्द नियुक्ति होगी।’ सम्राट चौधरी के हस्तक्षेप के बाद नीतीश मिश्रा शांत हो गए। सीन-4ः जीवेश मिश्रा ने उजागर की अपनी ही सरकार की सुस्ती 9 फरवरी को जाले से भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने सवाल पूछा, ’2023 में स्वीकृत होने के बाद भी सिंघवाड़ा और जाले थानों में महिला सिपाहियों के लिए बैरक का निर्माण 3 साल बाद भी नहीं हो सका है। 3 साल में 10 कमरों का बैरक तक नहीं बना। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ क्या सरकार को कार्रवाई नहीं करनी चाहिए? गृह विभाग ने जवाब दिया, ‘वहां का थाना भवन जर्जर नहीं है।’ इसके बाद जीवेश मिश्रा ने कहा, ’सरकार के अधिकारी गैर जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं। इन्हें इस बात की भी शर्म नहीं है कि जाले और सिंघवाड़ा थाना में विजिटर रूम की स्वीकृति दी गई थी। 3 साल के बाद भी नहीं बनवा पाए।’ जीवेश मिश्रा ने कहा, ’ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (BDO और CO) को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। उनके पास रहने के लिए जर्जर या कोई आवास नहीं है।’ आखिर में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सदन को आश्वासन दिया। सीन-5. कबड्डी विश्वकप पर मिथिलेश तिवारी ने श्रेयसी सिंह को घेरा 10 फरवरी को बैकुंठपुर से बीजेपी विधायक मिथिलेश तिवारी ने पटना में कबड्डी विश्वकप आयोजित करने, इसके रद्द होने और इसके बाद भी MOU होने के संबंध में सवाल पूछा। इस पर खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने जवाब दिया, ‘कबड्डी महासंघ पर गंभीर आरोप लगे हैं। इनका मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इसके कारण हमलोगों ने बिहार में कबड्डी विश्वकप रद्द कर दिया।’ इस पर मिथिलेश तिवारी ने पूछा.. मिथिलेश तिवारी के एक के बाद एक पूरक प्रश्न पूछने से मंत्री असहज हो गईं। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को ही कैबिनेट थी और 4 फरवरी को ही सुप्रीम कोर्ट का भी फैसला आया था। मामला आगे बढ़ता इससे पहले स्पीकर ने मंत्री से कहा कि जांच करवा लीजिए। मंत्री ने भी अपनी सहमति दे दी। सीन 6. सांप पालतू या जंगली जानवर है? जीवेश मिश्रा ने मंत्री को सवालों में घेरा 10 फरवरी को जाले से बीजेपी के विधायक जीवेश मिश्रा ने सदन में पूछा, ‘सांप जंगली जानवर है या पालतू? मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने जवाब दिया, ’हां सांप जंगली जानवर की श्रेणी में है।’ इसके आगे जीवेश मिश्रा ने पूछा, ‘2024 में सरकार ने नियम बनाया था कि जंगली जानवरों के काटने से मरने वालों को 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में सर्पदंश से मरने वाले को आपदा कोष के तहत 4 लाख रुपए क्यों दिए जा रहे हैं? मंत्री ने जवाब दिया, ‘मुआवजा में सांप को अलग रखा गया है। जंगली जानवरों में बाघ, शेर, तेंदुआ, लकड़बग्घा-घड़ियाल आदि के काटने से मरने वाले व्यक्ति के परिजन को मुआवजा के तौर पर 10 लाख रुपए दिए जा रहे हैं।’ मामला आगे बढ़ता देख स्पीकर ने कहा कि इसकी समीक्षा कर लीजिए। अब 4 पॉइंट में समझिए, सत्ता पक्ष के विधायक क्यों अपनी ही सरकार को घेर रहे 1- पिछली सरकारों में मंत्री रहे इस बार विधायक बेंच पर हैं पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रवीण बागी कहते हैं, ‘सरकार को असहज कर देने वाले चेहरों को देखिए। इसमें नीतीश मिश्रा, जीवेश मिश्रा, राघवेंद्र सिंह, मिथिलेश तिवारी जैसे लोग हैं। वे या तो पिछली सरकार में मंत्री रहे हैं या मंत्री पद की रेस में रहे हैं। ये विधायी प्रक्रिया और अधिकारी के कामकाज करने के तरीके को कायदे से जानते हैं। सरकार से कड़े सवाल पूछकर अपना महत्व दिखा रहे हैं। बता रहे हैं कि इन्हें मंत्री बनाया जाना चाहिए। अगर ये मंत्री नहीं बने तो इसी तरह के सवालों से सरकार को असहज करते रहेंगे। 2- बीजेपी के भीतर संघी और गैर संघी नेताओं की जगह सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण ने कहा, ‘कहते हैं एक पार्टी के भीतर अलग-अलग धाराएं रहती हैं। जैसे कांग्रेस के भीतर कांग्रेसी और गैर कांग्रेसी की लड़ाई रही है उसी तरह बीजेपी के भीतर गैर संघी और गैर संघी की दो धारा रही है।’ 3- मंत्री अपने विधायकों से सवाल पूछवाते रहे हैं सीनियर जर्नलिस्ट इंद्रभूषण ने कहा, ‘विधानसभा के भीतर एक परंपरा ये भी रही है कि मंत्री कई बार अपने विधायकों से सदन में सवाल पूछवाते रहे हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘कई बार कटौती प्रस्ताव और कार्रवाई कराने के लिए मंत्री भी सवाल पूछवाते हैं। या फिर अधिकारी पर कार्रवाई करने का भी एक तरीका ये हो सकता है। सवाल उठाकर उनपर दबाव बनाया जाता है।’ 4- जनता परेशान है, इसका आक्रोश सदन में पहुंच रहा पॉलिटिकल एक्सपर्ट की मानें तो एक कारण जनता की नाराजगी भी है। सरकार कागज पर योजनाएं तो बना रही है, लेकिन जमीन पर वो एंप्लीमेंट नहीं हो पा रहा है। इसके कारण जनता में नाराजगी है। विधायक ग्राउंड पर रहते हैं। उन्हें इसका आक्रोश झेलना पड़ रहा है। इस नाराजगी को वे विधानसभा में व्यक्त कर रहे हैं ताकि सरकार पर दबाव बने और उनके इलाके के समस्याओं का समाधान हो। प्रवीण बागी बताते हैं, ‘लोकतंत्र के लिए शुभ है। अच्छा है। विधायकों को जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। नई प्रवृति का स्वागत किया जाना चाहिए।’ अब जानिए, विधानसभा में विपक्ष क्या कर रहा है मात्र 41 सीटों पर सिमटा विपक्ष सदन में पूरी तरह उदासीन है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शीतकालीन सत्र की तरह बजट सत्र से भी अभी तक लगभग गायब ही चल रहे हैं। 9 दिन में मुश्किल से 3 दिन सदन में उनकी उपस्थिति रही है। भाई वीरेंद्र, राहुल कुमार, कुमार सर्वजीत, कुमारी अनीता और कांग्रेस, लेफ्ट के कुछ विधायकों को छोड़ दें तो विपक्ष के विधायक बस अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। 18वीं विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष के विधायकों की एक्टिविटी समझें तो वे 4 काम कर रहे हैं।