बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शून्यकाल में तेघड़ा से भाजपा (BJP) विधायक रजनीश कुमार ने बेगूसराय के बरौनी स्थित बियाडा (BIADA) औद्योगिक क्षेत्र में संचालित पेप्सी सहित अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से किए जा रहे अत्यधिक भूगर्भ जलदोहन का मामला जोर-शोर से उठाया। विधायक ने चेतावनी दी कि यदि इस पर तुरंत नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में बेगूसराय का जलस्तर खतरनाक स्तर तक गिर सकता है। रजनीश कुमार ने कहा कि बरौनी बियाडा परिसर में स्थित पेप्सी, कैम्पा कोला और केम्पटी जैसी कंपनियों की ओर से प्रतिदिन 15 लाख लीटर भूगर्भ जल निकाला जा रहा है। तेजी से गिर रहा है जलस्तर विधायक ने सदन को बताया कि इतनी भारी मात्रा में पानी निकाले जाने से स्थानीय जलस्तर (Groundwater level) में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जो भविष्य के लिए एक बड़े पर्यावरणीय संकट का संकेत है। औद्योगिक विकास आवश्यक है, लेकिन आम जनता के जीवन से जुड़े प्राकृतिक संसाधनों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। रजनीश कुमार जनहित में सरकार से मांग की कि भूगर्भ जलस्तर के अनियंत्रित दोहन पर तुरंत प्रभावी रोक लगाई जाए। इन कंपनियों के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए जाएं। जलस्तर की निरंतर निगरानी के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन हो। स्थानीय लोगों में जगी उम्मीद बता दें कि बेगूसराय के औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास के गांवों में पिछले कुछ साल से चापाकलों का सूखना और जलस्तर का नीचे जाना एक बड़ी समस्या बन गई है। विधायक की ओर से सदन में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद स्थानीय लोगों में भी उम्मीद जगी है। क्योंकि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो बेगूसराय डार्क जोन की श्रेणी में आ सकता है। कौन हैं रजनीश कुमार रजनीश कुमार बेगूसराय के तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। वे अक्सर अपने क्षेत्र की समस्याओं और पर्यावरणीय मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाते रहे हैं। विधानसभा में उठाए गए इस प्रश्न पर अब सरकार के जवाब का इंतजार है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विरुद्ध क्या ठोस कदम उठाती है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी सुरक्षित रहे। लगातार गिरते जल स्तर के खिलाफ बेगूसराय में पिछले साल से आंदोलन भी चल रहा है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रियम रंजन ने बताया कि 2022 में यहां पेप्सी प्लांट लगा। जब से प्लांट लगा है, जल संकट का दौर शुरू हो गया है। लोग पीने के पानी से लेकर सिंचाई तक के पानी के लिए तरस रहे हैं। जिस प्लांट को दक्षिण भारत, यूपी के हरदोई, बिहार के हाजीपुर से भगाया गया। हमारे माथे थोप दिया गया पेप्सी- प्रियम हाजीपुर में अभी भी पानी की समस्या बरकरार है, उस प्लांट को हमारे माथे पर थोप दिया गया। जबकि हम लोग ऐसे ही पानी से जूझ रहे हैं, यहां की औद्योगिक कंपनियों पहले से ही जल का रोहन कर रही थी। ऊपर से वाटर बेस्ड प्लांट पेप्सी को हमारे माथे पर थोप दिया गया। हम बेगूसराय वाले पहले ही दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर थे। एक पानी बचा था, उसे पर भी क्या स्थिति हो गई है। पानी में आयरन सहित ऐसे केमिकल मिल रहे हैं जो शरीर, त्वचा और जीवन के लिए हानिकारक हैं। इसी के लिए हमने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। पेप्सी से फायदा कुछ नहीं मिला, रोजगार तो मिला नहीं, ऊपर से हम लोग जल संकट झेल रहे हैं। जो जल है, वह प्रदूषित हो रहा है।तालाब सूख रहा है, हमारा पानी ही निकाल कर पूरे देश को पहुंचाया जा रहा है। भूजल दोहन हो बंद यह उत्तर भारत का सबसे अधिक कैपेसिटी का बॉटलिंग प्लांट है। पेप्सी का उद्घाटन हो रहा था तो मुख्यमंत्री ने कहा था कि गंगा नदी से वैकल्पिक पानी लेकर चलाएंगे। लेकिन हमारे भूजल से ही पानी लिया जा रहा। तीन साल पहले 15 फीट पर पानी मिल जाता था, अभी 40 फीट पर जल स्तर मिलता है, पीने का पानी 90 फीट पर मिलता है। हम बच्चों के लिए जमीन तो छोड़ कर जाएंगे नहीं, कम से कम पानी तो छोड़ कर जाते।