भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम अफसरों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को भी दरकिनार कर रखा है। कोर्ट ने स्ट्रीट वेंडिंग जोन तैयार करने को लेकर बीते 20 नवंबर को आदेश जारी किया था कि निगम 60 दिन में स्पीकिंग ऑर्डर जारी करेगा मगर 71 दिन बाद भी आदेश पर अमल में नहीं हो सका है। एक समाजसेवी संस्था ने गुरुनगरी में स्ट्रीट वेंडिंग जोन बनाए जाने को लेकर 23 मार्च 2025 को हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने निगम को आदेश दिया है कि शहर में स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के मुताबिक 6 महीने के भीतर वेंडिंग जोन बनाकर सड़कों से रेहड़ियां हटानी होंगी। साथ ही वेंडिंग जोन तैयार करने होंगे। .नया सॉफ्टवेयर तैयार कराया जाएगा जिसमें रेहड़ी वालों की डिटेल दर्ज होगी। नाम, लोकेशन, आधार नंबर, जरूरी जानकारी फीड होगी। हर रेहड़ी पर 1 हजार और चौपहिया वाहनों में दुकानें लगाने पर 2 हजार मासिक वेंडिंग फीस देनी होगी। .फीस जमा कराने पर रेहड़ी लगाने वालों को पक्के तौर पर रेहड़ी लगाने के लिए जगह अलॉट की जाएगी। यूनीक आइडेंटिफिकेशन (यूआइडी) नंबर मिलेगा। .जोनवाइज डेटा तैयार किया जाएगा ताकि पता लग सके कि शहर में कितनी रेहड़ियां हैं। बिना रजिस्ट्रेशन कराए यदि रेहड़ी लगाई तो एक हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा। बता दें कि एक्ट के मुताबिक निगम ने 11 साल बाद भी नो वेंडिंग जोन और वेंडिंग जोन तय नहीं कर सका है जिससे सड़कों पर अतिक्रमण से ट्रैफिक जाम बढ़ता जा रहा है। गौर हो कि पहले भी हाईकोर्ट से स्पीकिंग ऑर्डर निकालने के आदेश दिए जा चुके हैं लेकिन मार्च 2025 तक स्पीकिंग ऑर्डर न होने पर समाजसेवी संस्था ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले में सितंबर 2025 में सरकार से जवाब तलब किया था। दबाव के बीच 18 नवंबर 2025 को लोकल बॉडीज विभाग ने निगम को वेंडिंग जोन प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस आधार पर हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका डिस्पोज कर दी थी लेकिन 20 नवंबर 2025 को सुनवाई करते हुए निगम को 60 दिन में स्पीकिंग ऑर्डर जारी करने के साथ ही 6 माह में वेंडिंग जोन तैयार करने की डेडलाइन देते हुए आदेश दिया। निगम के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आदेश का पालन करेंगे मगर अब तक कुछ नहीं हुआ। निगम कमिश्नर बिक्रमजीत सिंह औलख को मैसेज कर पूछा गया मगर चुप रहना जरूरी समझा। हाईकोर्ट से आदेश के बाद भी निगम वेंडिंग जोन को सख्ती से लागू नहीं करवा पा रहा है। सारी कार्रवाई रेहड़ियां हटाने तक सीमित रह गई है। गौर हो कि पंजाब सरकार ने आदेश पर शहर में रेहड़ियों को सुव्यवस्थित कर जाम से निजात दिलाने के लिए 1 सितंबर से ऑनलाइन 1 हजार रुपए फीस लेकर यूआईडी नंबर दिए जाने की तैयारी थी। यह अभियान भी भगवान भरोसे ही है।