शीशमहल, राजमहल से भी बड़ा है। देश के अंबानी के घर से भी बड़ी सुविधाएं उनके उस कमरे में हैं। एक स्विमिंग पूल बनाया गया है, जिसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद नहाते हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के इन आरोपों ने देश में भूचाल ला दिया। शंकराचार्य पर यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया। इसे बाद से सनातन धर्म से जुड़े करोड़ों लोगों की नजरें वाराणसी के श्रीविद्या मठ की इमारत पर टिक गईं, जिसे शीशमहल बताया गया है। क्या यहां संगमरमर की फर्श है? कालीन बिछे रहते हैं? अंदर स्विमिंग पूल है? क्या कोई ऐसा फ्लोर है, जहां एंट्री मना है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर टीम श्रीविद्या मठ पहुंची। यहां हमारी मुलाकात शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद से हुई। उन्होंने आश्रम को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब दिए। हमने उनके साथ क्या कुछ देखा, पढ़िए… फर्श पर टाइल्स, कालीन बिछी, हर दरवाजे के आधे हिस्से में शीशे लगे
आश्रम के बाहर सुरक्षा गार्ड तैनात मिले। बातचीत के बाद हमें अंदर जाने की इजाजत मिली। यहां जो भी लोग अंदर-बाहर आते-जाते हैं, उन्हें अपना नाम-पता और मोबाइल नंबर लिखवाना होता है। लेकिन सभी लोग बहुत शिष्टाचार से बात करते हैं। अंदर जाने के बाद एक मुख्य हॉल में हमारी मुलाकात मुकुंदानंद से कराई गई। यहां फर्श टाइल्स और पत्थर लगे थे। कालीन बिछे हुए थे। दीवारों पर पीला और गेरुआ रंग था। चारों तरफ ढेर सारे दरवाजे थे, जिनके आधे हिस्से में शीशे लगे हुए थे। इनसे अंदर हो रही हलचल साफ दिखती है। अंदर की तरफ लोग बैठे थे, जो ध्यान लगाए थे। हमें बताया गया कि शंकराचार्य इस वक्त ध्यान में हैं। वो कमरा एक सेपरेट (एकांत) जगह है, जहां किसी का भी जाना मना है। मुकुंदानंद बोले- ये पहला शीशमहल, जहां शीशे ही शीशे लगे
मुकुंदानंद से हमारा एक ही सवाल था, जिस शीश महल का जिक्र किया गया है, वो कहां है? इस पर मुकुंदानंद कहते हैं- शीशमहल तो है, बहुत बड़ा शीशमहल है। आइए आपको दिखा देते हैं। उन्होंने आसपास के हॉल और उसके बीच में लगे शीशे दिखाने शुरू किए। कहा- देखिए वहां क्या हो रहा है? ये दिख रहा है, उसके पीछे भी शीशे लगे हैं। हमारे ख्याल से देश का पहला शीशमहल है, जहां इतने शीशे लगे हैं। हमने कहा- ये स्वीमिंग पूल का क्या मामला है? मुकुंदानंद कहते हैं- पूल क्या हमारे पास तो मां गंगा है। मठ के अंदर अगर स्वीमिंग पूल है, तो कोई आकर देख ले। हमने पूछा- इस मठ का स्ट्रक्चर कैसा है? मुकुंदानंद कहते हैं- सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर है। यहां प्रवचन और ध्यान होता है। लोग आते-जाते हैं। फिर पहला फ्लोर है, जहां बच्चे रहते हैं। वहां वो अध्ययन करते हैं। तीसरा फ्लोर पूरी तरह से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदजी के लिए है। उसके ऊपर छत है, वहां बच्चों के नहाने की व्यवस्था है। चांदी का सिंहासन पर विराजते हैं शंकराचार्य
हमने कहा- आप आश्रम के कुछ हिस्से हमें कैमरे पर दिखा दीजिए। मुकुंदानंद कहते हैं- आदि शंकराचार्य को लेकर कथा है। जब वो गंगा घाट की तरफ जा रहे थे, तब घाट पर भगवान शिव ने चांडाल के रूप में 4 कुत्ते लेकर जाते हुए दर्शन दिए थे। शास्त्रों में बहुत स्पष्ट जिक्र है, सप्तकूप जहां था, वही ये घटना हुई। इस आश्रम में उसमें से एक कूप मौजूद है। यही पर बैठकर सौंदर्य लहरी ग्रंथ की रचना की थी। इस कूप के पास में एक स्थान दिखाया गया, यहां चांदी का सिंहासन रखा था। मुकुंदानंद ने बताया- यहां पर शंकराचार्य शाम को 5 बजे बैठकर दर्शन देते हैं, सबसे मिलते हैं। इसके ठीक बगल में एक हॉल दिखाया गया, जहां शंकराचार्य बैठते हैं। लोगों से मुलाकात करते हैं। उन्होंने कहा- जिस शीशमहल की बातें कही जा रहीं, वो देख लीजिए। यहां हर जगह पर शीशें लगे हैं। अगर यही शीशमहल है, तो वाकई में ये है, आप देख लीजिए। स्विमिंग पूल नहीं, यहां गंगा की धारा है…
स्विमिंग पूल की बात पर मुकुंदानंद कहते हैं- हमारे आश्रम के बाहर ही गंगाजी हैं। जब उनका पानी बढ़ता है, तो मठ के अंदर तक गंगाजी आ जाती हैं। उनके आते ही स्वीमिंग पूल तो बन ही जाता है। गंगाजी की बहुत बड़ी धारा आ जाती है। फिर आप इन आरोपों को किस नजर से देखते हैं? उन्होंने कहा- जिसका काम ही है झूठा आरोप लगाना, वो हिस्ट्रीशीटर है। उसने सब कुछ झूठ ही कहा आज तक। उसने हमारे ऊपर ये आरोप लगाए कि 18 जनवरी को हमने उसका (महंत आशुतोष) गला दबाया। उसने हमारे खिलाफ एक केस किया। कहा कि शंकराचार्य ने उस पर अस्त्र फेंककर मारा। ये उसके आरोप हैं। ये सब जिस दिन होना बताया गया, उस दिन प्रशासन हमारे साथ दुर्व्यवहार कर रहा था। जिस दिन हमारे बच्चों को पीटा गया। जिस दिन हमको स्नान नहीं करने दिया गया। जिस दिन शंकराचार्य महाराज की पालकी का अपहरण कर लिया गया। जिस दिन पूरा विश्व हमको देख रहा था। उस दिन हमारे ऊपर आरोप लगे कि हम उसका गला दबा रहे थे। क्या उसकी कोई सच्चाई हो सकती है? जो A ग्रेड का हिस्ट्रीशीटर है। जिसके भाई-बहन, पिता सब दोषी हैं। जिसके ऊपर गैंगरेप के आरोप, लोगों से पैसा वसूलने का आरोप है। ये वो शख्स है, जो एक बार पुलिस अधीक्षक के सामने पहुंच गए। गोहत्यारों को बचाने के लिए 1 लाख रुपए की घूस दे रहा था। वो क्या सच बोल सकता है? इतना घृणित आरोप लगाने वाला वो और उसके गुरुजी…उसके विषय में हम क्या कहेंगे। लेखिका ने कहा- आश्रम में रहस्यमयी कमरे, वहां कोई नहीं जाता शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ लेखिका भूमिका द्विवेदी भी सामने आई हैं। उन्होंने शंकराचार्य और वाराणसी में उनके विद्यामठ को लेकर तमाम चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। भूमिका द्विवेदी ने बताया- मैं 2022 में काशी और प्रयागराज में रिसर्च कर रही थी। रिसर्च के लिए अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने प्रोत्साहित किया था। तब मैं करीब 2 महीने अविमुक्तेश्वरानंद के मठ में रही थी। लेकिन, मठ के अंदर जो कुछ देखा, उसने मेरी राय बदल ली। मठ के अंदर लग्जरी माहौल, स्विमिंग पूल, गुप्त और रहस्यमयी कमरे हैं। इसका पूरा कंट्रोल ‘स्वामी जी की सखी’ के पास है। वहां किसी को जाने की इजाजत नहीं है। भूमिका द्विवेदी ने दावा किया कि मठ में किसी आध्यात्मिक केंद्र जैसी सादगी के बजाय लग्जरी सुख-सुविधाएं ज्यादा हैं। वहां AC, LED टीवी और महंगे कालीनों से सजा हुआ शाही माहौल है। मठ के अंदर के हॉल इतने शानदार हैं कि आंखें चौंधिया जाएं। मठ के सबसे ऊपरी फ्लोर पर स्विमिंग पूल
लेखिका भूमिका द्विवेदी ने दावा किया कि मठ की एक महिला ने मुस्कुराते हुए स्वयं को स्वामीजी (अविमुक्तेश्वरानंद) की ‘सखी’ बताया। वही वहां सर्वेसर्वा की तरह रहती हैं। मठ का पूरा कंट्रोल उनके पास ही है। उन्होंने 4 बड़े दावे किए- छोटे बटुकों से कराया जाता है मठ का काम
भूमिका द्विवेदी का आरोप है कि बेहद गरीब घरों से संबंध रखने वाले छोटे बटुकों से मठ में बहुत काम कराया जाता है। मैनेजर और रसोइया उनके सामान तक चोरी कर लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि 8 साल के एक सुंदर बटुक ने उनके फोटो खिंचवाने से यह कहकर मना कर दिया था कि ‘स्वामी श्री’ ने आदेश दिया है कि किसी बाहरी के साथ फोटो मत खिंचवाना। मठ के अंदर अथाह खजाना
भूमिका द्विवेदी ने बताया- अविमुक्तेश्वरानंद ने कई कोठियां अपनी बहनों को दी हैं। ऐसा बनारस के लोग बताते हैं, हालांकि मेरे पास इसका प्रूफ नहीं है। मठ के अंदर अथाह खजाना है, वहां पर रत्न और तमाम भंडार हैं। लेखिका ने सवाल किया कि मठ में सबसे ऊंचे फ्लोर पर अंदर की सीढ़ियों पर क्यों नहीं जाने दिया जाता? अविमुक्तेश्वरानंद एक लग्जरी बस में चलते हैं। उनके पास अपनी वैनिटी वैन है, जिसमें सारी सुविधाएं हैं। इस वैनिटी वैन में ही वो रहते हैं। ये बस उनके लिए खासतौर से डिजाइन की गई है। भूमिका द्विवेदी का कहना है कि वह किसी दबाव में नहीं हैं। जो कुछ मैंने अपनी आंखों से देखा, वही बता रही हूं। उन्होंने सखी के साथ कई तस्वीरें होने का भी दावा किया। मठ में कोई दिनचर्या नहीं
मठों में आमतौर पर सुबह 4 बजे उठने और कड़े नियमों का पालन करने की परंपरा होती है। लेकिन भूमिका का दावा है कि इस मठ में लोग अपनी मर्जी से उठते हैं। उन्हें कोई सख्त धार्मिक दिनचर्या नहीं दिखी। मई, 2022 में बनारस मठ से आने वाली भूमिका ने दावा किया कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के कमरे में कोई भी जा सकता था। वहां सिर्फ किताबें और ग्रंथ मिलते थे। लेकिन यहां (अविमुक्तेश्वरानंद के समय) सब कुछ छिपा हुआ और रहस्यमयी है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मठ में प्रवास के दौरान शंकराचार्य स्वरूपानंद से मिलने की कोशिश की थी। तब पता चला था कि वह बीमार हैं और बेंगलुरु में इलाज चल रहा। स्वरूपानंद सरस्वती ने 2022 में नरसिंहपुर में ली थी अंतिम सांस
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन 11 सितंबर, 2022 को हुआ था। उन्होंने मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में 99 साल की आयु में अंतिम सांस ली थी। वे गुजरात के द्वारका और बद्रीनाथ के ज्योतिर मठ के शंकराचार्य थे। निधन के बाद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के उत्तराधिकारियों के नाम घोषित किए गए थे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष्पीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारका शारदा पीठ का प्रमुख घोषित किया गया था। उनके नामों की घोषणा शंकराचार्य जी की पार्थिव देह के सामने की गई थी। ज्योतिष्पीठ का प्रभार अभी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के पास है। जबकि, द्वारका पीठ का प्रभार दंडी स्वामी सदानंद सरस्वती को मिला हुआ है। शंकराचार्य बोले- लोग अपने मन की भड़ास निकाल रहे
लेखिका भूमिका द्विवेदी के दावों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। कहा- हम खुद का श्राद्ध और पिंडदान कर चुके हैं। ऐसे में मुझे डर नहीं है। शीशमहल और स्विमिंग पूल को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि लोग अपने मन की भड़ास निकाल रहे हैं। मेरे गुरु महाराज ने एक गढ़ा (पूल) बनाया था, जिससे उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सके। हाईकोर्ट में याचिका लगाने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा- मुझे गिरफ्तार करके, कोई जहर की सुई ना लगा दे। इसलिए कोर्ट गया। जांच रिपोर्ट को लेकर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती है। ये रिपोर्ट पुलिस के माध्यम से ही सामने आती है। अब जानिए डॉ. भूमिका द्विवेदी को… डॉ. भूमिका द्विवेदी अश्क गाजियाबाद के DLF कॉलोनी की रहने वाली हैं। वह एक लेखिका हैं। उनके पति का नाम नीलाभ द्विवेदी है। उनके ससुर उपेंद्रनाथ अश्क (हिंदी और उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकार) हैं।
————————– ये खबरें भी पढ़ें…. शंकराचार्य केस में दावा- नाबालिगों से यौन शोषण की पुष्टि, मेडिकल रिपोर्ट आई शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आ गई है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। पुलिस ने बुधवार को पीड़ित नाबालिगों का मेडिकल टेस्ट कराया था। दो डॉक्टरों के पैनल ने प्रयागराज के सरकारी अस्पताल में मेडिकल टेस्ट किया। पढे़ं पूरी खबर… भास्कर इंटरव्यू आशुतोष महाराज की अविमुक्तेश्वरानंद को चुनौती- मेडिकल कराएं, उन्हें शंकराचार्य मान लूंगा मैं आपको (शंकराचार्य को) चुनौती देता हूं। आप दूध के धुले हैं, सरकारी मेडिकल कॉलेज में अपना मेडिकल करवा लें। मैं आपको शंकराचार्य मान लूंगा। अपने शिष्य मुकुंदानंद का भी मेडिकल करवा दें। उसमें साफ आ जाएगा कि आप ब्रह्मचारी हैं या नहीं।’ यह कहना है आशुतोष महाराज का। पॉक्सो कोर्ट ने शंकराचार्य पर FIR दर्ज कराने के आदेश दिए। इसके बाद दैनिक भास्कर ने शिकायत करने वाले आशुतोष महाराज से बात की। पढ़िए पूरी खबर…