“मैडम, मेरे दरवाजे पर 27 अक्टूबर 2025 से एक महिला जबरन डेरा डालकर बैठी है। वह दावा कर रही है कि मैंने उससे शादी की है, जबकि यह सरासर झूठ है। मेरी मां सरपंच पद का चुनाव लड़ चुकी हैं। राजनीतिक द्वेष के चलते कुछ ग्रामीण उसका साथ दे रहे हैं। पिछले चार महीनों से मेरा पूरा परिवार प्रताड़ना झेल रहा है। मुझे और मेरे परिवार को बचाइए।” यह गुहार समस्तीपुर के भादोघाट गांव निवासी सुनील कुमार ने लगाई है। वह अपनी मां मंजू देवी के साथ शुक्रवार को जनसुनवाई कार्यक्रम में पहुंचकर बिहार महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा से न्याय की मांग की। दूसरी ओर उस महिला का दावा है कि सुनील ने उससे शादी की है। उसका कहना है, “मैं यहां से नहीं जाऊंगी। जरूरत पड़ी तो घर के बाहर ही जान दे दूंगी, लेकिन यहीं रहूंगी।” मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने नोटिस जारी कर महिला को आयोग के सामने लाने के निर्देश दिए हैं। ताकि दोनों पक्षों की बात सुनकर आगे की कार्रवाई की जा सके। अब जानिए आखिर पूरा मामला है क्या सुनील के मुताबिक, 2 साल पहले समस्तीपुर शहर में एक कोचिंग में पढ़ाई करता था। उसी कोचिंग में विभूतिपुर पटपारा गांव की कविता कुमारी भी पढ़ती थी। उसने पहले से ही लव मैरिज कर रखी थी। उसके पति ने उसको धोखा दिया था। एक दिन अचानक बूढी गंडक नदी में कूदने के लिए जा रही थी। मानवता के आधार पर उसने कोचिंग के कर्मियों के सहयोग से उसे बचाया। उम्र में वह मेरे से बड़ी है। सुनील ने बताया, “कोचिंग की पढ़ाई खत्म होने के बाद समस्तीपुर छोड़ दिया। इसके बाद पिछले साल 27 अक्टूबर के एनजीओ की मदद से मेरे घर पर पहुंच गई और शादी का दावा करने लगी। मैं घर पर नहीं था। परिवार के लोगों ने सबूत मांगा, लेकिन उसने कोई फोटो तक नहीं दिया। ग्रामीण राजनीति के कारण गांव के लोगों ने उसे सपोर्ट देकर जबरन मेरे दरवाजे पर बैठा दिया है। जबकि सच्चाई है कि मैंने उससे शादी नहीं की है। किसी प्रकार का कोई संबंध नहीं है। महिला को हटाने के लिए स्थानीय पुलिस पदाधिकारी से लेकर दरभंगा के DIG तक को आवेदन दिया, लेकिन कहीं से कोई सपोर्ट नहीं मिला। परिवार के लोग प्रताड़ना के शिकार हो रहे हैं। रात के समय घर के बाहार गलत लोगों का जमावड़ा लगा रहता है। साजिश में गांव के लोग शामिल लड़के की मां मंजू देवी ने कहा, “एक लड़की आकर जबरन हमारे घर के बाहर बरामदे में रह रही है। गांव के कुछ लोग भी दबाव बना रहे हैं कि उसे घर में रखना ही होगा। वह कहती है कि उसने मेरे बेटे से शादी की है, लेकिन मेरा बेटा उसे पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहता। वह कोई ठोस सबूत भी नहीं दे रही है।” मंजू देवी ने आगे कहा, “मैं सरपंच का चुनाव लड़ चुकी हूं। मुझे लगता है कि गांव के कुछ लोग राजनीतिक कारणों से साजिश कर रहे हैं और उसी वजह से उसे समर्थन दे रहे हैं।” अब जानिए लड़की का क्या कहना है कविता का कहना है, “काशीपुर के कोचिंग में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। जहां सुनील भी पढ़ता था। अपने परिवार वालों के खिलाफ मैंने लव मैरिज की थी, लेकिन एक दिन पता चला कि मेरा पति मुझे धोखा दे रहा है। जिस कारण मैं बूढी गंडक नदी में डूबने जा रही थी, लेकिन वहां इंसानियत के तौर पर सुनील ने उसे बचा लिया। कहा कि यहीं से जीवन खत्म नहीं हो जाता। फिर से नई शुरूआत करो। उसकी बातों में आकर धीरे-धीरे उसके करीब आ गई। उसके साथ घूमने लगी। नजदीकियां बढ़ने पर एक ही कमरे में पति-पत्नी के तौर पर रहने लगे। इस बीच सुनील मुझे देवघर ले गया। वहां उसने मेरे साथ शादी की। ससुराल ले चलने की बात पर कहने लगा कि मां-पिता की मर्जी के बगैर शादी की है। माहौल शांत होने के बाद ले चलेंगे। मैं जब घर ले जाने की बात कहता वो टाल देता। फिर मुझे जानकारी मिली कि वह मुझे धोखा दे रहा है, दूसरी लड़की से बात करता है। इसके बाद ससुराल चलने के लिए दबाव देने लगी।” एक दिन मौका पाकर मेरे मोबाइल से सभी फोटो, वीडियो , शादी का सबूत मिटाकर फरार हो गया। जिसके बाद उसके घर पर एनजीओ के सहयोग से पहुंची। गांव में पंचायत भी हुई, लेकिन उसके परिवार के लोग शामिल नहीं हुए। मैं घर के दरवाजे पर ही जान दे दूंगी, लेकिन अब यहां से नहीं जाऊंगी। महिला को बुलाया गया है, दोनों पक्षों को सुना जाएगा इस संबंध में बिहार महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने कहा कि युवक आवेदन लेकर पहुंचा था। लेकिन यहां सिर्फ महिलाओं की बात सुनी जाती है। जिस कारण उसे वापस कर दिया गया था। बाद में वह अपनी मां के साथ पहुंचा। उसकी बात सुनने के बाद महिला का पक्ष जानना जरूरी है। महिला थानाध्यक्ष को नोटिस कर उसे आयोग के समक्ष पेश करने को बोला गया है। दोनों पक्ष की बात सुनने के बाद इस मामले पर कोई फैसला लिया जाएगा।