हरियाणा शिक्षा विभाग में साल 2014 की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत पक्के किए गए प्रोग्रामरों की नियुक्तियों पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। विभाग की सहायक निदेशक ने मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर दावा किया है कि नियमों और अनिवार्य शर्तों को ताक पर रखकर कई अधिकारियों को नियमित किया गया। पत्र में न केवल नियुक्तियों को रद्द करने, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की भी सिफारिश की गई है। शिक्षा विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर ने 30 जनवरी को मुख्य सचिव को भेजे लेटर में लिखा है कि साल 2014 की रेगुलराइजेशन नीति के तहत वरूण अग्रवाल प्रोग्रामर के मामले में विभाग ने नियमों और जरूरी शर्तों व क्राइटेरिया को दरकिनार करते हुए नियमित किया गया पाया गया। जिन कर्मचारी/अधिकारियों द्वारा ये अनियमितताएं की गई है, उन पर सख्त अनुशासनिक कार्यवाही होनी चाहिए। साथ ही कहा गया है कि ऐसे प्रोग्रामर जिनको 3 वर्ष के अनुभव और बिना शैक्षणिक योग्यता पूर्ण करते हुए नियमित किया गया है, को तुरंत प्रभाव से रिवर्ट किया जाना बनता है, ताकि सरकार को वर्ष 2014 से अब तक जो वित्तीय हानि हुई है, उससे आगे बचा जा सके। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये नियम वर्ष 2014 से पहले लागू थे और कानूनी रूप से अनिवार्य हैं। इन नियमों में ‘या समकक्ष” शब्द नहीं है। इसलिए इनके अलावा किसी अन्य योग्यता को मान्य नहीं माना जा सकता। सहायक निदेशक द्वारा मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र पढ़ें… 3 पॉइंट में समझिए 2 केसों में क्या हुआ… पत्र में इन 3 बिंदुओं पर जांच की मांग…