पंजाब में आतंकवाद के दौर में दशतगर्दों का मुकाबला करने वाले शौर्य चक्र विजेता कॉमरेड बलविदंर सिंह हत्याकांड के एक आरोपी व खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) से जुड़े नवप्रीत सिंह उर्फ नव को एनआईए की विशेष कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया ठोस सबूत हैं और ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं बन सकती। यह खालिस्तानी आतंकवाद की पुनरुत्थान की कोशिशों से जुड़ा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है। हालांकि आरोपी के वकील ने कई अहम तर्क दिए। उनका कहना था कि एफआईआर में उनका नाम नहीं था, न ही उनसे कोई रिकवरी हुई पहले पंजाब पुलिस ने केस दर्ज किया 16 अक्टूबर 2020 को दो अज्ञात हमलावरों ने बलविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। शुरुआत में भिखीविंड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई। जिसमें आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 120-बी (साजिश), आर्म्स एक्ट की धाराएं और यूएपीए की विभिन्न धाराएं (16, 17, 18, 18ए, 18बी, 19, 20, 23, 38, 39, 40) शामिल थीं। बाद में जैसे ही केस में विदेशी लिंक सामने आए तो भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने मामले को अपने हाथ में लिया और इसमें नए सिरे से केस दर्ज किया।
मोबाइल लोकेशन डॉटा ने खोली पोल एनआईए की जांच आगे बढ़ी तो पत चला कि मुख्य साजिशकर्ता सुखमीत पाल सिंह उर्फ सुक्ख भिखारीवाल (केएलएफ ऑपरेटिव), कनाडा स्थित सनी टोरंटो और लखवीर सिंह रोडे (केएलएफ प्रमुख, प्रतिबंधित आतंकी संगठन) थे। इनके निर्देश पर मुख्य हमलावरों को लॉजिस्टिक और आर्थिक सहायता दी गई। नवप्रीत सिंह (ए-28) पर आरोप है कि उन्होंने इंदरजीत सिंह उर्फ इंडर और हरभिंदर सिंह उर्फ पिंडर के साथ मिलकर टारगेट की रेकी की। उन्होंने एवरग्रीन स्कूल और डीएवी स्कूल के सीसीटीवी कैमरों की जानकारी जुटाई और साझा की, क्योंकि वे खुद इन स्कूलों के पूर्व छात्र थे। इसके अलावा, अक्टूबर 2020 की शुरुआत में नवप्रीत ने बलविंदर सिंह के घर की रेकी में मदद की और हत्या के बाद इंदरजीत के कपड़ों को पेट्रोल डालकर आगरा पछारा के पास जलाकर सबूत नष्ट किए। इन आरोपों की पुष्टि मोबाइल लोकेशन डेटा से हुई। जिसमें दिखा कि 30 सितंबर से 1 अक्टूबर 2020 की रात इंद्रजीत नवप्रीत के घर पर रुका था। एनआईए की जांच में सामने आया कि नवप्रीत सिंह ने केएलएफ के विदेशी सदस्यों के साथ सांठ-गांठ की थी और हत्या की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी। एफआईआर में नाम नहीं, रिकवरी नहीं हुई दूसरी याचिका में नवप्रीत के वकील जसपाल सिंह मझपुर ने तर्क दिया कि आरोपी को गलत फंसाया गया है, एफआईआर में नाम नहीं है, कोई रिकवरी नहीं हुई और ट्रायल में देरी हो रही है । 233 गवाहों में से केवल 44 की गवाही हुई। वहीं, एनआईए के विशेष लोक अभियोजक उर्फी मसूद सईद ने विरोध करते हुए कहा कि यूएपीए की धारा 43-डी(5) के तहत जमानत नहीं दी जा सकती, क्योंकि प्रथम दृष्टया आरोप सही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के गुरविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य (2024) के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि यूएपीए मामलों में जमानत अपवाद है, जेल नियम। पहले सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका नवप्रीत सिंह की पहली जमानत याचिका 2022 में एनआईए विशेष ने 20 अप्रैल 2023 को खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। जो 5 दिसंबर 2023 को खारिज हुई। फिर सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (क्रिमिनल) दाखिल की गई, जिसे 15 अक्टूबर 2024 को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में प्रगति न होने पर दोबारा याचिका दाखिल की जा सकती है। 200 आतंकियों को खदेड़ा था परिवार ने बलविदर सिंह (जिन्हें कॉमरेड बलविंदर सिंह संधू या बलविंदर सिंह भिखीविंड के नाम से जाना जाता है) पंजाब के तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव के एक साहसी नागरिक थे। वे एक शिक्षक और कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से जुड़े कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 1980 के दशक में पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के चरम काल में बहादुरी से मुकाबला किया। उनके परिवार ने आतंकवादियों के खिलाफ एक अनोखी लड़ाई लड़ी। 30 सितंबर 1990 को लगभग 200 आतंकवादियों ने उनके घर पर हमला किया, लेकिन बलविंदर सिंह, उनके बड़े भाई रंजीत सिंह और दोनों की पत्नियों जगदीश कौर व बलराज कौर ने हथियार उठाकर पूरे परिवार की रक्षा की और हमलावरों को भगा दिया। इस घटना सहित कई हमलों (कुल 42 प्रयास बताए जाते हैं) में उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने गृह मंत्रालय की सिफारिश पर इस पूरे परिवार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया। यह देश में शायद एकमात्र मामला है जहां एक परिवार के चार सदस्यों को यह सम्मान मिला। उनकी बहादुरी पर नेशनल ज्योग्राफिक जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी डॉक्यूमेंट्री बनी। 16 अक्टूबर 2020 को अज्ञात हमलावरों ने उनके घर के बाहर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। उनकी लड़ाई और बलिदान पंजाब में आतंकवाद विरोधी संघर्ष की प्रतीक बने रहे।