श्री आनंदपुर साहिब में हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट कैंसिल:बैंस बोले-मंजूरी के बाद SGPC ने लगाए 90% आब्जेक्शन; 25 करोड़ से होना था निर्माण

श्री आनंदपुर साहिब में हेरिटेज स्ट्रीट नहीं बनेगी। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के बदलाव की मांग के बाद प्रोजेक्ट को कैंसिल कर दिया गया है। पंजाब सरकार ने प्रोजेक्ट रद्द किया है। हालांकि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व जत्थेदार की मंजूरी के बाद प्रोजेक्ट शुरू किया था। सरकार ने पिछले साल नवंबर में गुरु तेग बहादुर की शहादत की 350वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना की घोषणा की थी। इसके लिए 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि एसजीपीसी को लगता था कि हरजोत बैंस को क्रेडिट न मिल जाए, जिसके चलते उन्होंने 90 प्रतिशत ऑब्जेक्शन लगा दिए थे। हमारे लिए एसजीपीसी का आदेश परम है। इस मामले में कौन सही है, इसका फैसला अब संगत व वहां के स्थानीय लोग करेंगे। अब इस तरह सरकार करेगी काम शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि एसजीपीसी को लगता था कि कहीं इस प्रोजेक्ट का क्रेडिट बेंस को न मिल जाए। अब हम प्रोजेक्ट को तख्त श्री केसगढ़ साहिब से गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तक कोरिडोर बनाएंगे, ताकि वह जगह खुल जाएं। वह जगह टूरिज्म विभाग की है, जो एसजीपीसी ने कहा कि वह सिर माथे है। अब यह फैसला आनंदपुर साहिब की जनता और कौम तय करेगी कि सही कौन था। राजनीतिक कारणों से सब हुआ है हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि एसजीपीसी से प्रोजेक्ट पास करवाया गया था। आज भी तख्त श्री केसगढ़ साहिब के सामने एक मॉडल पड़ा हुआ है, जिसमें ड्योढ़ी है। राजनीतिक कारणों की वजह से एसजीपीसी को लगता था कि हरजोत बैंस को क्रेडिट न मिल जाए, सीएम भगवंत मान को क्रेडिट न मिल जाए। उन्होंने 90 प्रतिशत ऑब्जेक्शन लगा दिए। हमने कहा कि सत वचन, यह हमारे लिए रब का फरमान है। यह आपत्तियां है एसजीपीसी को मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक एसजीपीसी के अधिकारियों ने हेरिटेज स्ट्रीट पर प्रस्तावित गेट का विरोध करते हुए तर्क दिया है कि इससे मुख्य सड़क से तख्त श्री केसगढ़ साहिब का दृश्य बाधित होगा। । उन्होंने तख्त की ओर जाने वाली सड़क पर सफेद संगमरमर बिछाने पर भी आपत्ति जताई और जोर देकर कहा कि मार्ग पूरी तरह से वाहन योग्य रहना चाहिए। इसके बाद इस मामले को टूरिज्म विभाग के अधिकारियों ने मंथन किया। इस दौरान तय हुआ एसजीपीसी द्वारा सुझाए गए बदलावों के लिए मूल डिजाइन में लगभग 90 प्रतिशत परिवर्तन करना पड़ता। उन्होंने कहा कि चूंकि ऐसे बदलावों से परियोजना पूरी तरह प्रभावित हो जाती, इसलिए विभाग ने इसे स्थगित करने का निर्णय लिया।

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