पंजाब में जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल 2026 को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने इस बिल पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा के बयान को भ्रमित करने वाला बताया है। धामी के अनुसार, सरकार द्वारा पेश किए जा रहे इस बिल को लेकर स्पष्टता की कमी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ मंत्री इसे पूरी तरह नया बिल बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर इसका नाम पहले से मौजूद 2008 के एक्ट से मिलता-जुलता है। ऐसे में यह समझना मुश्किल हो रहा है कि सरकार पुराने कानून में संशोधन कर रही है या फिर बेअदबी के मामलों को लेकर नया कानून बना रही है। मंत्री पर जानकारी की कमी का आरोप धामी ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री चीमा को खुद इस बिल की पूरी जानकारी नहीं है। धामी ने कहा कि उनके बयानों में विरोधाभास साफ दिखाई देता है, जिससे सिख संगत के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। सरकार पर SGPC की अनदेखी का आरोप इसके अलावा, धामी ने सरकार पर शिरोमणि कमेटी की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने बताया कि कमेटी की ओर से बनाई गई उच्च स्तरीय समिति ने कई बार सरकार और उसकी सेलेक्ट कमेटी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। धामी ने जोर देकर कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का मामला सिखों की आस्था और भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर केवल राजनीति कर रही है और सही जानकारी साझा नहीं कर रही। अंत में, उन्होंने मांग की कि सरकार इस बिल का पूरा मसौदा सार्वजनिक करे, ताकि सभी पक्षों में स्पष्टता आ सके और किसी भी तरह का भ्रम दूर हो सके।