संकट मोचन संगीत समारोह की चौथी निशा का आगाज पं.देवज्योति बोस के सदोद वादन से हुआ। उन्होंने कुमार बोस के तबला की संगत के साथ संकट मोचन भगवान को राग महावीर कल्याण अर्पित किया। इस राग में उन्होंने आलाप से वादन की शुरुआत की। इसके बाद दूसरी प्रस्तुति कृतिया नरसिंह राणा ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने नृत्य की शुरआत भगवान शिव की वंदना से की। उन्होंने श्रीराम चरित मानस के विभिन्न कथानकों को बारी-बारी से मंच पर सजीव किया। इसके बाद समारोह में पद्मश्री से सम्मानित भजन गायक अनूप जलोटा एक बार फिर हनुमान जी के दरबार में अपनी प्रस्तुति देने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की।
उन्होंने कहा- बचपन में एक बार मैंने उन्हें अपने कार्यक्रम में महसूस किया था। उस समय मैं करीब 12 साल का था और लखनऊ के अमीनाबाद में एक मंदिर में गा रहा था। ऐसा लगा जैसे वे मेरे पास ही बैठे हैं। मैं भावुक होकर रोने लगा और गा नहीं पाया। उसी दिन मुझे लंबी सांस की शक्ति का आशीर्वाद मिला- क्योंकि वे पवन पुत्र हैं। अनूप जलोटा ने कहा- हम चाहते हैं कि संगीत में कोई सीमा न हो, लेकिन जब हालात ठीक नहीं होते तो कुछ दूरी बनानी पड़ती है। फिलहाल हम पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करते, लेकिन अन्य देशों के कलाकारों के साथ सहयोग जारी है।