सहरसा में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने रविवार को बहुजन नायक कांशीराम की 92वीं जयंती मनाई। यह कार्यक्रम शहर के न्यू कॉलोनी स्थित जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार शर्मा के आवास पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने कांशीराम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को स्मरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष महेंद्र कुमार शर्मा ने कांशीराम के जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कांशीराम का जीवन सामाजिक न्याय और बहुजन समाज के उत्थान के लिए समर्पित था। कांशीराम ने अपनी वैज्ञानिक की नौकरी छोड़ दी थी
शर्मा ने बताया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा से प्रभावित होकर कांशीराम ने अपनी वैज्ञानिक की नौकरी छोड़ दी थी और समाज सेवा का मार्ग अपनाया। उन्होंने जीवन भर अविवाहित रहकर वंचित और शोषित वर्गों को संगठित करने का कार्य किया। महेंद्र शर्मा ने आगे कहा कि कांशीराम ने देश की विभिन्न जातियों में बंटे समाज को एकजुट कर बहुजन आंदोलन को सशक्त किया। वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा
उन्होंने दलित राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। उनके प्रसिद्ध नारे “वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा” और “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” आज भी सामाजिक न्याय के संघर्ष का आधार हैं। शर्मा ने केंद्र सरकार से कांशीराम के ऐतिहासिक योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की। 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी
शर्मा ने कांशीराम द्वारा स्थापित प्रमुख संगठनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कांशीराम ने 1971 में दलित शोषित संघर्ष समिति (डीएस-4), 1974 में बामसेफ और 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कर बहुजन समाज को एक नई राजनीतिक दिशा प्रदान की। उनकी लिखी पुस्तकें ‘द चमचा युग’ और ‘बर्थ ऑफ बामसेफ’ आज भी सामाजिक परिवर्तन की विचारधारा को सशक्त करती हैं। इस अवसर पर संदीप पासवान, महिषी प्रखंड अध्यक्ष सुशील पासवान, सत्तर कटेया प्रखंड कार्यकारी अध्यक्ष रश्मि सोरेन, अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष रतन कुमार शाह, जिला उपाध्यक्ष नरेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित थे।