सिख श्रद्धालुओं पर यात्रा शुल्क का बढ़ा बोझ:SGPC अध्यक्ष धामी की केंद्र सरकार से अपील, फैसला वापस लेने की मांग

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने केंद्र सरकार से सिख श्रद्धालुओं की धार्मिक यात्राओं पर लगाए गए नए शुल्क को लेकर अपील की है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन के लिए जाते हैं। इन यात्राओं में एक जत्था करतारपुर साहिब कॉरिडोर के माध्यम से जाता है, जबकि दूसरा जत्था अटारी सीमा के रास्ते भेजा जाता है। धामी ने बताया कि बैसाखी, गुरु अर्जन देव जी के शहीदी गुरुपर्व, महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विशेष रूप से जत्थे भेजे जाते हैं। ये यात्राएं सिख समुदाय की आस्था और भावनाओं से गहराई से जुड़ी होती हैं। नए शुल्क से बढ़ा आर्थिक बोझ उन्होंने कहा कि पहले करतारपुर कॉरिडोर के लिए 20 डॉलर शुल्क लिया जाता था, जिसे समाप्त करने पर भी विचार चल रहा था। लेकिन अब अटारी सीमा पर 200 रुपये लिए जाने और 200 रुपये वापस आने के लिए नए शुल्क की बात सामने आई है, जिससे श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आस्था पर चोट, शुल्क हटाने की मांग धामी ने इसे श्रद्धालुओं की आस्था पर आघात बताते हुए कहा कि धार्मिक यात्राएं किसी व्यापारिक उद्देश्य के लिए नहीं होतीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास के तहत की जाती हैं। इसलिए इस प्रकार के शुल्क लगाना उचित नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए और लगाए गए नए शुल्क को वापस लिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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