डॉ. नवजोत कौर सिद्धू की कांग्रेस पार्टी से बर्खास्तगी के बाद अमृतसर के ईस्ट हलके की ही नहीं बल्कि नॉर्थ से सेंट्रल विधानसभा हलकेतक की सियासत गड़बड़ा गई है। दंपती अगर 2027 के चुनाव में अपनी राजनीति बचाए रखना चाहता है तो उसके पास दो ही रास्ते हैं। पहला नई पार्टी बनाना तो दूसरा भाजपा की वापसी करना। इस दूसरे रास्ते न ही भाजपा के नेताओं के परेशानी बढ़ा दी है। कोई यह सुनिश्चित करने में लगा है कि सिद्धू की भाजपा में एंट्री न हो तो कोई इस बात को पक्का करने में लगा कि वह उसके हलके में दावा न ठोंकें। सिद्धू दंपति भाजपा में जाता है तो अमृतसर की तीन अहम विधानसभा सीटों अमृतसर नार्थ, अमृतसर केंद्रीय और अमृतसर ईस्ट का सियासी समीकरण बदलेंगे। डॉ. सिद्धू पहले कह चुकी हैं कि वह ईस्ट से चुनाव लड़ेंगी। ऐसे में भाजपा में इस सीट पर पहले से ही 2022 का चुनाव लड़ चुके और सक्रिय नेता जगमोहन सिंह राजू मजबूत दावेदार हैं। इसलिए डॉ. कौर को यहां से किनारा करना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा नेतृत्व उन्हें पार्टी में शामिल करता है, तो अमृतसर नार्थ सीट से उनके सक्रिय होने की संभावना ज्यादा है। इस सीट पर सियासी मुकाबला पहले ही दिलचस्प है। यहां से वर्तमान विधायक कुंवर विजय प्रताप जिन्हें आम आदमी पार्टी ने निष्कासित कर दिया है, अपनी अलग राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री अनिल जोशी, पूर्व विधायक सुनील दत्ती और कांग्रेस के पूर्व प्रधान अश्वनी कुमार पप्पू भी सक्रिय हैं और कांग्रेस पार्टी से अपनी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ऐसे में यदि डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को नार्थ सीट से चुनाव लड़ाया जाता है, तो यहां पर सियासी गणित बिगड़ सकता है। उधर, भाजपा के सूत्रों की माने, तो डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें नार्थ सीट के अलावा अमृतसर केंद्रीय सीट से भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। क्योंकि आम आदमी पार्टी के एक अन्य कद्दावर नेता के भाजपा में शामिल होने की प्रबल संभावना है। आप का यह नेता भी नार्थ हल्के के अलावा केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। ऐसे में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को ही यह निर्णय लेना है कि कौन से नेता को नार्थ में और किसे केंद्रीय क्षेत्र की सीट पर चुनाव लड़ाना है।