सुबोध सिंह। ऐसा कुख्यात नाम, जिसे सुनकर बड़े-बड़े ज्वेलर्स डर जाते हैं। उसने 10 साल में 400kg से अधिक सोने के गहने लूटे हैं। जेल में रहकर अपना गैंग चलाता है, जिसमें 132 अपराधी हैं। 14 महीने में 4 बड़े लूटकांड कराए। अगला टारगेट हाजीपुर का एक ब्रांडेड बड़ा ज्वेलर्स का शोरूम था। हथियारों के बल पर दिनदहाड़े करोड़ों रुपए का सोना लूटने की तैयारी थी। 10 फरवरी से पहले वारदात को अंजाम देना था, लेकिन गनीमत रही कि पहले ही पुलिस को भनक लग गई। इसका नतीजा 6 फरवरी को हाजीपुर में एनकाउंटर के रूप में देखने को मिला। बिहार STF और वैशाली पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन चलाया। आधे घंटे तक पुलिस और अपराधियों के बीच ताबड़तोड़ गोलियां चली। इसमें 2 लाख के इनामी और कुख्यात सोना लुटेरा प्रिंस उर्फ अभिजीत उर्फ चश्मा को मार गिराया गया। उसका साथी त्रिलोकी उर्फ रिशु गिरफ्तार हुआ। दोनों अपराधी कुख्यात सोना लुटेरा सुबोध गैंग के गुर्गे थे। आखिर कौन है सुबोध सिंह, जो कई राज्यों में सोना लूटने की बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड है। उसने कैसे अपना 132 अपराधियों का बड़ा गैंग खड़ा किया? कैसे 14 महीने में सोना लूट की 4 बड़ी वारदातें कराई? जानिए, संडे बिग स्टोरी में…। सुबोध के गैंग में 132 अपराधी, ज्यादातर की उम्र 22-35 साल पुलिस और एसटीएफ से मिली जानकारी के मुताबिक, हाजीपुर में एक बड़े ज्वेलर्स के आउटलेट पर डकैती की साजिश सुबोध सिंह ने जेल में बैठकर रची थी। बिहार का रहने वाला सुबोध फिलहाल राजस्थान की जेल में बंद है। वह देश के बड़े और कुख्यात सोना लुटेरों में से एक है। उसे उदयपुर पुलिस दूसरे केस के सिलसिले में ओडिशा की जेल से रिमांड पर ले गई है। सुबोध कई महीनों से ओडिशा के संबलपुर की जेल में बंद था। इससे पहले पश्चिम बंगाल और बिहार के जेल में भी था। हैरानी की बात है कि जेल में होने के बाद भी अपने गैंग को बड़ी आसानी से ऑपरेट कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि सुबोध के गैंग में करीब 132 बदमाश हैं। ज्यादातर की उम्र 22-35 साल है। गैंग में समस्तीपुर और वैशाली के लड़के सबसे अधिक हैं। इसके अलावा गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, झारखंड सहित 12 से अधिक राज्यों में इसके गैंग का नेटवर्क फैला है। अपने गुर्गों के बूते जेल में बैठकर सुबोध सोना लूटने के लिए बड़े ज्वेलरी शॉप, गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों और बैंकों को टारगेट करता है। जेल से 14 महीने में कराई सोना लूट की 4 बड़ी वारदात 2018 में बिहार STF और पटना पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन के तहत सुबोध सिंह को पटना से गिरफ्तार किया था। वह पहले बेउर जेल में बंद था। इसके बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस अपने राज्य में हुए करोड़ों रुपए के सोना लूट मामले में रिमांड पर ले गई। फिर उसे ओडिशा के संबलपुर जेल ले जाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, पिछले 14 महीने में उसने जेल में बैठकर सोना लूटने की 4 बड़ी वारदातें कराई। इसे बिहार के पूर्णिया, आरा और ओडिशा में दो जगहों पर अंजाम दिया गया। पुलिस की जांच में इन वारदातों का कनेक्शन सीधे सुबोध के गैंग से जुड़ा। यह बात भी सामने आई कि सुबोध जेल से ही बड़े ज्वेलरी शॉप, गोल्ड लोन कंपनियों और बैंकों को टारगेट करता था। लूट की पूरी रणनीति वही तय करता था। जेल में बैठे-बैठे करोड़ों रुपए के सोने का मालिक बन गया है। 50% पर बिहार-झारखंड और नेपाल में खपाता है लूट का सोना सबसे बड़ा सवाल है कि सुबोध सिंह लूट का करोड़ों रुपए का सोना कहां खपाता है? सूत्रों के मुताबिक, यह सोना 50% कीमत पर बिहार, झारखंड और नेपाल में बेचा जाता है। सुबोध का तगड़ा कनेक्शन लूट का सोना खरीदने वालों से है। सोना तय ठिकाने पर पहुंचाना सुबोध गैंग के अपराधियों के जिम्मा होता है। लूट का सोना नेपाल पहुंचाने के लिए नेपाल बॉर्डर पर उन जगहों को चुना जाता है, जहां सिक्योरिटी कम होती है या न के बराबर रहती है। दूसरे के नाम पर खड़ी की संपत्ति, मॉल भी बनवाया सोना लूटने से पहले सुबोध सिंह कैश लूटता था। इसने करीब 2014 में क्राइम की दुनिया में कदम रखा था। शुरुआती दौर में वह नालंदा जिले के रहने वाले कुख्यात अपराधी सुनील सिंह का असोसिएट हुआ करता था। बाद में उसने खुद का गैंग बनाया। फिर बड़े ज्वेलरी शॉप और गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों को टारगेट किया, सोना लूटने लगा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2017 में इसने खुद से आखिरी बार राजस्थान में सोना लूट की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद से अपने गुर्गों से सोना लूटवाता आ रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि सुबोध ने सोना लूट के बल पर 50 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति खड़ी की है। उसने रांची में एक बड़ा मॉल बनवा रखा है। पुलिस उस मॉल को आइडेंटिफाई कर रही है। दरसअल, सुबोध सारी संपत्ति दूसरे लोगों के नाम पर ले रहा है। ये कौन लोग हैं? इसका पता पुलिस लगा रही है। जेल में बैठकर सोना लूटने की पूरी प्लानिंग करता है सुबोध सिंह सुबोध सिंह बेहद शातिर दिमाग है। सोना लूट के किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए वह फुलप्रूफ प्लान बनाता था। अपने गैंग को स्लीपर सेल की तर्ज पर ऑपरेट करता है। हर किसी की जिम्मेदारी तय होती है। गैंग का एक ग्रुप सबसे पहले टारगेट की रेकी करता है। वारदात से 3-4 महीने पहले रेकी शुरू होती है। टारगेट का लोकेशन, सुरक्षा की स्थिति, कहां से जा सकते हैं, कहां से भागना है, ऐसी सभी जानकारियां जुटाने के बाद सुबोध सोना लूटने का पूरा डिटेल प्लान तैयार करता है। वारदात के बाद सोने को कई चरणों में अलग-अलग लोगों के जरिए ठिकाने लगाया जाता है। अपने गुर्गों को पुलिस की पकड़ से बचाने के लिए अपराधियों को अलग-अलग सिम और मोबाइल उपलब्ध कराए जाते हैं। अपराधियों को इकोनॉमिकली और इमोशनली सपोर्ट कर खड़ा किया गैंग सुबोध सिंह के गैंग के अपराधी जो सोना लूटते हैं उसमें से उन्हें हिस्सा नहीं मिलता। लूट के सोना पर सिर्फ सुबोध सिंह का हक होता है। वह वारदात को अंजाम देने वाले गुर्गों को कैश में लाख-दो लाख रुपए देता है। इसके अलावा गुर्गों के खिलाफ कोर्ट में चल रहे आपराधिक केस लड़ने में सपोर्ट करता है। केस का खर्च उठाता है। दरअसल, जेल में रहने के दौरान सुबोध सिंह चोरी या क्राइम के छोटे मामलों में बंद नए और कम उम्र के युवाओं को टारगेट करता है। जेल में रहते हुए उन्हें इकोनॉमिकली और इमोशनली तरीके से सपोर्ट करता है। उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करता है और अपने गैंग से जोड़ लेता है। इसका बड़ा उदाहरण पटना का शुभम है। वह नारकोटिक्स एक्ट के तहत पत्रकार नगर थाना से जेल गया था। जेल में उसकी मुलाकात सुबोध से हुई। सुबोध ने उसे अपने गैंग में शामिल कर लिया। इसके बाद 2022 में पुलिस की जांच में दो बड़े लूट कांड में शुभम का नाम सामने आया था। सेटिंग करने में भी माहिर है सुबोध, परिवार को ओडिशा में छिपाया पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुबोध एक बड़ा सेटिंगबाज है। वह किसी भी राज्य के जेल में बंद हो, वहां उसकी सेटिंग हो ही जाती है। हाल ऐसा होता है कि जेल के अंदर लोग इसे सलाम तक करते हैं। एक तरह से जेल को उसने अपना सेफ हाउस बना रखा है। उसके गुर्गे आसानी से जेल में सुबोध से मिलने पहुंच जाते हैं। वह अपने गुर्गे से जेल में ही आराम से पूरी प्लानिंग पर बात कर लेता है। सुबोध ने अपनी पत्नी समेत परिवार के सदस्यों को ओडिशा के एक शहर में छिपा रखा है। सुबोध सिंह के खास थे ये अपराधी सोना लूटने वालों में सुबोध गैंग के बाद दूसरा बड़ा नाम पुल्लू सिंह का आता है। वह पहले सुबोध के साथ ही काम करता था। बाद में अलग हो गया और खुद का गैंग बनाया। 70 से 80 अपराधी इसके गैंग में हैं। कुछ दिनों पहले ही पुल्लू सिंह समस्तीपुर जेल से बाहर निकला था। 2019 में इसके खास रहे मनीष सिंह को एनकाउंटर में STF और वैशाली पुलिस ने मार गिराया था। इसके पास से 2 AK-47 राइफल बरामद किए गए थे। इसके बाद राकेश झा उर्फ चुनमुन झा सुबोध का खास था। उसे पिछले साल अररिया में बिहार STF की टीम ने एनकाउंटर में मार गिराया था। वह आरा और पूर्णिया के सोना लूटकांड में शामिल था। सुबोध गैंग का यह पहला अपराधी था, जिसे एनकाउंटर में मार गिराया गया। दूसरा प्रिंस था, जिसका एनकाउंटर हाजीपुर में 6 फरवरी 2026 को हुआ था।