सोनीपत शहर के सेक्टर-23 की गलियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी धमक दर्ज कराने वाले 12 वर्षीय मार्टिन मलिक आज बाल मुक्केबाजी जगत का चमकता हुआ सितारा हैं। 04 सितंबर 2013 को जन्मे मार्टिन ने जिस उम्र में बच्चे खेल-खिलौनों में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को चौंका दिया। महज 8 साल की उम्र में 8 वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर इतिहास रचने वाले इस नन्हें खिलाड़ी की फिटनेस, गति और अनुशासन बड़े-बड़े खिलाड़ियों को भी प्रभावित कर चुका है। अब वह 12 साल का हो चुका है। अंडर-14 बॉक्सिंग चैंपियनशिप की तैयारी में दिन-रात पसीना बहा रहे हैं और उनका सपना है कि एक दिन ओलिंपिक में भारत का तिरंगा लहरा सके। 8 साल की उम्र में 8 विश्व रिकॉर्ड मार्टिन ने मुक्केबाजी पंच और पुश-अप्स जैसी शारीरिक क्षमता आधारित विधाओं में जो उपलब्धियां हासिल की, वे असाधारण हैं। 25 अक्टूबर 2021 को उन्होंने तीन मिनट में 1019 फुल पंच लगाकर स्वर्ण विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद 10 नवंबर 2021 को एक मिनट में 571 पंच लगाकर एक और स्वर्ण कीर्तिमान अपने नाम किया। 12 अगस्त 2020 को एक मिनट में 500 मुक्केबाजी पंच लगाकर उन्होंने एशिया और भारत स्तर पर रिकॉर्ड कायम किया, जबकि 05 दिसंबर 2020 को 30 सेकंड में 57 वाइड पुश-अप्स लगाकर एशियाई और भारतीय रिकॉर्ड दर्ज किए। 12 जनवरी 2022 को लंदन में आयोजित विश्व रिकॉर्ड प्रतियोगिता में तो मानो रिकॉर्डों की झड़ी लग गई। वहां मार्टिन ने तीन मिनट में 1100 फुल एक्सटेंशन पंच, एक मिनट में 440 फुल एक्सटेंशन पंच और तीन मिनट में 1700 मुक्केबाजी पंच लगाकर सबसे कम उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाया। 1700 पंच का यह रिकॉर्ड आज तक अटूट है। इसी दिन उन्होंने एक मिनट में पंचिंग बैग पर 630 पंच, 30 सेकंड में 70 बैकवर्ड हैंड पुश-अप्स और 30 सेकंड में 70 वाइड पुश-अप्स लगाकर भी विश्व कीर्तिमान स्थापित किए। लॉकडाउन से शुरू हुआ सफर मार्च 2020 के लॉकडाउन ने जहां पूरी दुनिया को घरों में रोक दिया था, वहीं इसी समय मार्टिन के जीवन में एक नई शुरुआत हुई। उनके पिता संजय ने घर पर ही उन्हें अभ्यास करवाना शुरू किया। शुरुआती दिनों में घर के कमरे और आंगन ही उनका प्रशिक्षण मैदान बने। पिता के मार्गदर्शन में एक्सरसाइज और पंच लगाने की शुरुआत हुई और देखते ही देखते यह अभ्यास जुनून में बदल गया। पिता का अधूरा सपना, बेटे ने थामा जिम्मा मार्टिन के पिता संजय स्वयं एक प्रतिभाशाली एथलीट रहे हैं। उन्होंने गुरुग्राम से लेकर सोनीपत के साई केंद्र तक अभ्यास किया और नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। राज्य स्तर पर भी उनके नाम चार स्वर्ण पदक दर्ज हैं, लेकिन पारिवारिक आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें अपना खेल करियर बीच में छोड़ना पड़ा। यही अधूरा सपना उन्होंने अपने बेटे में देखा और पूरी निष्ठा के साथ उसे तराशना शुरू किया। आज मार्टिन की सफलता में पिता की तपस्या साफ दिखाई देती है।
पढ़ाई में भी अव्वल, अनुशासन में मिसाल मार्टिन इस समय 12 वर्ष के हैं और सातवीं कक्षा के एग्जाम दे रहे हैं। वह नॉन-अटेंडिंग पढ़ाई कर रहे हैं और हर कक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करते रहे हैं। खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन मार्टिन ने अनुशासन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया है। सुबह 5 बजे से शुरू होता है चैंपियन का दिन मार्टिन का दिन सुबह 5 बजे शुरू हो जाता है। 5:30 बजे तक वह मैदान में पहुंच जाते हैं और सुबह 8 बजे तक कड़ी ट्रेनिंग करते हैं। इस दौरान बॉक्सिंग पंच, बेसिक ट्रेनिंग, पुश-अप्स, सिट-अप्स, रनिंग, योग और तकनीकी अभ्यास शामिल होता है। अभ्यास के बाद वह केला, खजूर और जूस लेते हैं, फिर घर पहुंचकर ड्राई फ्रूट्स का सेवन करते हैं। दोपहर 12 बजे उनका लंच होता है। जिसमें रोटी, चावल, दही और सलाद शामिल रहता है। दो घंटे के अंतराल के बाद फल लेते हैं और दिन में पढ़ाई करते हैं। शाम 4:30 बजे वह नवयुग अकादमी पहुंचते हैं, जहां कोच रविंद्र के मार्गदर्शन में शाम 5 से 8 बजे तक गहन अभ्यास करते हैं। मां का त्याग, बेटे की ताकत मार्टिन की मां पहले एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापिका थीं। लेकिन बेटे की बढ़ती उपलब्धियों और सख्त डाइट प्लान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पांच साल पहले नौकरी छोड़ दी। अब वह घर पर ही मार्टिन की पढ़ाई करवाती हैं और उनकी डाइट तथा दिनचर्या का पूरा ध्यान रखती हैं। बेटे की सफलता में मां का त्याग और समर्पण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। देश के दिग्गजों से सम्मान मार्टिन को हरियाणा सरकार, राज्यपाल और कई मंत्रियों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों भी वह सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। उनकी प्रतिभा और स्पीड को देखकर ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा भी प्रभावित हो चुके हैं। इतनी कम उम्र में इस तरह की पहचान मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। हेयर स्टाइल में छिपा राज मार्टिन के बड़े बाल उनकी पहचान बन चुके हैं। पिता संजय बताते हैं कि जब उन्होंने खेलना शुरू किया तो उनके बाल धीरे-धीरे बड़े हो गए और उनकी स्मार्टनेस देखकर कई विज्ञापन एजेंसियों ने संपर्क किया। स्पोर्ट्स और बच्चों के अंडरगारमेंट्स ब्रांड के लिए उन्हें साइन करने का प्रस्ताव मिला, लेकिन परिवार ने बेटे की दिनचर्या और लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए विज्ञापन से दूरी बना ली। उनका मानना है कि फिलहाल मार्टिन का पूरा ध्यान सिर्फ खेल और पढ़ाई पर रहना चाहिए। देश के लिए पदक जीतना एकमात्र लक्ष्य आज 12 साल का यह बाल मुक्केबाज अंडर-14 बॉक्सिंग चैंपियनशिप की तैयारी में जुटा है। उसका सपना है कि वह देश के लिए मेडल जीते और ओलिंपिक में भारत का नाम रोशन करे। मार्टिन मलिक की कहानी यह साबित करती है कि अगर परिवार का साथ, अनुशासन और अटूट मेहनत हो तो छोटी उम्र भी बड़ी उपलब्धियों की राह में बाधा नहीं बनती। मार्टिन आज केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं।