सोनीपत में फर्जी कॉल सेंटर पर सीएम फ्लाइंग की रेड:20 युवक-युवतियां काबू; सिस्टम में वायरस होने का विदेशियों को दिखाते थे डर

सोनीपत जिले के कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया में देर रात सीएम फ्लाइंग और सीआईए स्टाफ की संयुक्त टीम ने फैक्टरी नंबर-394 में चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मार दिया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में मौके से 16 युवक और 4 युवतियां लैपटॉप पर काम करते हुए मिली। सभी हेडफोन लगाकर अंग्रेजी में विदेशी नागरिकों से बातचीत कर रहे थे। जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह खुद को माइक्रोसॉफ्ट का कर्मचारी बताकर अमेरिका के नागरिकों से तकनीकी सहायता के नाम पर ऑनलाइन ठगी कर रहा था। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन, हेडफोन और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। इस संबंध में थाना कुंडली में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामला क्या था सीएम फ्लाइंग में तैनात उपनिरीक्षक सतपाल सिंह को गुप्त सूत्रों से सूचना मिली थी कि कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया स्थित फैक्टरी नंबर-394 में अवैध कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। यहां से विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने के नाम पर ठगा जा रहा था। सूचना को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के बाद संयुक्त टीम गठित कर देर रात छापा मारा गया। संयुक्त टीम ने की छापेमारी उपनिरीक्षक सतपाल सिंह के नेतृत्व में एएसआई राजेश, ईएसआई महावीर, सीटी रितु, सीआईए स्टाफ के एसआई यशबीर, ईएएसआई नरेश, ईएएसआई नवीन, सिपाही जतिन तथा साइबर सेल के अधिकारियों की संयुक्त टीम तैयार की गई। योजना बनाकर फैक्टरी नंबर-394 पर रेड की गई। मौके पर बने कॉल सेंटरनुमा कार्यालय में 20 लोग लैपटॉप पर काम करते मिले। सभी अंग्रेजी में बातचीत कर रहे थे और हेडफोन लगाए हुए थे। ऐसे करते थे अमेरिका के नागरिकों से ठगी पूछताछ में सामने आया कि कॉल सेंटर के सुपरवाइजर अक्षय अरोड़ा और राहुल मुंजाल हैं, जबकि मुख्य संचालक आशीष गाबा निवासी जनकपुरी, दिल्ली बताया गया। गिरोह टोल फ्री नंबर 1889568881 के माध्यम से MICRO SIP एप पर कॉल प्राप्त करता था। आरोपी खुद को माइक्रोसॉफ्ट का कर्मचारी बताकर ग्राहकों को कंप्यूटर में वायरस या तकनीकी समस्या होने का डर दिखाते थे। इसके बाद रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करवाकर डिवाइस का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे।
फर्जी स्कैनिंग दिखाकर पीड़ितों से ईमेल आईडी, बैंक खाते की जानकारी प्राप्त की जाती थी। यह सारी डिटेल मुख्य आरोपी को भेजी जाती थी, जो आगे की वित्तीय ठगी को अंजाम देता था। बिना लाइसेंस चल रहा था कॉल सेंटर जब आरोपियों से दूरसंचार विभाग (DOT) का लाइसेंस, कंपनी रजिस्ट्रेशन, पेमेंट मोड, डेटा सोर्स और अन्य दस्तावेज मांगे गए तो वे कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे स्पष्ट हो गया कि कॉल सेंटर पूरी तरह अवैध रूप से संचालित हो रहा था। भारी मात्रा में उपकरण बरामद पुलिस ने मौके से तीन लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और तीन हेडफोन तत्काल कब्जे में लिए। इसके अलावा तलाशी के दौरान 23 अन्य लैपटॉप, 26 मोबाइल फोन, 21 लैपटॉप चार्जर, 16 हेडफोन और एक वाई-फाई राउटर भी बरामद हुआ। साइबर टीम की सहायता से सभी उपकरणों के सीरियल नंबर की पहचान कर उन्हें सील किया गया। बरामदगी की फर्द तैयार कर गवाहों के हस्ताक्षर करवाए गए। मौके की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 319(2) तथा आईटी एक्ट 2000 की धारा 43, 66, 66D और 75 के तहत थाना कुंडली में 20 फरवरी 2026 को दर्ज किया गया। आगे की जांच थाना प्रभारी के निर्देशन में की जा रही है। मुख्य संचालक की तलाश जारी पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर का मुख्य संचालक आशीष गाबा फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता था। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

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