सोनीपत जिले के गांव शहजादपुर के बर्खास्त सरपंच दीपक शर्मा ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने बर्खास्त किए जाने पर अपना दर्द जाहिर किया। उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाते हुए गन्नौर के विधायक देवेंद्र कादियान पर सीधे निशाना साधा। दीपक शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई निष्पक्ष जांच का परिणाम नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव का नतीजा है। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में समर्थन न देने के कारण उन्हें जानबूझकर टारगेट किया गया। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन के फैसलों पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई: दीपक शर्मा
दीपक शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी बर्खास्तगी पूरी तरह राजनीतिक दबाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने विधानसभा चुनाव में विधायक देवेंद्र कादियान का समर्थन नहीं किया था, जिसके चलते उन्हें निशाना बनाया गया और प्रशासनिक स्तर पर उनके खिलाफ कार्रवाई करवाई गई। कोर्ट और प्रशासन से नहीं मिली राहत
दीपक शर्मा ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग अदालतों में अपील की, लेकिन उन्हें कहीं से राहत नहीं मिली। इसके बाद तत्कालीन डीसी सुशील सारवान ने उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया। हालांकि उन्होंने इन फैसलों को भी गलत ठहराया। गांव में विकास कार्यों का किया दावा
दीपक शर्मा ने कहा कि सरपंच बनने के बाद उन्होंने गांव की मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता दी। विशेष रूप से स्ट्रीट लाइट की समस्या को हल करने के लिए उन्होंने नई लाइट लगाने के बजाय पुरानी सोलर लाइटों की मरम्मत करवाई, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली।
लाइटों की जांच रिपोर्ट में विरोधाभास
उन्होंने बताया कि बीडीपीओ की जांच में मौके पर 60 लाइटें पाई गईं, जबकि एडीसी की रिपोर्ट में केवल 48 लाइटों का जिक्र किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही मामले में दो अलग-अलग रिपोर्ट कैसे हो सकती हैं और इसे साजिश का हिस्सा बताया। गबन के आरोपों को बताया झूठा
दीपक शर्मा ने कहा कि उन पर 4 लाख रुपए से अधिक की रिकवरी डाली गई है, जिसमें जीएसटी भी शामिल है। उन्होंने गबन के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने सभी कार्य पारदर्शिता के साथ किए और जीपीएस लोकेशन व फोटो भी अपलोड किए गए। प्रशासनिक अधिकारियों पर भी लगाए आरोप
दीपक शर्मा ने दावा किया कि जब उन्होंने एडीसी से मुलाकात की तो उन्हें राजनीतिक दबाव की बात बताई गई। उन्होंने कहा कि विधायक के इशारे पर प्रशासनिक दबाव बनाकर उन्हें फंसाया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में दीपक शर्मा ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनकी छवि साफ हो सके। मामला क्या था…
4.63 लाख रुपए का गबन: जांच में सामने आया कि सरपंच ने 92 सोलर स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत के नाम पर ग्राम पंचायत खाते से 4 लाख 63 हजार 680 रुपए की राशि निकाली। लेकिन मौके पर जांच में केवल 48 लाइटें ही सही हालत में मिली, जबकि कई लाइटें हटाई गईं और दोबारा लगाई ही नहीं गईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह सीधा-सीधा सार्वजनिक धन के गबन का मामला है, जिसे प्रमाणों के आधार पर पूरी तरह सिद्ध माना गया। बिना तकनीकी जांच के किया भुगतान: जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित फर्म को भुगतान करने से पहले न तो जूनियर इंजीनियर (JE) और न ही सब-डिविजनल इंजीनियर (SDE) से तकनीकी सत्यापन कराया गया। नियमों को नजरअंदाज करते हुए सीधे भुगतान जारी कर दिया गया, जो गंभीर अनियमितता मानी गई। बिना अनुमति कराए काम, रिकॉर्ड में हेरफेर: सरपंच द्वारा मरम्मत कार्य शुरू करने से पहले कोई तकनीकी या प्रशासनिक स्वीकृति नहीं ली गई। सभी 92 लाइटों को रिकॉर्ड में एक समान तरीके से ठीक दिखाया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बिना वास्तविक जांच के कागजी एंट्री की गई थी। फर्जी जीपीएस फोटो से धोखा देने की कोशिश: सबसे गंभीर मामला तब सामने आया, जब सरपंच द्वारा पेश की गई जीपीएस टैग फोटो की जांच की गई। ये फोटो गांव शाहजादपुर की बजाय सोनीपत शहर की राजीव गांधी कॉलोनी की लोकेशन की पाई गईं। इससे यह साबित हुआ कि सबूत के तौर पर फर्जी फोटो पेश किए गए, जो जांच को गुमराह करने की कोशिश थी। फर्जी जीपीएस फोटो से धोखा देने की कोशिश: सबसे गंभीर मामला तब सामने आया, जब सरपंच द्वारा पेश की गई जीपीएस टैग फोटो की जांच की गई। ये फोटो गांव शाहजादपुर की बजाय सोनीपत शहर की राजीव गांधी कॉलोनी की लोकेशन की पाई गईं। इससे यह साबित हुआ कि सबूत के तौर पर फर्जी फोटो पेश किए गए, जो जांच को गुमराह करने की कोशिश थी।