चंडीगढ़| स्वीपिंग मशीनों की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। इन मशीनों पर 4 कैमरे लगाए जाएंगे। 1 आगे, 1 ऊपर, 1 नीचे व 1 पीछे की ओर। यदि सफाई के दौरान मशीन के नीचे लगा सेंसर बंद पाया जाता है तो एजेंसी को भुगतान नहीं किया जाएगा। अब एजेंसियों को हर माह बिल के साथ काम से जुड़े वीडियो फुटेज भी जमा करनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उसकी जांच हो सके। इस व्यवस्था में 1250 रुपए प्रति घंटे के हिसाब से पेनल्टी का प्रावधान किया है, इससे एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी व काम में लापरवाही नहीं होगी। यह जानकारी सोमवार को स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों ने सीएम नायब सिंह सैनी को दी। सीएम ने कचरा कलेक्शन सिस्टम की भी समीक्षा की अधिकारियों ने सीएम को बताया कि सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक आरआईएफडी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, इससे कार्यों की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ी है। सीएम ने जीपीएस आधारित कचरा कलेक्शन सिस्टम की भी समीक्षा की और इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली में आरआईएफडी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। वे सचिवालय में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अफसरों की बैठक ले रहे थे। खास बात यह है कि सीएम ने पूरे राज्य में कार्यरत सेनेटरी वर्कर्स के लिए एक जैसी ड्रेस लागू करने को कहा है। सीएम ने बारिश से पहले होने वाली ड्रेन सफाई, जल निकासी व्यवस्था और सफाई व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।