कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे के बीच एक बार फिर आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की मौत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। निज्जर की हत्या में कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को अहम सबूत मिले हैं। इनमें पता चला है कि वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के कर्मचारियों ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में मदद की। यह दावा कनाडा की एक मीडिया रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में जिक्र है कि एक वीजा अधिकारी ने अपनी पोजीशन का इस्तेमाल करके निज्जर और अन्य खालिस्तान समर्थकों के बारे में जानकारी इकट्ठा की, जो हत्या में सहायक साबित हुई। हरदीप सिंह के बारे में जानकारी जुटाई मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारतीय अधिकारियों में से एक वैंकूवर स्थित दूतावास में वीजा अधिकारी के तौर पर काम कर रहा था। उसने अपने पद का फायदा उठाकर सरे (बीसी) में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से हरदीप सिंह निज्जर से जुड़ी जानकारी जुटाई। यह जानकारी एक कानून प्रवर्तन अधिकारी और एक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सूत्र ने दी है। वहीं, रिपोर्ट में एक अधिकारी का जिक्र किया गया है, जिसे रॉ का अधिकारी बताया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कनाडा की खुफिया एजेंसी दूतावास में तैनात एक गुप्त RAW एजेंट पर नजर रखे हुए थी, जो वीजा अधिकारी के रूप में काम कर रहा था। पहले भी आरोप लगे थे हालांकि ओटावा पहले ही भारत के एजेंटों पर हरदीप की हत्या में शामिल होने का आरोप लगा चुका है, लेकिन अब तक दूतावास के किन अधिकारियों की क्या भूमिका थी, यह सार्वजनिक नहीं किया गया था। अक्टूबर 2024 में कनाडा सरकार ने छह भारतीय राजनयिकों को देश से निष्कासित किया, लेकिन सार्वजनिक तौर पर केवल तत्कालीन उच्चायुक्त संजय वर्मा का नाम ही बताया गया। उस समय कनाडा की प्रेस ने खबर दी थी कि सिंह का नाम कनाडा सरकार की मान्यता प्राप्त राजनयिकों की सूची में शामिल था, जिसे निष्कासन के बाद हटा दिया गया। तीन साल पहले हुई थी हत्या हरदीप सिंह निज्जर पंजाब को भारत से अलग कर एक अलग सिख देश बनाने के लिए रेफरेंडम आयोजित करने में अहम भूमिका निभा रहे थे। 18 जून 2023 को सरे (ब्रिटिश कोलंबिया) के एक गुरुद्वारे की पार्किंग में उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी मौत की जांच से कनाडा और भारत के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्ते और खराब हो गए। भारत ने हमेशा इस हत्या की साजिश में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है। भारत पहले से निज्जर को अलगाववादी मानता रहा है और उस पर अपने देश में हिंसक गतिविधियों के समन्वय का आरोप लगाता रहा है, हालांकि अक्सर इन आरोपों के ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए। भारत सरकार ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है और कहा है कि कोई विदेशी हस्तक्षेप नहीं हुआ। उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने हाल ही में मुंबई में कहा, “यह कभी हुआ ही नहीं।” भारत का दावा है कि खालिस्तानी चरमपंथी कनाडा-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।