हरियाणवी कलाकारों की कंट्रोवर्सी पर बोले गजेंद्र फोगाट:कहा- मुंह और बिटोड़े में फर्क नहीं रहा तो एक्शन भी होगा; रावण से तुलना की

हरियाणवी कलाकार और सीएम ओएसडी गजेंद्र फोगाट ने प्रदेश में हरियाणवी गानों व कलाकारों को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत की। इस दौरान गजेंद्र फोगाट ने हरियाणवी गानों के साथ अब हरियाणवी फिल्म आने पर कहा कि हरियाणवी व मां बोली आगे बढ़ रही है। हरियाणवी संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में लहरा रहा है। स्वस्थ, स्वच्छ व अच्छे संदेश परक गाने इस टाइम सर चढ़कर बोल रहे हैं। चाहे वह मेरा जी लाग्य है बाब्यां मैं या फिर बंजारे हो। उन्होंने कहा कि हरियाणवी फिल्में व सीरियल अभी आ रहे हैं। जिससे एक्टर्स व टैक्निशियन का ट्रेंड बढ़ रहा है। थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि पहले हरियाणा का युवा इस दिशा में अपना भविष्य नहीं मानता था। जब हमने 32 साल पहले हमने शुरू किया, उस समय घड़वा व बैंज्यू चलता था। हमने जब इलेक्ट्रिक इंस्ट्रूमेंट प्रयोग किए थे, तो लोगों ने मजाक बनाया था, आज उन इलेक्ट्रिक इंस्ट्रूमेंट बड़े-बड़े शो हो रहे हैं। हरियाणवी फिल्मों को लेकर सरकार की तरफ से मदद भी की जाती है और सब्सिडी दी हुई है। जितने एक्टर काम करते हैं, उनको हरियाणा कला परिषद की तरफ से मंच उपलब्ध करवाते हैं। फोगाट बोले- पहले सेंसर होता था हरियाणवी गानों को बिना पॉलिसी के कलाकारों द्वारा गाकर अपने चैनल पर प्रसारित करने को लेकर गजेंद्र फोगाट ने कहा कि एक टाइम पर जब गाना शुरू किया 1994-95 में तो जो कैसेट आती थी, उनका सेंसर होता था। उसको लेकर आवाज उठाई, पत्र डाले तो सेंसर दिल्ली में लगाए। लेकिन जब यू-ट्यूब आया तो वह सेंसर भी खत्म हो गया। यहां सबका अपना मंच है। यू-ट्यूब को भी सेंसर्ड गाने स्वीकार करने चाहिए, लेकिन यू-ट्यूब अमेरिका में बैठा है। आज कोई भी एक्शन लेना हो तो अमेरिका में कहना पड़ता है। जो जटिल प्रक्रिया है। अगर सेंसर यू-ट्यूब पहले ही इतना कड़ा हो जाए कि हिंसात्मक, द्विअर्थी शब्द व अश्लील शब्द नहीं होने चाहिए। यू-ट्यूब अपना सेंसर जारी कर दे तो मजा आ जाएगा। सरकार इसको लेकर सख्त है और सख्ती की भी है। एक-दूसरे को गाली देने वाले कलाकारों को दी नसीहत हरियाणवी कलाकारों में सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक-दूसरे को गाली-गलौज देने पर गजेंद्र फोगाट ने कहा कि यह संस्कारों का खेल है। रावण आज से लाखों साल पहले था, उन्होंने सीता माता को उठा लिया था, जिसका उसे दंड मिला। रावण आज भी है। यह हर काल में होता है। यह व्यक्तिगत न्याय व संस्कार की बात है। कलाकार को यह सोचना चाहिए कि वह कुछ बोल रहा है, लिख रहा है, गा रहा है तो उसका एक अच्छा संदेश समाज में जाए। अगर मुंह और बिटोड़े में फर्क नहीं रहा तो उस पर एक्शन भी लिया जाएगा।

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